Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يُحْمَىٰ: आग को बहुत अधिक तपाया जाएगा।
- فَتُكْوَىٰ: उससे दागा जाएगा (जलाया जाएगा)।
- جِبَاهُهُمْ: उनके माथे।
- جُنُوبُهُمْ: उनके पहलू (करवटें)।
- ظُهُورُهُمْ: उनकी पीठें।
- كَنَزْتُمْ: तुमने जमा करके रखा (ख़ज़ाना बनाया)।
तफ़सीर:
यह आयत उन लोगों के बारे में है जो सोना-चाँदी जमा करते हैं और उसमें अल्लाह के बताए हुए हक़ (ज़कात, ख़ैरात) अदा नहीं करते। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि उस दिन (क़ियामत के दिन) को याद करो जब उन जमा किए हुए ख़ज़ानों को जहन्नम की आग में तपाया जाएगा। जब वे धातुएँ आग से लाल-तप्त हो जाएँगी, तो उन्हीं से उनके माथे, पहलू और पीठें दागी जाएँगी। यह अज़ाब उन्हें इसलिए दिया जाएगा क्योंकि उन्होंने धन-दौलत को इकट्ठा करके रखा और अल्लाह के हुक़ूक़ (अधिकार) अदा नहीं किए। उस वक़्त उन्हें डाँटते हुए कहा जाएगा: "यही तो है वह माल जो तुमने अपने लिए जमा कर रखा था और उसमें अल्लाह का हक़ नहीं दिया। अब इसका मज़ा चखो, यानी उसी माल की वजह से आज तुम्हें यह सख़्त अज़ाब झेलना पड़ रहा है।"
फ़ायदे:
- इस आयत से मालूम होता है कि धन-दौलत जमा करना अपने आप में गुनाह नहीं है, बल्कि गुनाह उस धन में अल्लाह के बताए हुए हक़ (ज़कात और दूसरे फ़राइज़) अदा न करना है। जो व्यक्ति अपने माल से अल्लाह का हक़ अदा करता है, वह कंज़ (ख़ज़ाना बनाने वाला) नहीं कहलाता।
- यह आयत हमें सिखाती है कि माल की मुहब्बत और लालच इंसान को जहन्नम तक पहुँचा सकती है, जबकि अल्लाह की राह में ख़र्च करना और दूसरों की मदद करना जहन्नम से बचाता है।
- इससे यह भी पता चलता है कि क़ियामत के दिन इंसान के साथ उसका माल भी होगा, लेकिन वह उसके काम नहीं आएगा, बल्कि उसी माल के ज़रिए उसे अज़ाब दिया जाएगा। इसलिए अक़्लमंद वही है जो अपने माल को अल्लाह की राह में ख़र्च करके आख़िरत के लिए अच्छा ज़ख़ीरा बनाए।
- यह आयत हमें इस्लाम की निज़ाम-ए-ज़कात की अहमियत समझाती है कि ज़कात सिर्फ़ एक इबादत नहीं, बल्कि समाज में ग़रीबों और ज़रूरतमंदों का हक़ है। जो इसे अदा करता है, वह अपने माल को पाक करता है और अल्लाह की रहमत का हक़दार बनता है।
📜 आयत 33-37 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 35
सूरा अत-तौबा आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (जिस दिन वह (सोना चाँदी) जहन्नुम की आग में गर्म…सूरा आयत 35/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए

