अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آووا: उन्होंने (मुहाजिरों को) अपने घरों में जगह दी, उन्हें पनाह दी और उनकी मदद की।
- نصروا: उन्होंने (मुहाजिरों की) सहायता की, उनका साथ दिया और दीन (धर्म) के मामले में उनकी मदद की।
- ولاية: मदद, सहायता, संरक्षण और आपसी साझेदारी का अधिकार।
- ميثاق: पक्का अहद (संधि/समझौता) जो दो पक्षों के बीच हो।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मोमिनों के आपसी रिश्तों की बुनियाद रखता है और स्पष्ट करता है कि ईमान, हिजरत (प्रवास) और जिहाद ही वह रिश्ते हैं जो मुसलमानों को आपस में जोड़ते हैं। जिन लोगों ने अल्लाह और उसके रसूल ﷺ पर ईमान लाया, अपने वतन और अपने परिवार को छोड़कर अल्लाह की राह में हिजरत की, और अपनी जान और माल से अल्लाह की राह में जिहाद किया — और दूसरी तरफ वे लोग (अंसार) जिन्होंने इन मुहाजिरों को अपने घरों में जगह दी, उन्हें अपने माल में शरीक किया और दीन की मदद की — ये सब एक दूसरे के सच्चे दोस्त और मददगार हैं। उनका आपसी रिश्ता खून और रिश्तेदारी से ऊपर उठकर ईमान और भाईचारे पर क़ायम है।
लेकिन जो लोग ईमान तो लाए, मगर कुफ्र के इलाके में ही रह गए और हिजरत नहीं की, तो अल्लाह तआला फरमाता है: "तुम्हारा उनसे कोई वलायत (संरक्षण और मदद) का रिश्ता नहीं, जब तक वे हिजरत करके तुम्हारे पास न आ जाएँ।" यानी जब तक वे दारुल-हर्ब (कुफ्र के इलाके) को छोड़कर दारुल-इस्लाम में नहीं आ जाते, तुम पर उनकी मदद और उनकी हिफाज़त वाजिब नहीं है। हाँ, अगर वे दीन के मामले में (यानी धार्मिक उत्पीड़न के कारण) तुमसे मदद माँगें, तो उनकी मदद करना तुम्हारा फर्ज़ है — सिवाय उस क़ौम के जिनसे तुम्हारा मु'आहिदा (संधि) हो, क्योंकि अहद को निभाना भी ईमान का हिस्सा है। और अल्लाह तआला तुम्हारे सारे कामों को देख रहा है, कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है, और वह हर एक को उसकी नीयत और अमल के मुताबिक बदला देगा।
दावती पहलू:
यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि इस्लामी भाईचारा किसी जाति, रंग या वतन की बुनियाद पर नहीं, बल्कि ईमान और अल्लाह की राह में कुर्बानी पर खड़ा होता है। जो लोग अल्लाह की राह में अपना घर-बार छोड़ देते हैं और जान-माल से जिहाद करते हैं, और जो उन्हें पनाह देते हैं और उनकी मदद करते हैं — अल्लाह उन्हें आपस में भाई बना देता है। यह वह प्यारा रिश्ता है जो दुनिया के किसी और निज़ाम में नहीं मिलता। आज भी अगर मुसलमान इस भाईचारे को अपना लें, तो उनकी ताकत और इज़्ज़त में बेपनाह बढ़ोतरी हो सकती है। याद रखिए, अल्लाह हर अमल को देख रहा है — अच्छा हो या बुरा — और वह हर किसी को उसकी नीयत के मुताबिक पुरस्कृत करेगा।
📜 आयत 70-74 — अल-अनफाल
अनुवाद — अल-अनफाल 72
सूरा अल-अनफाल आयत 72 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और हिजरत की और…सूरा आयत 72/75 — अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनफाल सुनें, अल-अनफाल अनुवाद, अल-अनफाल mp3, अल-अनफाल pdf. आयत 70–74. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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