अत-तौबा · 8/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
كَيْفَ وَإِن يَظْهَرُوا عَلَيْكُمْ لَا يَرْقُبُوا فِيكُمْ إِلًّا وَلَا ذِمَّةً ۚ يُرْضُونَكُم بِأَفْوَاهِهِمْ وَتَأْبَىٰ قُلُوبُهُمْ وَأَكْثَرُهُمْ فَاسِقُونَ ۝٨
Kaifa wa iny-yazharoo `alaikum laa yarquboo feekum illanw wa laa zimmah; yurdoo nakum biafwaahihim wa taabaa quloobuhum wa aksaruhum faasiqoon
📖 हिंदी अर्थ
(उनका एहद) क्योंकर (रह सकता है) जब (उनकी ये हालत है) कि अगर तुम पर ग़लबा पा जाएं तो तुम्हारे में न तो रिश्ते नाते ही का लिहाज़ करेगें और न अपने क़ौल व क़रार का ये लोग तुम्हें अपनी ज़बानी (जमा खर्च में) खुश कर देते हैं हालॉकि उनके दिल नहीं मानते और उनमें के बहुतेरे तो बदचलन हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • إِلًّا: रिश्तेदारी, नातेदारी।
  • ذِمَّةً: वचन, संधि, अमान।
  • يُرْضُونَكُم بِأَفْوَاهِهِمْ: वे अपनी ज़ुबान से तुम्हें खुश करते हैं।
  • تَأْبَى قُلُوبُهُمْ: उनके दिल इनकार करते हैं।
  • فَاسِقُونَ: आज्ञा का उल्लंघन करने वाले, वचन तोड़ने वाले।

तफ़सीर:

यह आयत मुशरिकों (बहुदेववादियों) के साथ किसी भी संधि या वचन पर भरोसा करने के बारे में सख्त चेतावनी देती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि उनके साथ कोई अहद (संधि) कैसे क़ायम रह सकती है, जबकि उनकी हालत यह है कि अगर उन्हें तुम पर ग़लबा (विजय) मिल जाए, तो वे न तो किसी रिश्तेदारी का लिहाज़ करते हैं और न ही किसी वचन या अमान का। वे तुम्हारे साथ कोई रहम और मुहब्बत नहीं रखते।

हाँ, जब वे तुमसे डरते हैं या कमज़ोर होते हैं, तो अपनी ज़ुबान से मीठी-मीठी बातें कहकर तुम्हें खुश करने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनके दिल उन बातों की तस्दीक़ नहीं करते। उनकी ज़ुबान और दिल में बिल्कुल फ़र्क़ होता है। उनमें से अधिकतर लोग फ़ासिक़ (वचन तोड़ने वाले और हुक्म की उल्लंघना करने वाले) हैं, जो किसी भी अहद को तोड़ने में कोई झिझक महसूस नहीं करते।

यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि दुश्मनों के नरम बोल और मीठी बातों पर भरोसा न करें, बल्कि उनके अमल और सच्चाई को देखें। उनकी ज़ुबानी बातें धोखा हैं, और उनका दिल हमेशा बुराई और दुश्मनी पर आमादा रहता है।

फ़ायदे:

  1. इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि दुश्मनों की ज़ुबानी बातों और वादों पर आँख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए, बल्कि उनके किरदार और अमल को परखना चाहिए।
  2. यह हमें सिखाती है कि इस्लाम में वचन और अहद की पाबंदी बहुत अहम है, लेकिन जो लोग खुद वचन तोड़ते हैं, उनसे सावधान रहना चाहिए।
  3. यह आयत मुसलमानों को हिम्मत और बहादुरी सिखाती है कि वे अपने दुश्मनों से न डरें और न ही उनकी चालाकियों में आएँ, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखें।
  4. यह बताती है कि मुनाफ़िक़ीन और वचन तोड़ने वालों की पहचान यह है कि उनकी ज़ुबान और दिल में फ़र्क़ होता है — यानी वे कहते कुछ हैं और करते कुछ और हैं। इसलिए हमें हमेशा सच्चाई और ईमानदारी पर क़ायम रहना चाहिए।
  5. यह आयत हमें याद दिलाती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों की हिफ़ाज़त करता है और दुश्मनों की साज़िशों से बचाने का ज़िम्मा लेता है, बशर्ते हम उसके हुक्मों पर अमल करें।
🎧 सुनें

