अल-अनफाल · 72/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَهَاجَرُوا وَجَاهَدُوا بِأَمْوَالِهِمْ وَأَنفُسِهِمْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَالَّذِينَ آوَوا وَّنَصَرُوا أُولَٰئِكَ بَعْضُهُمْ أَوْلِيَاءُ بَعْضٍ ۚ وَالَّذِينَ آمَنُوا وَلَمْ يُهَاجِرُوا مَا لَكُم مِّن وَلَايَتِهِم مِّن شَيْءٍ حَتَّىٰ يُهَاجِرُوا ۚ وَإِنِ اسْتَنصَرُوكُمْ فِي الدِّينِ فَعَلَيْكُمُ النَّصْرُ إِلَّا عَلَىٰ قَوْمٍ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهُم مِّيثَاقٌ ۗ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ ۝٧٢
Innal lazeena aamanoo wa haajaroo wa jaahadoo bi amwaalihim wa anfusihim fee sabeelil laahi wallazeena aawaw wa nasarooo ulaaa`ika ba`duhum awliyaaa`u ba`d; wallazeena aamanoo wa lam yuhaajiroo maa lakum minw walaayatihim min shai`in hatta yuhaajiroo; wa inistan sarookum fid deeni fa`alaiku munnasru illaa `alaa qawmim bainakum wa bainahum meesaaq; wallaahu bimaa ta`maloona Baseer
📖 हिंदी अर्थ
जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और हिजरत की और अपने अपने जान माल से ख़ुदा की राह में जिहाद किया और जिन लोगों ने (हिजरत करने वालों को जगह दी और हर (तरह) उनकी ख़बर गीरी (मदद) की यही लोग एक दूसरे के (बाहम) सरपरस्त दोस्त हैं और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और हिजरत नहीं की तो तुम लोगों को उनकी सरपरस्ती से कुछ सरोकार नहीं-यहाँ तक कि वह हिजरत एख्तियार करें और (हॉ) मगर दीनी अम्र में तुम से मदद के ख्वाहॉ हो तो तुम पर (उनकी मदद करना लाज़िम व वाजिब है मगर उन लोगों के मुक़ाबले में (नहीं) जिनमें और तुममें बाहम (सुलह का) एहदो पैमान है और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा (सबको) देख रहा है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آووا: उन्होंने (मुहाजिरों को) अपने घरों में जगह दी, उन्हें पनाह दी और उनकी मदद की।
  • نصروا: उन्होंने (मुहाजिरों की) सहायता की, उनका साथ दिया और दीन (धर्म) के मामले में उनकी मदद की।
  • ولاية: मदद, सहायता, संरक्षण और आपसी साझेदारी का अधिकार।
  • ميثاق: पक्का अहद (संधि/समझौता) जो दो पक्षों के बीच हो।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में मोमिनों के आपसी रिश्तों की बुनियाद रखता है और स्पष्ट करता है कि ईमान, हिजरत (प्रवास) और जिहाद ही वह रिश्ते हैं जो मुसलमानों को आपस में जोड़ते हैं। जिन लोगों ने अल्लाह और उसके रसूल ﷺ पर ईमान लाया, अपने वतन और अपने परिवार को छोड़कर अल्लाह की राह में हिजरत की, और अपनी जान और माल से अल्लाह की राह में जिहाद किया — और दूसरी तरफ वे लोग (अंसार) जिन्होंने इन मुहाजिरों को अपने घरों में जगह दी, उन्हें अपने माल में शरीक किया और दीन की मदद की — ये सब एक दूसरे के सच्चे दोस्त और मददगार हैं। उनका आपसी रिश्ता खून और रिश्तेदारी से ऊपर उठकर ईमान और भाईचारे पर क़ायम है।

लेकिन जो लोग ईमान तो लाए, मगर कुफ्र के इलाके में ही रह गए और हिजरत नहीं की, तो अल्लाह तआला फरमाता है: "तुम्हारा उनसे कोई वलायत (संरक्षण और मदद) का रिश्ता नहीं, जब तक वे हिजरत करके तुम्हारे पास न आ जाएँ।" यानी जब तक वे दारुल-हर्ब (कुफ्र के इलाके) को छोड़कर दारुल-इस्लाम में नहीं आ जाते, तुम पर उनकी मदद और उनकी हिफाज़त वाजिब नहीं है। हाँ, अगर वे दीन के मामले में (यानी धार्मिक उत्पीड़न के कारण) तुमसे मदद माँगें, तो उनकी मदद करना तुम्हारा फर्ज़ है — सिवाय उस क़ौम के जिनसे तुम्हारा मु'आहिदा (संधि) हो, क्योंकि अहद को निभाना भी ईमान का हिस्सा है। और अल्लाह तआला तुम्हारे सारे कामों को देख रहा है, कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है, और वह हर एक को उसकी नीयत और अमल के मुताबिक बदला देगा।


दावती पहलू:

यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि इस्लामी भाईचारा किसी जाति, रंग या वतन की बुनियाद पर नहीं, बल्कि ईमान और अल्लाह की राह में कुर्बानी पर खड़ा होता है। जो लोग अल्लाह की राह में अपना घर-बार छोड़ देते हैं और जान-माल से जिहाद करते हैं, और जो उन्हें पनाह देते हैं और उनकी मदद करते हैं — अल्लाह उन्हें आपस में भाई बना देता है। यह वह प्यारा रिश्ता है जो दुनिया के किसी और निज़ाम में नहीं मिलता। आज भी अगर मुसलमान इस भाईचारे को अपना लें, तो उनकी ताकत और इज़्ज़त में बेपनाह बढ़ोतरी हो सकती है। याद रखिए, अल्लाह हर अमल को देख रहा है — अच्छा हो या बुरा — और वह हर किसी को उसकी नीयत के मुताबिक पुरस्कृत करेगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 70-74 — अल-अनफाल

70يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ قُل لِّمَن فِي أَيْدِيكُم مِّنَ الْأَسْرَىٰ إِن يَعْلَمِ اللَّهُ فِي قُلُوبِكُمْ خَيْرًا يُؤْتِكُمْ خَيْرًا مِّمَّا أُخِذَ مِنكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ۗ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
ऐ रसूल जो कैदी तुम्हारे कब्जे में है उनसे कह दो कि अगर तुम्हारे दिलों में नेकी देखेगा तो जो (माल) तुम से छीन लिया गया है उससे कहीं बेहतर तुम्हें अता फरमाएगा और तुम्हें बख्श भी देगा और ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
71وَإِن يُرِيدُوا خِيَانَتَكَ فَقَدْ خَانُوا اللَّهَ مِن قَبْلُ فَأَمْكَنَ مِنْهُمْ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
और अगर ये लोग तुमसे फरेब करना चाहते है तो ख़ुदा से पहले ही फरेब कर चुके हैं तो (उसकी सज़ा में) ख़ुदा ने उन पर तुम्हें क़ाबू दे दिया और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफकार हिकमत वाला है
72إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَهَاجَرُوا وَجَاهَدُوا بِأَمْوَالِهِمْ وَأَنفُسِهِمْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَالَّذِينَ آوَوا وَّنَصَرُوا أُولَٰئِكَ بَعْضُهُمْ أَوْلِيَاءُ بَعْضٍ ۚ وَالَّذِينَ آمَنُوا وَلَمْ يُهَاجِرُوا مَا لَكُم مِّن وَلَايَتِهِم مِّن شَيْءٍ حَتَّىٰ يُهَاجِرُوا ۚ وَإِنِ اسْتَنصَرُوكُمْ فِي الدِّينِ فَعَلَيْكُمُ النَّصْرُ إِلَّا عَلَىٰ قَوْمٍ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهُم مِّيثَاقٌ ۗ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और हिजरत की और अपने अपने जान माल से ख़ुदा की राह में जिहाद किया और जिन लोगों ने (हिजरत करने वालों को जगह दी और हर (तरह) उनकी ख़बर गीरी (मदद) की यही लोग एक दूसरे के (बाहम) सरपरस्त दोस्त हैं और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और हिजरत नहीं की तो तुम लोगों को उनकी सरपरस्ती से कुछ सरोकार नहीं-यहाँ तक कि वह हिजरत एख्तियार करें और (हॉ) मगर दीनी अम्र में तुम से मदद के ख्वाहॉ हो तो तुम पर (उनकी मदद करना लाज़िम व वाजिब है मगर उन लोगों के मुक़ाबले में (नहीं) जिनमें और तुममें बाहम (सुलह का) एहदो पैमान है और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा (सबको) देख रहा है
73وَالَّذِينَ كَفَرُوا بَعْضُهُمْ أَوْلِيَاءُ بَعْضٍ ۚ إِلَّا تَفْعَلُوهُ تَكُن فِتْنَةٌ فِي الْأَرْضِ وَفَسَادٌ كَبِيرٌ
और जो लोग काफ़िर हैं वह भी (बाहम) एक दूसरे के सरपरस्त हैं अगर तुम (इस तरह) वायदा न करोगे तो रूए ज़मीन पर फ़ितना (फ़साद) बरपा हो जाएगा और बड़ा फ़साद होगा
74وَالَّذِينَ آمَنُوا وَهَاجَرُوا وَجَاهَدُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَالَّذِينَ آوَوا وَّنَصَرُوا أُولَٰئِكَ هُمُ الْمُؤْمِنُونَ حَقًّا ۚ لَّهُم مَّغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَرِيمٌ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और हिजरत की और ख़ुदा की राह में लड़े भिड़े और जिन लोगों ने (ऐसे नाज़ुक वक्त में मुहाजिरीन को जगह ही और उनकी हर तरह ख़बरगीरी (मदद) की यही लोग सच्चे ईमानदार हैं उन्हीं के वास्ते मग़फिरत और इज्ज़त व आबरु वाली रोज़ी है
अल-अनफालकुरान सूची
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अनुवाद — अल-अनफाल 72

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Tuesday, August 18, 2026

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