अत-तौबा · 33/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
هُوَ الَّذِي أَرْسَلَ رَسُولَهُ بِالْهُدَىٰ وَدِينِ الْحَقِّ لِيُظْهِرَهُ عَلَى الدِّينِ كُلِّهِ وَلَوْ كَرِهَ الْمُشْرِكُونَ ۝٣٣
huwal lazeee ar sala Rasoolahoo bilhudaa wa deenil haqqi liyuzhirahoo `alad deeni kullihee wa law karihal mushrikoon
📖 हिंदी अर्थ
अगरचे कुफ्फ़ार बुरा माना करें वही तो (वह ख़ुदा) है कि जिसने अपने रसूल (मोहम्मद) को हिदायत और सच्चे दीन के साथ ( मबऊस करके) भेजता कि उसको तमाम दीनो पर ग़ालिब करे अगरचे मुशरेकीन बुरा माना करे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْهُدَىٰ (अल-हुदा): मार्गदर्शन, सत्य का रास्ता दिखाने वाला। यहाँ इसका अर्थ कुरआन और उसमें निहित एकेश्वरवाद (तौहीद) की शिक्षाएँ हैं।
  • دِينِ الْحَقِّ (दीनिल हक़): सत्य धर्म, अर्थात इस्लाम।
  • لِيُظْهِرَهُ (लियुज़्हिरहु): उसे प्रभावी और विजयी बनाने के लिए, उसे ऊपर उठाने के लिए।
  • الدِّينِ كُلِّهِ (अद-दीन कुल्लिही): सभी धर्मों पर।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ही वह है जिसने अपने रसूल मुहम्मद ﷺ को सत्य मार्गदर्शन (कुरआन) और सत्य धर्म (इस्लाम) के साथ भेजा। इसका उद्देश्य यह है कि इस धर्म को सभी धर्मों पर प्रभुत्व और विजय प्राप्त हो। अल्लाह ने यह वादा किया है कि वह इस धर्म को पूरे विश्व में फैलाएगा और उसे हर युग में सर्वोच्च बनाए रखेगा। यह विजय तर्कों, प्रमाणों और न्यायपूर्ण शिक्षाओं के माध्यम से होगी, जो सत्य को स्पष्ट कर देगी। चाहे मुशरिक (बहुदेववादी) इसे कितना भी नापसंद करें और इसके विरोध में अपनी पूरी ताकत लगा दें, अल्लाह की योजना अवश्य पूरी होगी। इस्लाम का प्रकाश कभी बुझने वाला नहीं, क्योंकि यह अल्लाह का वादा है और अल्लाह का वादा सत्य है।


फ़ायदे (लाभ और शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह पर भरोसा: यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि सत्य की विजय अल्लाह के हाथ में है। चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, अल्लाह का वादा अवश्य पूरा होगा। इससे मोमिन के दिल में अल्लाह पर अटूट विश्वास पैदा होता है।
  2. इस्लाम की सर्वोच्चता: यह आयत बताती है कि इस्लाम एक ऐसा धर्म है जो सत्य, न्याय और मानव कल्याण पर आधारित है। इसकी शिक्षाएँ हर युग और हर स्थान के लिए उपयुक्त हैं, इसलिए यह सभी धर्मों पर प्रभावी रहेगा।
  3. कठिनाइयों में धैर्य: जब मुसलमानों को विरोध और कठिनाइयों का सामना करना पड़े, तो यह आयत उन्हें धैर्य और साहस प्रदान करती है। वे जानते हैं कि अल्लाह का समर्थन उनके साथ है।
  4. सत्य का प्रचार: यह आयत मुसलमानों को प्रेरित करती है कि वे सत्य और न्याय के प्रचार में कोई कसर न छोड़ें, भले ही लोग नापसंद करें। सत्य को बोलना और फैलाना ही मोमिन का कर्तव्य है।
  5. आशा और उत्साह: यह आयत मुसलमानों को यह आशा देती है कि अंततः सत्य की ही जीत होगी। यह उन्हें निराशा से बचाती है और उनके जज़्बे को बुलंद करती है।
🎧 सुनें