📜 आयत 6-10 — अत-तौबा

6وَإِنْ أَحَدٌ مِّنَ الْمُشْرِكِينَ اسْتَجَارَكَ فَأَجِرْهُ حَتَّىٰ يَسْمَعَ كَلَامَ اللَّهِ ثُمَّ أَبْلِغْهُ مَأْمَنَهُ ۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَّا يَعْلَمُونَ
और (ऐ रसूल) अगर मुशरिकीन में से कोई तुमसे पनाह मागें तो उसको पनाह दो यहाँ तक कि वह ख़ुदा का कलाम सुन ले फिर उसे उसकी अमन की जगह वापस पहुँचा दो ये इस वजह से कि ये लोग नादान हैं
7كَيْفَ يَكُونُ لِلْمُشْرِكِينَ عَهْدٌ عِندَ اللَّهِ وَعِندَ رَسُولِهِ إِلَّا الَّذِينَ عَاهَدتُّمْ عِندَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ ۖ فَمَا اسْتَقَامُوا لَكُمْ فَاسْتَقِيمُوا لَهُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ الْمُتَّقِينَ
(जब) मुशरिकीन ने ख़ुद एहद शिकनी (तोड़ा) की तो उन का कोई एहदो पैमान ख़ुदा के नज़दीक और उसके रसूल के नज़दीक क्योंकर (क़ायम) रह सकता है मगर जिन लोगों से तुमने खानाए काबा के पास मुआहेदा किया था तो वह लोग (अपनी एहदो पैमान) तुमसे क़ायम रखना चाहें तो तुम भी उन से (अपना एहद) क़ायम रखो बेशक ख़ुदा (बद एहदी से) परहेज़ करने वालों को दोस्त रखता है
8كَيْفَ وَإِن يَظْهَرُوا عَلَيْكُمْ لَا يَرْقُبُوا فِيكُمْ إِلًّا وَلَا ذِمَّةً ۚ يُرْضُونَكُم بِأَفْوَاهِهِمْ وَتَأْبَىٰ قُلُوبُهُمْ وَأَكْثَرُهُمْ فَاسِقُونَ
(उनका एहद) क्योंकर (रह सकता है) जब (उनकी ये हालत है) कि अगर तुम पर ग़लबा पा जाएं तो तुम्हारे में न तो रिश्ते नाते ही का लिहाज़ करेगें और न अपने क़ौल व क़रार का ये लोग तुम्हें अपनी ज़बानी (जमा खर्च में) खुश कर देते हैं हालॉकि उनके दिल नहीं मानते और उनमें के बहुतेरे तो बदचलन हैं
9اشْتَرَوْا بِآيَاتِ اللَّهِ ثَمَنًا قَلِيلًا فَصَدُّوا عَن سَبِيلِهِ ۚ إِنَّهُمْ سَاءَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
और उन लोगों ने ख़ुदा की आयतों के बदले थोड़ी सी क़ीमत (दुनियावी फायदे) हासिल करके (लोगों को) उसकी राह से रोक दिया बेशक ये लोग जो कुछ करते हैं ये बहुत ही बुरा है
10لَا يَرْقُبُونَ فِي مُؤْمِنٍ إِلًّا وَلَا ذِمَّةً ۚ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُعْتَدُونَ
ये लोग किसी मोमिन के बारे में न तो रिश्ता नाता ही कर लिहाज़ करते हैं और न क़ौल का क़रार का और (वाक़ई) यही लोग ज्यादती करते हैं
अत-तौबाकुरान सूची
129आयत
मदनीRevelation
8आयत

अनुवाद — अत-तौबा 8

सूरा अत-तौबा आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (उनका एहद) क्योंकर (रह सकता है) जब (उनकी ये हालत…

सूरा आयत 8/129 — अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अत-तौबा सुनें, अत-तौबा अनुवाद, अत-तौबा mp3, अत-तौबा pdf. आयत 6–10. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए