अल-फज्र · 29/30
अनुवाद उच्चारण — अल-फज्र
فَادْخُلِي فِي عِبَادِي ۝٢٩
Fadkhulee fee `ibaadee
📖 हिंदी अर्थ
तो मेरे (ख़ास) बन्दों में शामिल हो जा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَادْخُلِي: प्रवेश करो, शामिल हो जाओ।
  • فِي عِبَادِي: मेरे (अल्लाह के) बंदों में।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपनी नेक बंदी को, जो उसके ज़िक्र और ईमान पर दृढ़ रही, उसके द्वारा दिए गए इनामों और आराम पर यक़ीन रखती रही, उसे संबोधित करते हुए कहता है: "मेरे (अल्लाह के) नेक बंदों के समूह में शामिल हो जाओ।" यानी उन सच्चे और पवित्र बंदों की श्रेणी में दाखिल हो जाओ, जिन्होंने अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की इबादत की, उसकी राह में मेहनत की और उसकी रज़ा को अपना लक्ष्य बनाया। यह एक ऐसा सम्मान है जो सिर्फ उन्हीं को मिलता है जो अल्लाह की खास नज़रों में पसंदीदा होते हैं।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की राह पर चलने वालों का अंजाम कितना प्यारा और बुलंद है। जब एक इंसान अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की याद, उसकी इबादत और उसके हुक्मों पर अमल करता है, तो अल्लाह उसे अपने खास बंदों में शामिल कर लेता है। यह वह मुकाम है जहाँ इंसान को दुनिया की हर चिंता से आज़ादी मिलती है और उसे अल्लाह की जन्नत में दाखिल होने की खुशखबरी दी जाती है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाना चाहिए। अगर हम दुनिया में अल्लाह के बताए रास्ते पर चलें, उसकी इबादत करें और उसके दीन को अपनाएँ, तो अल्लाह हमें भी अपने नेक बंदों में शामिल करेगा और हमें उस जन्नत में दाखिल करेगा जो हमेशा रहने वाली है। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी झूठा नहीं होता। आइए, हम सब अपने दिलों को अल्लाह की याद से रौशन करें और उसकी राह पर चलने की कोशिश करें, ताकि हम भी इस प्यारे मुकाम को हासिल कर सकें।



📜 आयत 27-30 — अल-फज्र

27يَا أَيَّتُهَا النَّفْسُ الْمُطْمَئِنَّةُ
(और कुछ लोगों से कहेगा) ऐ इत्मेनान पाने वाली जान
28ارْجِعِي إِلَىٰ رَبِّكِ رَاضِيَةً مَّرْضِيَّةً
अपने परवरदिगार की तरफ़ चल तू उससे ख़ुश वह तुझ से राज़ी
29فَادْخُلِي فِي عِبَادِي
तो मेरे (ख़ास) बन्दों में शामिल हो जा
30وَادْخُلِي جَنَّتِي
और मेरे बेहिश्त में दाख़िल हो जा
अल-फज्रकुरान सूची
30आयत
मक्कीRevelation
29आयत

अनुवाद — अल-फज्र 29

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Tuesday, August 18, 2026

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