Wa immaa takhaafana min qawmin khiyaanatan fambiz ilaihim `alaa sawaaa`; innal laaha laayuhibbul khaaa`ineen
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और अगर तुम्हें किसी क़ौम की ख्यानत (एहद शिकनी(वादा ख़िलाफी)) का ख़ौफ हो तो तुम भी बराबर उनका एहद उन्हीं की तरफ से फेंक मारो (एहदो शिकन के साथ एहद शिकनी करो ख़ुदा हरगिज़ दग़ाबाजों को दोस्त नहीं रखता
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اور اگر تم کو کسی قوم سے دغا بازی کا خوف ہو تو (ان کا عہد) انہیں کی طرف پھینک دو (اور) برابر (کا جواب دو) کچھ شک نہیں کہ خدا دغابازوں کو دوست نہیں رکھتا
تَخَافَنَّ: तुम्हें डर हो (किसी क़ौम से धोखे का अंदेशा हो)।
خِيَانَةً: वचन भंग करना, धोखा देना।
فَانبِذْ: फेंक दो, उनके सामने उनका अहद (संधि-पत्र) डाल दो।
عَلَىٰ سَوَاءٍ: इस तरह कि दोनों पक्ष बराबर जानकारी रखें (यानी तुम और वे सब जान लें कि संधि समाप्त हो गई)।
तफ़सीर:
ऐ नबी! अगर तुम्हें किसी क़ौम (जिनसे तुमने संधि की है) से धोखे और वचन भंग का डर हो — यानी उनकी तरफ़ से ऐसे संकेत और निशानियाँ दिखें जिनसे यह अंदेशा हो कि वे संधि तोड़ देंगे — तो उनके साथ धोखे से काम मत करो, बल्कि उनके अहद (संधि-पत्र) को उन्हीं की तरफ़ फेंक दो, यानी उन्हें साफ़-साफ़ बता दो कि संधि समाप्त हो गई। यह इसलिए कि दोनों पक्षों को बराबर मालूम हो जाए कि अब कोई संधि नहीं रही, और तुम उन पर अचानक हमला न करो। क्योंकि अगर तुम उन्हें पहले सूचित किए बिना हमला करोगे, तो यह भी एक प्रकार की ख़यानत (धोखा) होगी। और अल्लाह ख़यानत करने वालों को पसंद नहीं करता — चाहे वे मुसलमान हों या ग़ैर-मुस्लिम। अतः तुम स्वयं भी ख़यानत से बचो, क्योंकि अल्लाह धोखेबाज़ों से प्रेम नहीं करता, बल्कि उन पर क्रोधित होता है।
फ़ायदे (सबक़):
ईमानदारी और वचन की पाबंदी — इस आयत से सीख मिलती है कि मुसलमान को हमेशा वचन का पक्का होना चाहिए। अगर दूसरा पक्ष धोखा देने की कोशिश करे, तो भी हमें साफ़-साफ़ और ईमानदारी से बात रखनी चाहिए, कभी धोखे का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए।
अचानक हमले की मनाही — इस्लाम सिखाता है कि युद्ध में भी अचानक और बिना चेतावनी के हमला करना उचित नहीं है। पहले स्पष्ट रूप से संधि समाप्त होने की घोषणा करनी चाहिए। यह इस्लाम की न्यायप्रियता और मानवीय मूल्यों का प्रमाण है।
अल्लाह की नापसंदगी से बचना — अल्लाह ख़यानत करने वालों को पसंद नहीं करता। यह बात हर मुसलमान के दिल में खौफ़ पैदा करती है कि हम कभी धोखा न दें, क्योंकि अल्लाह की नापसंदगी सबसे बड़ी हानि है।
अमन और भरोसे का माहौल — यह आयत समाज में अमन और भरोसे को बढ़ावा देती है। जब दोनों पक्ष एक-दूसरे के साथ साफ़-साफ़ बात करेंगे, तो आपसी विश्वास बना रहेगा और लड़ाई-झगड़े कम होंगे। यही इस्लाम का सुंदर पैग़ाम है।
और अगर तुम्हें किसी क़ौम की ख्यानत (एहद शिकनी(वादा ख़िलाफी)) का ख़ौफ हो तो तुम भी बराबर उनका एहद उन्हीं की तरफ से फेंक मारो (एहदो शिकन के साथ एहद शिकनी करो ख़ुदा हरगिज़ दग़ाबाजों को दोस्त नहीं रखता
तो अगर वह लड़ाई में तुम्हारे हाथे चढ़ जाएँ तो (ऐसी सख्त गोश्माली दो कि) उनके साथ साथ उन लोगों का तो अगर वह लड़ाई में तुम्हारे हत्थे चढ़ जाएं तो (ऐसी सजा दो की) उनके साथ उन लोगों को भी तितिर बितिर कर दो जो उन के पुश्त पर हो ताकि ये इबरत हासिल करें
और अगर तुम्हें किसी क़ौम की ख्यानत (एहद शिकनी(वादा ख़िलाफी)) का ख़ौफ हो तो तुम भी बराबर उनका एहद उन्हीं की तरफ से फेंक मारो (एहदो शिकन के साथ एहद शिकनी करो ख़ुदा हरगिज़ दग़ाबाजों को दोस्त नहीं रखता
और (मुसलमानों तुम कुफ्फार के मुकाबले के) वास्ते जहाँ तक तुमसे हो सके (अपने बाज़ू के) ज़ोर से और बॅधे हुए घोड़े से लड़ाई का सामान मुहय्या करो इससे ख़ुदा के दुश्मन और अपने दुश्मन और उसके सिवा दूसरे लोगों पर भी अपनी धाक बढ़ा लेगें जिन्हें तुम नहीं जानते हो मगर ख़ुदा तो उनको जानता है और ख़ुदा की राह में तुम जो कुछ भी ख़र्च करोगें वह तुम पूरा पूरा भर पाओगें और तुम पर किसी तरह ज़ुल्म नहीं किया जाएगा
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