अत-तकवीर · 26/29
अनुवाद उच्चारण — सूरा अत-तकवीर
فَأَيْنَ تَذْهَبُونَ ۝٢٦
Fa ayna tazhaboon
📖 हिंदी अर्थ
फिर तुम कहाँ जाते हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَأَيْنَ تَذْهَبُونَ: तो कहाँ जा रहे हो? अर्थात् किस राह पर चल रहे हो?

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला अपने बन्दों से एक ऐसा प्रश्न पूछ रहा है जो उनकी अक़्ल को झकझोर देने वाला है। जब पहले की आयात में क़ुरआन की सच्चाई, उसकी अज़मत और उसके अल्लाह की ओर से होने के प्रमाण पेश किए जा चुके हैं, तो अब फ़रमाया जा रहा है: "तो फिर तुम कहाँ जा रहे हो?" यानी इतने स्पष्ट प्रमाणों और ठोस दलीलों के बाद भी तुम किस रास्ते पर भटक रहे हो? तुम्हारी अक़्लें कहाँ ले जा रही हैं? क्या तुम्हें कोई और रास्ता मिल गया है जो इस सीधे रास्ते से बेहतर हो?

यह प्रश्न उन लोगों के लिए है जो क़ुरआन को झुठलाते हैं और उससे मुँह मोड़ते हैं। अल्लाह तआला फ़रमा रहा है कि जब सत्य इतना उजागर हो चुका है, तो तुम किस ओर भाग रहे हो? कौन-सा मार्ग तुम्हें इस किताब से दूर ले जा रहा है? क्या कोई और मार्ग ऐसा है जो तुम्हें सच्चाई तक पहुँचा सके? हरगिज़ नहीं!

यह आयत हम सबके लिए एक बड़ी नसीहत है। क़ुरआन अल्लाह की ओर से आया हुआ मार्गदर्शन है, जो हर युग और हर ज़माने के लिए रौशनी है। जो व्यक्ति इससे दूर जाता है, वह दरअसल अपने ही नुक़सान की तरफ भागता है। अल्लाह तआला ने यह किताब इंसानों की हिदायत के लिए उतारी है, ताकि वे अंधेरों से निकलकर रौशनी की ओर आएँ। यह एक ऐसा खज़ाना है जिसे पाकर इंसान कभी गुमराह नहीं हो सकता।

प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि हम क़ुरआन को अपनी ज़िन्दगी का नक्शा बनाएँ, उसकी तालीमात पर अमल करें और उससे जुड़े रहें। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह तआला हम सबको क़ुरआन को समझने, उस पर अमल करने और उसके सच्चे बन्दे बनने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 24-28 — सूरा अत-तकवीर

24وَمَا هُوَ عَلَى الْغَيْبِ بِضَنِينٍ
और वह ग़ैब की बातों के ज़ाहिर करने में बख़ील नहीं
25وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَيْطَانٍ رَّجِيمٍ
और न यह मरदूद शैतान का क़ौल है
26فَأَيْنَ تَذْهَبُونَ
फिर तुम कहाँ जाते हो
27إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌ لِّلْعَالَمِينَ
ये सारे जहॉन के लोगों के लिए बस नसीहत है
28لِمَن شَاءَ مِنكُمْ أَن يَسْتَقِيمَ
(मगर) उसी के लिए जो तुममें सीधी राह चले
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26आयत

अनुवाद — अत-तकवीर 26

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Saturday, October 3, 2026

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