Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- إِلًّا: रिश्तेदारी, नातेदारी।
- ذِمَّةً: वचन, संधि, अमान।
- يُرْضُونَكُم بِأَفْوَاهِهِمْ: वे अपनी ज़ुबान से तुम्हें खुश करते हैं।
- تَأْبَى قُلُوبُهُمْ: उनके दिल इनकार करते हैं।
- فَاسِقُونَ: आज्ञा का उल्लंघन करने वाले, वचन तोड़ने वाले।
तफ़सीर:
यह आयत मुशरिकों (बहुदेववादियों) के साथ किसी भी संधि या वचन पर भरोसा करने के बारे में सख्त चेतावनी देती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि उनके साथ कोई अहद (संधि) कैसे क़ायम रह सकती है, जबकि उनकी हालत यह है कि अगर उन्हें तुम पर ग़लबा (विजय) मिल जाए, तो वे न तो किसी रिश्तेदारी का लिहाज़ करते हैं और न ही किसी वचन या अमान का। वे तुम्हारे साथ कोई रहम और मुहब्बत नहीं रखते।
हाँ, जब वे तुमसे डरते हैं या कमज़ोर होते हैं, तो अपनी ज़ुबान से मीठी-मीठी बातें कहकर तुम्हें खुश करने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनके दिल उन बातों की तस्दीक़ नहीं करते। उनकी ज़ुबान और दिल में बिल्कुल फ़र्क़ होता है। उनमें से अधिकतर लोग फ़ासिक़ (वचन तोड़ने वाले और हुक्म की उल्लंघना करने वाले) हैं, जो किसी भी अहद को तोड़ने में कोई झिझक महसूस नहीं करते।
यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि दुश्मनों के नरम बोल और मीठी बातों पर भरोसा न करें, बल्कि उनके अमल और सच्चाई को देखें। उनकी ज़ुबानी बातें धोखा हैं, और उनका दिल हमेशा बुराई और दुश्मनी पर आमादा रहता है।
फ़ायदे:
- इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि दुश्मनों की ज़ुबानी बातों और वादों पर आँख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए, बल्कि उनके किरदार और अमल को परखना चाहिए।
- यह हमें सिखाती है कि इस्लाम में वचन और अहद की पाबंदी बहुत अहम है, लेकिन जो लोग खुद वचन तोड़ते हैं, उनसे सावधान रहना चाहिए।
- यह आयत मुसलमानों को हिम्मत और बहादुरी सिखाती है कि वे अपने दुश्मनों से न डरें और न ही उनकी चालाकियों में आएँ, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखें।
- यह बताती है कि मुनाफ़िक़ीन और वचन तोड़ने वालों की पहचान यह है कि उनकी ज़ुबान और दिल में फ़र्क़ होता है — यानी वे कहते कुछ हैं और करते कुछ और हैं। इसलिए हमें हमेशा सच्चाई और ईमानदारी पर क़ायम रहना चाहिए।
- यह आयत हमें याद दिलाती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों की हिफ़ाज़त करता है और दुश्मनों की साज़िशों से बचाने का ज़िम्मा लेता है, बशर्ते हम उसके हुक्मों पर अमल करें।
📜 आयत 6-10 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 8
सूरा अत-तौबा आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (उनका एहद) क्योंकर (रह सकता है) जब (उनकी ये हालत…सूरा आयत 8/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 6–10. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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