अत-तकवीर · 25/29
अनुवाद उच्चारण — सूरा अत-तकवीर
وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَيْطَانٍ رَّجِيمٍ ۝٢٥
Wa maa huwa biqawli shaitaanir rajeem
📖 हिंदी अर्थ
और न यह मरदूद शैतान का क़ौल है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • شَيْطَانٍ رَّجِيمٍ: शैतान जो रहमत से दूर किया गया हो और जिस पर पत्थर बरसाए गए हों (उल्कापिंडों से मारा गया हो)।

तफसीर:

यह आयत उन आरोपों का खंडन करती है जो काफिरों और मुशरिकों ने लगाए थे। वे कहते थे कि यह क़ुरआन किसी शैतान का कलाम है, जो उसे मुहम्मद ﷺ के दिल में डालता है। अल्लाह तआला इसका स्पष्ट खंडन करते हुए फ़रमाते हैं कि यह क़ुरआन किसी शैतान का क़ौल नहीं है, जो रहमत से दूर कर दिया गया हो और जिस पर सितारों (उल्कापिंडों) की मार होती है।

यह क़ुरआन तो अल्लाह का कलाम है, जो जिब्रील अमीन (अमानतदार फ़रिश्ते) के ज़रिए नाज़िल हुआ है। शैतान की आदत तो यह है कि वह लोगों को गुमराह करता है, झूठ बोलता है और अल्लाह की रहमत से मरदूद है। क्या ऐसा मरदूद शैतान अल्लाह का कलाम ला सकता है? हरगिज़ नहीं!

यह आयत हमें सिखाती है कि क़ुरआन की हिफ़ाज़त अल्लाह ने ख़ुद की है। शैतान उसके क़रीब भी नहीं भटक सकता। जब हम क़ुरआन पढ़ते हैं तो हम अल्लाह के कलाम से जुड़ते हैं, जो हर झूठ, हर बुराई और हर गुमराही से पाक है। यह किताब हमारे लिए हिदायत और रहमत है।

अल्लाह तआला ने इस आयत में हमें बताया कि क़ुरआन की सच्चाई पर कोई शक नहीं है। यह वही कलाम है जो इंसानों को अंधेरों से निकालकर रोशनी की तरफ लाता है। जो लोग इस पर ईमान लाते हैं, वे सच्ची कामयाबी पाते हैं और जो इसे झुठलाते हैं, वे घाटे में रहते हैं।

आओ हम इस कलाम को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें। यही हमारी दुनिया और आख़िरत की भलाई है। क़ुरआन वह रस्सी है जो अल्लाह से जोड़ती है, और जो इसे थाम लेता है, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता।



📜 आयत 23-27 — सूरा अत-तकवीर

23وَلَقَدْ رَآهُ بِالْأُفُقِ الْمُبِينِ
और बेशक उन्होनें जिबरील को (आसमान के) खुले (शरक़ी) किनारे पर देखा है
24وَمَا هُوَ عَلَى الْغَيْبِ بِضَنِينٍ
और वह ग़ैब की बातों के ज़ाहिर करने में बख़ील नहीं
25وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَيْطَانٍ رَّجِيمٍ
और न यह मरदूद शैतान का क़ौल है
26فَأَيْنَ تَذْهَبُونَ
फिर तुम कहाँ जाते हो
27إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌ لِّلْعَالَمِينَ
ये सारे जहॉन के लोगों के लिए बस नसीहत है
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अनुवाद — अत-तकवीर 25

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Saturday, October 3, 2026

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