Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَمْ يَكُنْ – नहीं थे / नहीं रहे
- الَّذِينَ كَفَرُوا – जिन्होंने कुफ्र (इनकार) किया
- مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ – किताब वालों में से (यहूदी और ईसाई)
- وَالْمُشْرِكِينَ – और मुशरिकों (बुतपरस्तों) में से
- مُنفَكِّينَ – अलग होने वाले / छोड़ने वाले
- حَتَّى تَأْتِيَهُمُ – यहाँ तक कि उनके पास आ जाए
- الْبَيِّنَةُ – स्पष्ट प्रमाण / खुला हुआ सबूत
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि अहले-किताब (यहूदी और ईसाई) और मुशरिक (बुतपरस्त) लोग अपने कुफ्र और शिर्क पर इस क़दर जमे हुए थे कि वे उसे छोड़ने वाले नहीं थे। वे अपनी पुरानी परंपराओं और गलत धारणाओं से चिपके हुए थे, और उन्हें यह लगता था कि वे सही रास्ते पर हैं। लेकिन अल्लाह ने उनके लिए एक ऐसा वादा किया था जो पहले की किताबों (तौरात और इंजील) में मौजूद था – कि एक आखिरी नबी आएगा, जो स्पष्ट प्रमाण और सच्चा संदेश लेकर आएगा।
जब वह "बय्यिना" (स्पष्ट प्रमाण) आ गया – यानी हज़रत मुहम्मद ﷺ का मिशन शुरू हुआ – तो उनके पास कोई बहाना नहीं बचा। उन्होंने पहले कहा था कि अगर कोई नबी आएगा तो हम उस पर ईमान लाएंगे, लेकिन जब नबी ﷺ आए, तो उनमें से कुछ ने ईमान कबूल किया और कुछ ने ईर्ष्या और हठ के कारण इनकार किया। यह आयत बताती है कि सच्चाई सामने आने के बाद भी जो लोग कुफ्र पर अड़े रहे, उनके पास कोई तर्क नहीं बचा, और वे अपने अंधेरे में ही खोए रहे।
दावत और नसीहत:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला ने इंसान को अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि हर ज़माने में रहनुमा भेजे। आज हमारे पास वही "बय्यिना" मौजूद है – कुरआन और सुन्नत। अल्लाह ने हमें साफ रास्ता दिखा दिया है, अब यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उसे पकड़ें और अपनी ज़िंदगी को उसके अनुसार ढालें। जो लोग सच्चाई आने के बाद भी उसे नहीं मानते, वे खुद अपना नुकसान करते हैं। लेकिन जो लोग इस बय्यिना को कबूल कर लें, उनके लिए अल्लाह के पास बड़ी खुशखबरी है – जो आगे की आयतों में आएगी। आइए, हम उन लोगों में से बनें जो सच्चाई को पहचानें, उसे कबूल करें, और उस पर अमल करें। यही कामयाबी का रास्ता है।
📜 आयत 1-3 — सूरा अल-बय्यिना
अनुवाद — अल-बय्यिना 1
सूरा अल-बय्यिना आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अहले किताब और मुशरिकों से जो लोग काफिर थे जब…सूरा आयत 1/8 — सूरा अल-बय्यिना البينة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बय्यिना सुनें, सूरा अल-बय्यिना अनुवाद, सूरा अल-बय्यिना mp3, सूरा अल-बय्यिना pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-बय्यिना
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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