अल-अनफाल · 71/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनफाल
وَإِن يُرِيدُوا خِيَانَتَكَ فَقَدْ خَانُوا اللَّهَ مِن قَبْلُ فَأَمْكَنَ مِنْهُمْ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ ۝٧١
Wa iny-yureedoo khiyaa nataka faqad khaanullaaha min qablu fa amkana minhum; wallaahu `aleemum Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
और अगर ये लोग तुमसे फरेब करना चाहते है तो ख़ुदा से पहले ही फरेब कर चुके हैं तो (उसकी सज़ा में) ख़ुदा ने उन पर तुम्हें क़ाबू दे दिया और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफकार हिकमत वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • خِيَانَتَكَ: आपके साथ विश्वासघात करना, वचन तोड़ना।
  • خَانُوا اللهَ: अल्लाह के साथ विश्वासघात किया, अर्थात उसकी अवज्ञा की और उसके आदेशों को ठुकराया।
  • فَأَمْكَنَ مِنْهُمْ: तो उसने उन्हें आपके अधीन कर दिया, अर्थात उनपर आपको विजय प्रदान की।

तफसीर:

हे नबी! यदि वे क़ैदी, जिन्हें आपने रिहा किया है, आपके साथ फिर विश्वासघात करने का इरादा रखते हैं—चाहे वे मौखिक रूप से कुछ भी प्रकट करें—तो आपको कोई चिंता या दुख नहीं होना चाहिए। क्योंकि उन्होंने इससे पहले भी अल्लाह के साथ विश्वासघात किया था, जब उन्होंने उसकी नाफ़रमानी की, उसके दीन का विरोध किया और आपसे युद्ध किया। अल्लाह ने उनकी इस विश्वासघाती हरकत के बावजूद आपको उनपर विजय प्रदान की—बद्र के मैदान में उनमें से कुछ मारे गए और कुछ बंदी बनाए गए। यदि वे अब भी विश्वासघात पर अड़े रहेंगे, तो अल्लाह उन्हें फिर आपके हवाले कर देगा, जैसा उसने पहले किया। अल्लाह अपने बंदों के दिलों के भेदों को भली-भाँति जानता है, और वह अपनी सारी व्यवस्था में अत्यंत दूरदर्शी और तत्वदर्शी है। वह जानता है कि कब, किसके साथ, कैसा व्यवहार करना उचित है।

फ़ायदे:

  • इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह अपने नबी और उसके अनुयायियों की सहायता करता है, चाहे दुश्मन कितने भी चालाक और विश्वासघाती क्यों न हों। अल्लाह की मदद उनके मक्र (चाल) से बड़ी होती है।
  • यह आयत मुसलमानों को धैर्य और भरोसे की शिक्षा देती है कि जब उनके साथ कोई विश्वासघात हो, तो वे अल्लाह पर भरोसा रखें, क्योंकि अल्लाह हर चीज़ का हिसाब रखने वाला और सबसे अच्छा निर्णायक है।
  • अल्लाह की विजय उसके बंदों के लिए तब आती है जब वे उसके आदेशों का पालन करते हैं और उसके रास्ते में सब्र करते हैं। विश्वासघात करने वालों का अंजाम हमेशा बुरा होता है, जैसा कि इतिहास में बद्र के युद्ध में देखा गया।
  • यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह का ज्ञान असीम है—वह हर दिल के राज़ जानता है, इसलिए हमें उसी पर भरोसा करना चाहिए और उसी से मदद माँगनी चाहिए, न कि अपनी ताक़त या चालाकी पर।


📜 आयत 69-73 — सूरा अल-अनफाल

69فَكُلُوا مِمَّا غَنِمْتُمْ حَلَالًا طَيِّبًا ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
उसकी सज़ा में तुम पर बड़ा अज़ाब नाज़िल होकर रहता तो (ख़ैर जो हुआ सो हुआ) अब तुमने जो माल ग़नीमत हासिल किया है उसे खाओ (और तुम्हारे लिए) हलाल तय्यब है और ख़ुदा से डरते रहो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
70يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ قُل لِّمَن فِي أَيْدِيكُم مِّنَ الْأَسْرَىٰ إِن يَعْلَمِ اللَّهُ فِي قُلُوبِكُمْ خَيْرًا يُؤْتِكُمْ خَيْرًا مِّمَّا أُخِذَ مِنكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ۗ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
ऐ रसूल जो कैदी तुम्हारे कब्जे में है उनसे कह दो कि अगर तुम्हारे दिलों में नेकी देखेगा तो जो (माल) तुम से छीन लिया गया है उससे कहीं बेहतर तुम्हें अता फरमाएगा और तुम्हें बख्श भी देगा और ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
71وَإِن يُرِيدُوا خِيَانَتَكَ فَقَدْ خَانُوا اللَّهَ مِن قَبْلُ فَأَمْكَنَ مِنْهُمْ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
और अगर ये लोग तुमसे फरेब करना चाहते है तो ख़ुदा से पहले ही फरेब कर चुके हैं तो (उसकी सज़ा में) ख़ुदा ने उन पर तुम्हें क़ाबू दे दिया और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफकार हिकमत वाला है
72إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَهَاجَرُوا وَجَاهَدُوا بِأَمْوَالِهِمْ وَأَنفُسِهِمْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَالَّذِينَ آوَوا وَّنَصَرُوا أُولَٰئِكَ بَعْضُهُمْ أَوْلِيَاءُ بَعْضٍ ۚ وَالَّذِينَ آمَنُوا وَلَمْ يُهَاجِرُوا مَا لَكُم مِّن وَلَايَتِهِم مِّن شَيْءٍ حَتَّىٰ يُهَاجِرُوا ۚ وَإِنِ اسْتَنصَرُوكُمْ فِي الدِّينِ فَعَلَيْكُمُ النَّصْرُ إِلَّا عَلَىٰ قَوْمٍ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهُم مِّيثَاقٌ ۗ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और हिजरत की और अपने अपने जान माल से ख़ुदा की राह में जिहाद किया और जिन लोगों ने (हिजरत करने वालों को जगह दी और हर (तरह) उनकी ख़बर गीरी (मदद) की यही लोग एक दूसरे के (बाहम) सरपरस्त दोस्त हैं और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और हिजरत नहीं की तो तुम लोगों को उनकी सरपरस्ती से कुछ सरोकार नहीं-यहाँ तक कि वह हिजरत एख्तियार करें और (हॉ) मगर दीनी अम्र में तुम से मदद के ख्वाहॉ हो तो तुम पर (उनकी मदद करना लाज़िम व वाजिब है मगर उन लोगों के मुक़ाबले में (नहीं) जिनमें और तुममें बाहम (सुलह का) एहदो पैमान है और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा (सबको) देख रहा है
73وَالَّذِينَ كَفَرُوا بَعْضُهُمْ أَوْلِيَاءُ بَعْضٍ ۚ إِلَّا تَفْعَلُوهُ تَكُن فِتْنَةٌ فِي الْأَرْضِ وَفَسَادٌ كَبِيرٌ
और जो लोग काफ़िर हैं वह भी (बाहम) एक दूसरे के सरपरस्त हैं अगर तुम (इस तरह) वायदा न करोगे तो रूए ज़मीन पर फ़ितना (फ़साद) बरपा हो जाएगा और बड़ा फ़साद होगा
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीअवतरण स्थान
71आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 71

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Wednesday, September 30, 2026

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