📜 आयत 31-35 — अत-तौबा

31اتَّخَذُوا أَحْبَارَهُمْ وَرُهْبَانَهُمْ أَرْبَابًا مِّن دُونِ اللَّهِ وَالْمَسِيحَ ابْنَ مَرْيَمَ وَمَا أُمِرُوا إِلَّا لِيَعْبُدُوا إِلَٰهًا وَاحِدًا ۖ لَّا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۚ سُبْحَانَهُ عَمَّا يُشْرِكُونَ
उन लोगों ने तो अपने ख़ुदा को छोड़कर अपनी आलिमों को और अपने ज़ाहिदों को और मरियम के बेटे मसीह को अपना परवरदिगार बना डाला हालॉकि उन्होनें सिवाए इसके और हुक्म ही नहीं दिया गया कि ख़ुदाए यक़ता (सिर्फ़ ख़ुदा) की इबादत करें उसके सिवा (और कोई क़ाबिले परसतिश नहीं)
32يُرِيدُونَ أَن يُطْفِئُوا نُورَ اللَّهِ بِأَفْوَاهِهِمْ وَيَأْبَى اللَّهُ إِلَّا أَن يُتِمَّ نُورَهُ وَلَوْ كَرِهَ الْكَافِرُونَ
जिस चीज़ को ये लोग उसका शरीक़ बनाते हैं वह उससे पाक व पाक़ीजा है ये लोग चाहते हैं कि अपने मुँह से (फ़ूंक मारकर) ख़ुदा के नूर को बुझा दें और ख़ुदा इसके सिवा कुछ मानता ही नहीं कि अपने नूर को पूरा ही करके रहे
33هُوَ الَّذِي أَرْسَلَ رَسُولَهُ بِالْهُدَىٰ وَدِينِ الْحَقِّ لِيُظْهِرَهُ عَلَى الدِّينِ كُلِّهِ وَلَوْ كَرِهَ الْمُشْرِكُونَ
अगरचे कुफ्फ़ार बुरा माना करें वही तो (वह ख़ुदा) है कि जिसने अपने रसूल (मोहम्मद) को हिदायत और सच्चे दीन के साथ ( मबऊस करके) भेजता कि उसको तमाम दीनो पर ग़ालिब करे अगरचे मुशरेकीन बुरा माना करे
34۞ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِنَّ كَثِيرًا مِّنَ الْأَحْبَارِ وَالرُّهْبَانِ لَيَأْكُلُونَ أَمْوَالَ النَّاسِ بِالْبَاطِلِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ ۗ وَالَّذِينَ يَكْنِزُونَ الذَّهَبَ وَالْفِضَّةَ وَلَا يُنفِقُونَهَا فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَبَشِّرْهُم بِعَذَابٍ أَلِيمٍ
ऐ ईमानदारों इसमें उसमें शक़ नहीं कि (यहूद व नसारा के) बहुतेरे आलिम ज़ाहिद लोगों के माल (नाहक़) चख जाते है और (लोगों को) ख़ुदा की राह से रोकते हैं और जो लोग सोना और चाँदी जमा करते जाते हैं और उसको ख़ुदा की राह में खर्च नहीं करते तो (ऐ रसूल) उन को दर्दनाक अज़ाब की ख़ुशखबरी सुना दो
35يَوْمَ يُحْمَىٰ عَلَيْهَا فِي نَارِ جَهَنَّمَ فَتُكْوَىٰ بِهَا جِبَاهُهُمْ وَجُنُوبُهُمْ وَظُهُورُهُمْ ۖ هَٰذَا مَا كَنَزْتُمْ لِأَنفُسِكُمْ فَذُوقُوا مَا كُنتُمْ تَكْنِزُونَ
(जिस दिन वह (सोना चाँदी) जहन्नुम की आग में गर्म (और लाल) किया जाएगा फिर उससे उनकी पेशानियाँ और उनके पहलू और उनकी पीठें दाग़ी जाऎंगी (और उनसे कहा जाएगा) ये वह है जिसे तुमने अपने लिए (दुनिया में) जमा करके रखा था तो (अब) अपने जमा किए का मज़ा चखो
अत-तौबाकुरान सूची
129आयत
मदनीRevelation
33आयत

अनुवाद — अत-तौबा 33

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Tuesday, August 18, 2026

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