Wa iny-yureedoo khiyaa nataka faqad khaanullaaha min qablu fa amkana minhum; wallaahu `aleemum Hakeem
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और अगर ये लोग तुमसे फरेब करना चाहते है तो ख़ुदा से पहले ही फरेब कर चुके हैं तो (उसकी सज़ा में) ख़ुदा ने उन पर तुम्हें क़ाबू दे दिया और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफकार हिकमत वाला है
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اور اگر یہ لوگ تم سے دغا کرنا چاہیں گے تو یہ پہلے ہی خدا سے دغا کرچکے ہیں تو اس نے ان کو (تمہارے) قبضے میں کر دیا۔ اور خدا دانا حکمت والا ہے
और अगर ये लोग तुमसे फरेब करना चाहते है तो ख़ुदा से पहले ही फरेब कर चुके हैं तो (उसकी सज़ा में) ख़ुदा ने उन पर तुम्हें क़ाबू दे दिया और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफकार हिकमत वाला है
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
خِيَانَتَكَ: आपके साथ विश्वासघात करना, वचन तोड़ना।
خَانُوا اللهَ: अल्लाह के साथ विश्वासघात किया, अर्थात उसकी अवज्ञा की और उसके आदेशों को ठुकराया।
فَأَمْكَنَ مِنْهُمْ: तो उसने उन्हें आपके अधीन कर दिया, अर्थात उनपर आपको विजय प्रदान की।
तफसीर:
हे नबी! यदि वे क़ैदी, जिन्हें आपने रिहा किया है, आपके साथ फिर विश्वासघात करने का इरादा रखते हैं—चाहे वे मौखिक रूप से कुछ भी प्रकट करें—तो आपको कोई चिंता या दुख नहीं होना चाहिए। क्योंकि उन्होंने इससे पहले भी अल्लाह के साथ विश्वासघात किया था, जब उन्होंने उसकी नाफ़रमानी की, उसके दीन का विरोध किया और आपसे युद्ध किया। अल्लाह ने उनकी इस विश्वासघाती हरकत के बावजूद आपको उनपर विजय प्रदान की—बद्र के मैदान में उनमें से कुछ मारे गए और कुछ बंदी बनाए गए। यदि वे अब भी विश्वासघात पर अड़े रहेंगे, तो अल्लाह उन्हें फिर आपके हवाले कर देगा, जैसा उसने पहले किया। अल्लाह अपने बंदों के दिलों के भेदों को भली-भाँति जानता है, और वह अपनी सारी व्यवस्था में अत्यंत दूरदर्शी और तत्वदर्शी है। वह जानता है कि कब, किसके साथ, कैसा व्यवहार करना उचित है।
फ़ायदे:
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह अपने नबी और उसके अनुयायियों की सहायता करता है, चाहे दुश्मन कितने भी चालाक और विश्वासघाती क्यों न हों। अल्लाह की मदद उनके मक्र (चाल) से बड़ी होती है।
यह आयत मुसलमानों को धैर्य और भरोसे की शिक्षा देती है कि जब उनके साथ कोई विश्वासघात हो, तो वे अल्लाह पर भरोसा रखें, क्योंकि अल्लाह हर चीज़ का हिसाब रखने वाला और सबसे अच्छा निर्णायक है।
अल्लाह की विजय उसके बंदों के लिए तब आती है जब वे उसके आदेशों का पालन करते हैं और उसके रास्ते में सब्र करते हैं। विश्वासघात करने वालों का अंजाम हमेशा बुरा होता है, जैसा कि इतिहास में बद्र के युद्ध में देखा गया।
यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह का ज्ञान असीम है—वह हर दिल के राज़ जानता है, इसलिए हमें उसी पर भरोसा करना चाहिए और उसी से मदद माँगनी चाहिए, न कि अपनी ताक़त या चालाकी पर।
उसकी सज़ा में तुम पर बड़ा अज़ाब नाज़िल होकर रहता तो (ख़ैर जो हुआ सो हुआ) अब तुमने जो माल ग़नीमत हासिल किया है उसे खाओ (और तुम्हारे लिए) हलाल तय्यब है और ख़ुदा से डरते रहो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
ऐ रसूल जो कैदी तुम्हारे कब्जे में है उनसे कह दो कि अगर तुम्हारे दिलों में नेकी देखेगा तो जो (माल) तुम से छीन लिया गया है उससे कहीं बेहतर तुम्हें अता फरमाएगा और तुम्हें बख्श भी देगा और ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
और अगर ये लोग तुमसे फरेब करना चाहते है तो ख़ुदा से पहले ही फरेब कर चुके हैं तो (उसकी सज़ा में) ख़ुदा ने उन पर तुम्हें क़ाबू दे दिया और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफकार हिकमत वाला है
जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और हिजरत की और अपने अपने जान माल से ख़ुदा की राह में जिहाद किया और जिन लोगों ने (हिजरत करने वालों को जगह दी और हर (तरह) उनकी ख़बर गीरी (मदद) की यही लोग एक दूसरे के (बाहम) सरपरस्त दोस्त हैं और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और हिजरत नहीं की तो तुम लोगों को उनकी सरपरस्ती से कुछ सरोकार नहीं-यहाँ तक कि वह हिजरत एख्तियार करें और (हॉ) मगर दीनी अम्र में तुम से मदद के ख्वाहॉ हो तो तुम पर (उनकी मदद करना लाज़िम व वाजिब है मगर उन लोगों के मुक़ाबले में (नहीं) जिनमें और तुममें बाहम (सुलह का) एहदो पैमान है और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा (सबको) देख रहा है
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