अल-बय्यिना · 1/8
अनुवाद उच्चारण — अल-बय्यिना
لَمْ يَكُنِ الَّذِينَ كَفَرُوا مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ وَالْمُشْرِكِينَ مُنفَكِّينَ حَتَّىٰ تَأْتِيَهُمُ الْبَيِّنَةُ ۝١
Lam ya kunil lazeena kafaru min ahlil kitaabi wal mushri keena mun fak keena hattaa ta-tiya humul bayyinah
📖 हिंदी अर्थ
अहले किताब और मुशरिकों से जो लोग काफिर थे जब तक कि उनके पास खुली हुई दलीलें न पहुँचे वह (अपने कुफ्र से) बाज़ आने वाले न थे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَمْ يَكُنْ – नहीं थे / नहीं रहे
  • الَّذِينَ كَفَرُوا – जिन्होंने कुफ्र (इनकार) किया
  • مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ – किताब वालों में से (यहूदी और ईसाई)
  • وَالْمُشْرِكِينَ – और मुशरिकों (बुतपरस्तों) में से
  • مُنفَكِّينَ – अलग होने वाले / छोड़ने वाले
  • حَتَّى تَأْتِيَهُمُ – यहाँ तक कि उनके पास आ जाए
  • الْبَيِّنَةُ – स्पष्ट प्रमाण / खुला हुआ सबूत

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि अहले-किताब (यहूदी और ईसाई) और मुशरिक (बुतपरस्त) लोग अपने कुफ्र और शिर्क पर इस क़दर जमे हुए थे कि वे उसे छोड़ने वाले नहीं थे। वे अपनी पुरानी परंपराओं और गलत धारणाओं से चिपके हुए थे, और उन्हें यह लगता था कि वे सही रास्ते पर हैं। लेकिन अल्लाह ने उनके लिए एक ऐसा वादा किया था जो पहले की किताबों (तौरात और इंजील) में मौजूद था – कि एक आखिरी नबी आएगा, जो स्पष्ट प्रमाण और सच्चा संदेश लेकर आएगा।

जब वह "बय्यिना" (स्पष्ट प्रमाण) आ गया – यानी हज़रत मुहम्मद ﷺ का मिशन शुरू हुआ – तो उनके पास कोई बहाना नहीं बचा। उन्होंने पहले कहा था कि अगर कोई नबी आएगा तो हम उस पर ईमान लाएंगे, लेकिन जब नबी ﷺ आए, तो उनमें से कुछ ने ईमान कबूल किया और कुछ ने ईर्ष्या और हठ के कारण इनकार किया। यह आयत बताती है कि सच्चाई सामने आने के बाद भी जो लोग कुफ्र पर अड़े रहे, उनके पास कोई तर्क नहीं बचा, और वे अपने अंधेरे में ही खोए रहे।


दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला ने इंसान को अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि हर ज़माने में रहनुमा भेजे। आज हमारे पास वही "बय्यिना" मौजूद है – कुरआन और सुन्नत। अल्लाह ने हमें साफ रास्ता दिखा दिया है, अब यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उसे पकड़ें और अपनी ज़िंदगी को उसके अनुसार ढालें। जो लोग सच्चाई आने के बाद भी उसे नहीं मानते, वे खुद अपना नुकसान करते हैं। लेकिन जो लोग इस बय्यिना को कबूल कर लें, उनके लिए अल्लाह के पास बड़ी खुशखबरी है – जो आगे की आयतों में आएगी। आइए, हम उन लोगों में से बनें जो सच्चाई को पहचानें, उसे कबूल करें, और उस पर अमल करें। यही कामयाबी का रास्ता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 1-3 — अल-बय्यिना

1لَمْ يَكُنِ الَّذِينَ كَفَرُوا مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ وَالْمُشْرِكِينَ مُنفَكِّينَ حَتَّىٰ تَأْتِيَهُمُ الْبَيِّنَةُ
अहले किताब और मुशरिकों से जो लोग काफिर थे जब तक कि उनके पास खुली हुई दलीलें न पहुँचे वह (अपने कुफ्र से) बाज़ आने वाले न थे
2رَسُولٌ مِّنَ اللَّهِ يَتْلُو صُحُفًا مُّطَهَّرَةً
(यानि) ख़ुदा के रसूल जो पाक औराक़ पढ़ते हैं (आए और)
3فِيهَا كُتُبٌ قَيِّمَةٌ
उनमें (जो) पुरज़ोर और दरूस्त बातें लिखी हुई हैं (सुनाये)
अल-बय्यिनाकुरान सूची
8आयत
मदनीRevelation
1आयत

अनुवाद — अल-बय्यिना 1

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Tuesday, August 18, 2026

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