अत-तौबा · 34/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
۞ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِنَّ كَثِيرًا مِّنَ الْأَحْبَارِ وَالرُّهْبَانِ لَيَأْكُلُونَ أَمْوَالَ النَّاسِ بِالْبَاطِلِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ ۗ وَالَّذِينَ يَكْنِزُونَ الذَّهَبَ وَالْفِضَّةَ وَلَا يُنفِقُونَهَا فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَبَشِّرْهُم بِعَذَابٍ أَلِيمٍ ۝٣٤
Yaaa aiyuhal lazeena aamanooo inna kaseeramminal ahbaari warruhbaani la yaakuloona amwaalan naasi bil baatili wa yasuddoona `an sabeelil laah; wallazeena yaknizoonaz zahaba wal fiddata wa laayunfiqoonahaa fee sabeelil laahi fabashshirhum bi`azaabin aleem
📖 हिंदी अर्थ
ऐ ईमानदारों इसमें उसमें शक़ नहीं कि (यहूद व नसारा के) बहुतेरे आलिम ज़ाहिद लोगों के माल (नाहक़) चख जाते है और (लोगों को) ख़ुदा की राह से रोकते हैं और जो लोग सोना और चाँदी जमा करते जाते हैं और उसको ख़ुदा की राह में खर्च नहीं करते तो (ऐ रसूल) उन को दर्दनाक अज़ाब की ख़ुशखबरी सुना दो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الأَحْبَارِ: यहूदी विद्वान।
  • الرُّهْبَانِ: ईसाई उपासक (जो सांसारिकता छोड़कर इबादत में लगे रहते हैं)।
  • يَأْكُلُونَ أَمْوَالَ النَّاسِ بِالْبَاطِلِ: लोगों का धन अनुचित तरीके से खाना, जैसे रिश्वत और धोखाधड़ी।
  • يَكْنِزُونَ: धन-संपत्ति इकट्ठा करना और उसका हक़ (ज़कात) अदा न करना।
  • فَبَشِّرْهُم بِعَذَابٍ أَلِيمٍ: उन्हें दर्दनाक अज़ाब की खुशखबरी दो (व्यंग्य के रूप में)।

तफसीर:

ऐ ईमान लाने वालों! अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यहूदी विद्वानों और ईसाई उपासकों में से बहुत से लोग ऐसे हैं जो लोगों का धन नाजायज़ तरीकों से खाते हैं। वे रिश्वत लेते हैं, फैसलों में धन का गलत इस्तेमाल करते हैं और लोगों की कमाई को हड़प करते हैं। साथ ही, वे लोगों को अल्लाह के दीन (इस्लाम) से रोकते हैं और उसे अपनाने से बाज़ रखते हैं। यह उनका बड़ा अपराध है कि वे खुद गुमराह हैं और दूसरों को भी सीधे रास्ते से भटकाते हैं।

फिर अल्लाह तआला उन लोगों के बारे में बताता है जो सोना और चाँदी इकट्ठा करते हैं, उसे जमा करके रखते हैं और अल्लाह के रास्ते में खर्च नहीं करते, न उसकी ज़कात अदा करते हैं और न ही दूसरे फ़रज़ (अनिवार्य) हक़ अदा करते हैं। ऐ नबी! ऐसे लोगों को दर्दनाक अज़ाब की खुशखबरी सुना दो। यह खुशखबरी उनके लिए बुरी खबर है, क्योंकि उनका इकट्ठा किया हुआ धन उन्हें अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकेगा।

फ़ायदे:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि धन कमाना और उसे इकट्ठा करना अपने आप में गुनाह नहीं है, बल्कि गुनाह यह है कि धन के अल्लाह द्वारा निर्धारित हक़ (ज़कात और दूसरे फ़रज़) अदा न किए जाएँ। इसलिए हमें अपनी कमाई से अल्लाह का हक़ निकालना चाहिए ताकि हमारा धन हमारे लिए बरकत वाला बने।
  2. इस आयत से यह भी सीख मिलती है कि इल्म और दीन की पोशाक पहनने वालों का फ़र्ज़ है कि वे लोगों को सही रास्ता दिखाएँ, न कि उन्हें धर्म से दूर करें। जो लोग अपने ज्ञान का दुरुपयोग करके लोगों को गुमराह करते हैं, उनके लिए सख्त अज़ाब है।
  3. यह आयत हमें यह भी बताती है कि इस्लाम में धन का सही उपयोग समाज की भलाई, गरीबों की मदद और अल्लाह के रास्ते में खर्च करना है। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की रहमत के करीब लाता है और हमारे धन को पाक और बरकत वाला बनाता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 32-36 — अत-तौबा

