अल-बय्यिना · 2/8
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बय्यिना
رَسُولٌ مِّنَ اللَّهِ يَتْلُو صُحُفًا مُّطَهَّرَةً ۝٢
Rasoolum minal laahi yatlu suhufam mutahharah
📖 हिंदी अर्थ
(यानि) ख़ुदा के रसूल जो पाक औराक़ पढ़ते हैं (आए और)

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَسُولٌ: संदेशवाहक, पैगंबर।
  • يَتْلُو: पढ़ता है, सुनाता है।
  • صُحُفًا: पवित्र पन्ने, लिखित पृष्ठ।
  • مُطَهَّرَةً: पवित्र की हुई, हर झूठ और बुराई से साफ।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उस स्पष्ट प्रमाण और खुली हुई दलील का वर्णन कर रहा है, जो उसने अपने बंदों को दी। वह प्रमाण है अल्लाह का भेजा हुआ रसूल, हज़रत मुहम्मद ﷺ, जो अल्लाह की ओर से आए। वह ऐसे पवित्र पन्नों को पढ़ते हैं जो हर प्रकार की मिलावट, झूठ और बुराई से पाक और साफ हैं। ये पन्ने वही कुरआन हैं, जो अल्लाह की ओर से उतरा और जिसमें कोई कमी या बढ़ोतरी नहीं।

यहाँ यह बात समझनी चाहिए कि रसूल ﷺ उन पन्नों के लिखे हुए अक्षरों को नहीं पढ़ रहे थे, बल्कि उनके अंदर का संदेश और उनका मतलब सुना रहे थे, क्योंकि आप ﷺ उम्मी (अनपढ़) थे और आपने कभी पढ़ना-लिखना नहीं सीखा। यह स्वयं एक बड़ा चमत्कार था कि एक अनपढ़ व्यक्ति ऐसी पवित्र और अद्भुत किताब पढ़ता है जो सृष्टि की सबसे उत्तम शिक्षाओं से भरी है।

ये पन्ने इतने पवित्र हैं कि इन्हें छूने का अधिकार केवल वही लोग रखते हैं जो पाक और शुद्ध हों। यह कुरआन की महानता और उसकी पवित्रता का प्रमाण है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने अपनी रहमत से हमारे लिए एक ऐसा रसूल भेजा जो हमें सीधा रास्ता दिखाए और हमें अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर लाए। यह अल्लाह का सबसे बड़ा उपकार है कि उसने हमें कुरआन जैसी पवित्र किताब दी, जो हर युग और हर जगह के लिए मार्गदर्शन है। हमें इस नेमत पर अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए और कुरआन को पढ़ने, समझने और उस पर अमल करने की कोशिश करनी चाहिए। यही हमारी कामयाबी और दोनों जहान की भलाई का ज़रिया है। अल्लाह हमें अपनी किताब को समझने और उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 1-4 — सूरा अल-बय्यिना

1لَمْ يَكُنِ الَّذِينَ كَفَرُوا مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ وَالْمُشْرِكِينَ مُنفَكِّينَ حَتَّىٰ تَأْتِيَهُمُ الْبَيِّنَةُ
अहले किताब और मुशरिकों से जो लोग काफिर थे जब तक कि उनके पास खुली हुई दलीलें न पहुँचे वह (अपने कुफ्र से) बाज़ आने वाले न थे
2رَسُولٌ مِّنَ اللَّهِ يَتْلُو صُحُفًا مُّطَهَّرَةً
(यानि) ख़ुदा के रसूल जो पाक औराक़ पढ़ते हैं (आए और)
3فِيهَا كُتُبٌ قَيِّمَةٌ
उनमें (जो) पुरज़ोर और दरूस्त बातें लिखी हुई हैं (सुनाये)
4وَمَا تَفَرَّقَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ إِلَّا مِن بَعْدِ مَا جَاءَتْهُمُ الْبَيِّنَةُ
अहले किताब मुताफ़र्रिक़ हुए भी तो जब उनके पास खुली हुई दलील आ चुकी
अल-बय्यिनाकुरान सूची
8आयत
मदनीअवतरण स्थान
2आयत

अनुवाद — अल-बय्यिना 2

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पवित्र क़ुरआन


Monday, September 28, 2026

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