अत-तौबा · 9/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
اشْتَرَوْا بِآيَاتِ اللَّهِ ثَمَنًا قَلِيلًا فَصَدُّوا عَن سَبِيلِهِ ۚ إِنَّهُمْ سَاءَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ ۝٩
Ishtaraw bi Aayaatil laahi samanan qaleelan fasaddoo `an sabeelih; innahum saaa`a maa kaanoo ya`maloon
📖 हिंदी अर्थ
और उन लोगों ने ख़ुदा की आयतों के बदले थोड़ी सी क़ीमत (दुनियावी फायदे) हासिल करके (लोगों को) उसकी राह से रोक दिया बेशक ये लोग जो कुछ करते हैं ये बहुत ही बुरा है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اشْتَرَوْا: उन्होंने बदला, खरीदा या अदला-बदली की।
  • ثَمَنًا قَلِيلًا: बहुत थोड़ा मूल्य, यानी दुनिया का बेहद कम और बेकार सामान।
  • فَصَدُّوا: उन्होंने रोका (खुद को भी और दूसरों को भी)।
  • سَبِيلِهِ: अल्लाह का रास्ता, यानी इस्लाम और सच्चाई का मार्ग।
  • سَاءَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ: बहुत बुरा था वह काम जो वे कर रहे थे।

तफसीर (व्याख्या):

इन लोगों ने अल्लाह की आयतों (उसकी निशानियों, उसके आदेशों और कुरआन की शिक्षाओं) को बेहद कम और तुच्छ दुनियावी कीमत पर बेच दिया। यानी उन्होंने सच्चाई और हिदायत को छोड़कर दुनिया के मामूली फायदे, शहवतें और अपनी ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए झूठ और गलत रास्ता अपना लिया। उन्होंने अल्लाह की आयतों के बदले में दुनिया का यह बेकार सामान खरीद लिया।

फिर उन्होंने न सिर्फ खुद को अल्लाह के रास्ते पर चलने से रोका, बल्कि दूसरे लोगों को भी इस्लाम में दाखिल होने और सच्चाई अपनाने से रोका। उन्होंने लोगों को अल्लाह के दीन की तरफ बढ़ने से मना किया और उन्हें गुमराह करने की कोशिश की। उनका यह काम बहुत बुरा और घिनौना था, और वे जो कुछ भी कर रहे थे, वह अल्लाह की नज़र में बेहद नापसंदीदा और गुनाह का काम था। उनका यह कृत्य उनके ईमान के खोने और अल्लाह की नाराज़गी का सबब बना।

फायदे और सबक:

  1. अल्लाह की आयतों और उसके दीन को दुनिया के किसी भी मामूली फायदे के बदले बेचना सबसे बड़ा नुकसान है। एक मोमिन को चाहिए कि वह दुनिया की किसी भी चीज़ के लिए अपने ईमान और सच्चाई को हरगिज़ न छोड़े।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि सिर्फ खुद सच्चाई पर चलना काफी नहीं है, बल्कि दूसरों को भी अल्लाह के रास्ते की तरफ बुलाना और उन्हें गुमराही से बचाना हमारी जिम्मेदारी है। जो लोग दूसरों को सच्चाई से रोकते हैं, वे बहुत बड़े गुनाहगार हैं।
  3. दुनिया की चीज़ें चाहे कितनी भी खूबसूरत और आकर्षक क्यों न लगें, वे अल्लाह की आयतों और उसके दीन के मुकाबले बेहद कम और बेकार हैं। अक्लमंद वही है जो इस कम कीमत को छोड़कर हमेशा रहने वाली नेमतों को चुने।
  4. यह आयत हमें आगाह करती है कि हमारे कर्मों का अंजाम अल्लाह के पास है। जो लोग बुरे काम करते हैं और लोगों को सच्चाई से रोकते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होगा, और अल्लाह उनके कर्मों से खुश नहीं होता।
  5. इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि ईमान और अल्लाह का रास्ता सबसे कीमती चीज़ है। इसे दुनिया की किसी भी चीज़ के बदले नहीं बेचा जा सकता। जो लोग इस सच्चाई को समझ जाते हैं, वे दुनिया की परवाह किए बिना अल्लाह के रास्ते पर चलते हैं और दूसरों को भी इसी की तरफ बुलाते हैं।
🎧 सुनें

📜 आयत 7-11 — अत-तौबा

7كَيْفَ يَكُونُ لِلْمُشْرِكِينَ عَهْدٌ عِندَ اللَّهِ وَعِندَ رَسُولِهِ إِلَّا الَّذِينَ عَاهَدتُّمْ عِندَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ ۖ فَمَا اسْتَقَامُوا لَكُمْ فَاسْتَقِيمُوا لَهُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ الْمُتَّقِينَ
(जब) मुशरिकीन ने ख़ुद एहद शिकनी (तोड़ा) की तो उन का कोई एहदो पैमान ख़ुदा के नज़दीक और उसके रसूल के नज़दीक क्योंकर (क़ायम) रह सकता है मगर जिन लोगों से तुमने खानाए काबा के पास मुआहेदा किया था तो वह लोग (अपनी एहदो पैमान) तुमसे क़ायम रखना चाहें तो तुम भी उन से (अपना एहद) क़ायम रखो बेशक ख़ुदा (बद एहदी से) परहेज़ करने वालों को दोस्त रखता है
8كَيْفَ وَإِن يَظْهَرُوا عَلَيْكُمْ لَا يَرْقُبُوا فِيكُمْ إِلًّا وَلَا ذِمَّةً ۚ يُرْضُونَكُم بِأَفْوَاهِهِمْ وَتَأْبَىٰ قُلُوبُهُمْ وَأَكْثَرُهُمْ فَاسِقُونَ
(उनका एहद) क्योंकर (रह सकता है) जब (उनकी ये हालत है) कि अगर तुम पर ग़लबा पा जाएं तो तुम्हारे में न तो रिश्ते नाते ही का लिहाज़ करेगें और न अपने क़ौल व क़रार का ये लोग तुम्हें अपनी ज़बानी (जमा खर्च में) खुश कर देते हैं हालॉकि उनके दिल नहीं मानते और उनमें के बहुतेरे तो बदचलन हैं
9اشْتَرَوْا بِآيَاتِ اللَّهِ ثَمَنًا قَلِيلًا فَصَدُّوا عَن سَبِيلِهِ ۚ إِنَّهُمْ سَاءَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
और उन लोगों ने ख़ुदा की आयतों के बदले थोड़ी सी क़ीमत (दुनियावी फायदे) हासिल करके (लोगों को) उसकी राह से रोक दिया बेशक ये लोग जो कुछ करते हैं ये बहुत ही बुरा है
10لَا يَرْقُبُونَ فِي مُؤْمِنٍ إِلًّا وَلَا ذِمَّةً ۚ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُعْتَدُونَ
ये लोग किसी मोमिन के बारे में न तो रिश्ता नाता ही कर लिहाज़ करते हैं और न क़ौल का क़रार का और (वाक़ई) यही लोग ज्यादती करते हैं
11فَإِن تَابُوا وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ وَآتَوُا الزَّكَاةَ فَإِخْوَانُكُمْ فِي الدِّينِ ۗ وَنُفَصِّلُ الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ
तो अगर (अभी मुशरिक से) तौबा करें और नमाज़ पढ़ने लगें और ज़कात दें तो तुम्हारे दीनी भाई हैं और हम अपनी आयतों को वाक़िफकार लोगों के वास्ते तफ़सीलन बयान करते हैं
अत-तौबाकुरान सूची
129आयत
मदनीRevelation
9आयत

अनुवाद — अत-तौबा 9

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Tuesday, August 18, 2026

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