32يُرِيدُونَ أَن يُطْفِئُوا نُورَ اللَّهِ بِأَفْوَاهِهِمْ وَيَأْبَى اللَّهُ إِلَّا أَن يُتِمَّ نُورَهُ وَلَوْ كَرِهَ الْكَافِرُونَ
जिस चीज़ को ये लोग उसका शरीक़ बनाते हैं वह उससे पाक व पाक़ीजा है ये लोग चाहते हैं कि अपने मुँह से (फ़ूंक मारकर) ख़ुदा के नूर को बुझा दें और ख़ुदा इसके सिवा कुछ मानता ही नहीं कि अपने नूर को पूरा ही करके रहे
33هُوَ الَّذِي أَرْسَلَ رَسُولَهُ بِالْهُدَىٰ وَدِينِ الْحَقِّ لِيُظْهِرَهُ عَلَى الدِّينِ كُلِّهِ وَلَوْ كَرِهَ الْمُشْرِكُونَ
अगरचे कुफ्फ़ार बुरा माना करें वही तो (वह ख़ुदा) है कि जिसने अपने रसूल (मोहम्मद) को हिदायत और सच्चे दीन के साथ ( मबऊस करके) भेजता कि उसको तमाम दीनो पर ग़ालिब करे अगरचे मुशरेकीन बुरा माना करे
34۞ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِنَّ كَثِيرًا مِّنَ الْأَحْبَارِ وَالرُّهْبَانِ لَيَأْكُلُونَ أَمْوَالَ النَّاسِ بِالْبَاطِلِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ ۗ وَالَّذِينَ يَكْنِزُونَ الذَّهَبَ وَالْفِضَّةَ وَلَا يُنفِقُونَهَا فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَبَشِّرْهُم بِعَذَابٍ أَلِيمٍ
ऐ ईमानदारों इसमें उसमें शक़ नहीं कि (यहूद व नसारा के) बहुतेरे आलिम ज़ाहिद लोगों के माल (नाहक़) चख जाते है और (लोगों को) ख़ुदा की राह से रोकते हैं और जो लोग सोना और चाँदी जमा करते जाते हैं और उसको ख़ुदा की राह में खर्च नहीं करते तो (ऐ रसूल) उन को दर्दनाक अज़ाब की ख़ुशखबरी सुना दो
35يَوْمَ يُحْمَىٰ عَلَيْهَا فِي نَارِ جَهَنَّمَ فَتُكْوَىٰ بِهَا جِبَاهُهُمْ وَجُنُوبُهُمْ وَظُهُورُهُمْ ۖ هَٰذَا مَا كَنَزْتُمْ لِأَنفُسِكُمْ فَذُوقُوا مَا كُنتُمْ تَكْنِزُونَ
(जिस दिन वह (सोना चाँदी) जहन्नुम की आग में गर्म (और लाल) किया जाएगा फिर उससे उनकी पेशानियाँ और उनके पहलू और उनकी पीठें दाग़ी जाऎंगी (और उनसे कहा जाएगा) ये वह है जिसे तुमने अपने लिए (दुनिया में) जमा करके रखा था तो (अब) अपने जमा किए का मज़ा चखो
36إِنَّ عِدَّةَ الشُّهُورِ عِندَ اللَّهِ اثْنَا عَشَرَ شَهْرًا فِي كِتَابِ اللَّهِ يَوْمَ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ مِنْهَا أَرْبَعَةٌ حُرُمٌ ۚ ذَٰلِكَ الدِّينُ الْقَيِّمُ ۚ فَلَا تَظْلِمُوا فِيهِنَّ أَنفُسَكُمْ ۚ وَقَاتِلُوا الْمُشْرِكِينَ كَافَّةً كَمَا يُقَاتِلُونَكُمْ كَافَّةً ۚ وَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ مَعَ الْمُتَّقِينَ
इसमें तो शक़ ही नहीं कि ख़ुदा ने जिस दिन आसमान व ज़मीन को पैदा किया (उसी दिन से) ख़ुदा के नज़दीक ख़ुदा की किताब (लौहे महफूज़) में महीनों की गिनती बारह महीने है उनमें से चार महीने (अदब व) हुरमत के हैं यही दीन सीधी राह है तो उन चार महीनों में तुम अपने ऊपर (कुश्त व ख़ून (मार काट) करके) ज़ुल्म न करो और मुशरेकीन जिस तरह तुम से सबके बस मिलकर लड़ते हैं तुम भी उसी तरह सबके सब मिलकर उन से लड़ों और ये जान लो कि ख़ुदा तो यक़ीनन परहेज़गारों के साथ है
अत-तौबाकुरान सूची
129आयत
मदनीRevelation
34आयत

अनुवाद — अत-तौबा 34

सूरा अत-तौबा आयत 34 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों इसमें उसमें शक़ नहीं कि (यहूद व नसारा…

सूरा आयत 34/129 — अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अत-तौबा सुनें, अत-तौबा अनुवाद, अत-तौबा mp3, अत-तौबा pdf. आयत 32–36. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए