अल-अनफाल · 56/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
الَّذِينَ عَاهَدتَّ مِنْهُمْ ثُمَّ يَنقُضُونَ عَهْدَهُمْ فِي كُلِّ مَرَّةٍ وَهُمْ لَا يَتَّقُونَ ۝٥٦
Allazeena`aahatta min hum summa yanqudoona `ahdahum fee kulli marratinw wa hum laa yattaqoon
📖 हिंदी अर्थ
ऐ रसूल जिन लोगों से तुम ने एहद व पैमान किया था फिर वह लोग अपने एहद को हर बार तोड़ डालते है और (फिर ख़ुदा से) नहीं डरते

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • عَاهَدتَّ: आपने उनसे संधि/समझौता किया।
  • يَنقُضُونَ: वे तोड़ते हैं।
  • عَهْدَهُمْ: अपनी प्रतिज्ञा/वचन।
  • لَا يَتَّقُونَ: वे अल्लाह से डरते नहीं।

तफ़सीर (व्याख्या):

ये आयत उन लोगों (यहूदियों) के बारे में है, जिनसे आपने (ऐ नबी!) संधि और समझौता किया था, जैसे बनी क़ुरैज़ा और कअब इब्न अशरफ़ और उनके साथी। उन्होंने आपसे वचन लिया था कि वे आपके विरुद्ध किसी की सहायता नहीं करेंगे और न ही आपसे युद्ध करेंगे। लेकिन वे हर बार अपनी प्रतिज्ञा को तोड़ते रहे—जब भी उन्होंने कोई वचन दिया, उसे भंग कर दिया। उन्होंने मक्का के मुशरिकों को हथियार और सहायता प्रदान की, ताकि वे आपसे युद्ध कर सकें। वे अल्लाह से बिल्कुल नहीं डरते, न अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने का ख़याल रखते हैं और न ही अल्लाह की पकड़ से सावधान रहते हैं। यह उनकी आदत थी कि वे हर समझौते को तोड़ देते थे, क्योंकि उनके दिलों में ईमान और अल्लाह का भय नहीं था।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. इस आयत से हमें सीख मिलती है कि वचन और समझौते को पूरा करना इस्लाम का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। एक मुसलमान को चाहिए कि वह अपने वादों को पूरा करे, चाहे सामने वाला कोई भी हो।
  2. यह आयत उन लोगों के धोखे से सावधान रहने की शिक्षा देती है जो बार-बार वचन तोड़ते हैं। हमें चाहिए कि ऐसे लोगों से निपटने में सतर्कता बरतें।
  3. अल्लाह का भय (तक़वा) ही वह चीज़ है जो इंसान को बुरे कामों से रोकती है। जिसके दिल में अल्लाह का डर नहीं, वह किसी भी गुनाह को करने से नहीं झिझकता।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में अमानतदारी और ईमानदारी बहुत बड़ी नेमत है। जो लोग इन गुणों से वंचित हैं, वे समाज के लिए खतरा हैं।
  5. मुसलमान को चाहिए कि वह अपने अल्लाह से डरने वाला और अपने वादों का पक्का हो, ताकि उसका जीवन दूसरों के लिए नमूना बन सके और लोग इस्लाम की सच्चाई को समझ सकें।


📜 आयत 54-58 — अल-अनफाल

54كَدَأْبِ آلِ فِرْعَوْنَ ۙ وَالَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَذَّبُوا بِآيَاتِ رَبِّهِمْ فَأَهْلَكْنَاهُم بِذُنُوبِهِمْ وَأَغْرَقْنَا آلَ فِرْعَوْنَ ۚ وَكُلٌّ كَانُوا ظَالِمِينَ
(उन लोगों की हालत) क़ौम फिरऔन और उन लोगों की सी है जो उनसे पहले थे और अपने परवरदिगार की आयतों को झुठलाते थे तो हमने भी उनके गुनाहों की वजह से उनको हलाक़ कर डाला और फिरऔन की क़ौम को डुबा मारा और (ये) सब के सब ज़ालिम थे
55إِنَّ شَرَّ الدَّوَابِّ عِندَ اللَّهِ الَّذِينَ كَفَرُوا فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा के नज़दीक जानवरों में कुफ्फ़ार सबसे बदतरीन तो (बावजूद इसके) फिर ईमान नहीं लाते
56الَّذِينَ عَاهَدتَّ مِنْهُمْ ثُمَّ يَنقُضُونَ عَهْدَهُمْ فِي كُلِّ مَرَّةٍ وَهُمْ لَا يَتَّقُونَ
ऐ रसूल जिन लोगों से तुम ने एहद व पैमान किया था फिर वह लोग अपने एहद को हर बार तोड़ डालते है और (फिर ख़ुदा से) नहीं डरते
57فَإِمَّا تَثْقَفَنَّهُمْ فِي الْحَرْبِ فَشَرِّدْ بِهِم مَّنْ خَلْفَهُمْ لَعَلَّهُمْ يَذَّكَّرُونَ
तो अगर वह लड़ाई में तुम्हारे हाथे चढ़ जाएँ तो (ऐसी सख्त गोश्माली दो कि) उनके साथ साथ उन लोगों का तो अगर वह लड़ाई में तुम्हारे हत्थे चढ़ जाएं तो (ऐसी सजा दो की) उनके साथ उन लोगों को भी तितिर बितिर कर दो जो उन के पुश्त पर हो ताकि ये इबरत हासिल करें
58وَإِمَّا تَخَافَنَّ مِن قَوْمٍ خِيَانَةً فَانبِذْ إِلَيْهِمْ عَلَىٰ سَوَاءٍ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَا يُحِبُّ الْخَائِنِينَ
और अगर तुम्हें किसी क़ौम की ख्यानत (एहद शिकनी(वादा ख़िलाफी)) का ख़ौफ हो तो तुम भी बराबर उनका एहद उन्हीं की तरफ से फेंक मारो (एहदो शिकन के साथ एहद शिकनी करो ख़ुदा हरगिज़ दग़ाबाजों को दोस्त नहीं रखता
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीRevelation
56आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 56

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Tuesday, August 18, 2026

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