अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْحُطَمَةُ (अल-हुतामा): यह नर्क का एक नाम है, जो इसलिए रखा गया क्योंकि यह अपने अंदर डाली गई हर चीज़ को चूर-चूर कर देती है। "हत्म" का अर्थ है तोड़ना और टुकड़े-टुकड़े करना।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ से ख़िताब करते हुए फ़रमाता है कि ऐ रसूल! तुम्हें क्या पता कि वह "हुतामा" क्या है? यह एक ऐसा सवाल है जो इस चीज़ की अहमियत और उसके ख़ौफ़नाक होने को ज़ाहिर करता है। यानी यह आग कोई आम आग नहीं है, बल्कि वह अल्लाह की बनाई हुई ऐसी भयानक आग है जो हर उस चीज़ को रौंद डालती है और चूर-चूर कर देती है जो उसमें डाली जाए।
यह आग दिलों तक पहुँचती है और उन्हें अपनी लपटों में जला देती है। यह वह आग है जो उन लोगों के लिए तैयार की गई है जो दुनिया में लोगों का मज़ाक उड़ाते थे, उन्हें नीचा दिखाते थे, और माल जमा करके उसे गिनते-गिनते रहते थे, यह समझते हुए कि उनका माल उन्हें हमेशा ज़िंदा रखेगा। अल्लाह तआला फ़रमा रहा है कि यह सोच बिल्कुल ग़लत है, क्योंकि उनका अंजाम यह "हुतामा" है।
इस आयत में अल्लाह तआला ने जान-बूझकर इस आग की हकीकत को "तुम्हें क्या पता" के अंदाज़ में बयान किया है, ताकि हमारे दिलों में इसका ख़ौफ़ पैदा हो और हम समझें कि यह आग हमारी समझ से बिल्कुल परे है। यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है कि हम अपने अमल को संवारें, लोगों का मज़ाक उड़ाने और उन्हें नीचा दिखाने से बचें, और याद रखें कि हमारा असली घर वहाँ नहीं है जहाँ हम दुनिया में रहते हैं, बल्कि हमें उस आग से बचने की कोशिश करनी चाहिए जो दिलों तक पहुँचने वाली है।
यह आयत हमें अल्लाह की रहमत की तरफ़ बुलाती है कि हम तौबा करें, अपने गुनाहों से बाज़ आएँ, और अल्लाह के रसूल ﷺ की सिखाई हुई राह पर चलें। अल्लाह तआला बहुत मेहरबान है, वह चाहता है कि हम जहन्नम की इस आग से बचें और जन्नत की नेअमतों तक पहुँचें। जो शख्स इस दुनिया में अपने रब की इबादत करे और लोगों के साथ भलाई करे, उसके लिए अल्लाह के पास ऐसी जगहें तैयार हैं जिनका कोई हिसाब नहीं।
📜 आयत 3-7 — अल-हुमज़ा
अनुवाद — अल-हुमज़ा 5
सूरा अल-हुमज़ा आयत 5 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुमको क्या मालूम हतमा क्या हैसूरा आयत 5/9 — अल-हुमज़ा الهمزة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हुमज़ा सुनें, अल-हुमज़ा अनुवाद, अल-हुमज़ा mp3, अल-हुमज़ा pdf. आयत 3–7. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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