अर-राद · 1/43
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-राद
المر ۚ تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ ۗ وَالَّذِي أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ الْحَقُّ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يُؤْمِنُونَ ۝١
Alif-Laaam-Meeem-Raa; tilka Aayaatul Kitaab; wallazee unzila ilaika mir Rabbikal haqqu wa laakinna aksaran naasi laa yu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
अलिफ़ लाम मीम रा ये किताब (क़ुरान) की आयतें है और तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से जो कुछ तुम्हारे पास नाज़िल किया गया है बिल्कुल ठीक है मगर बहुतेरे लोग ईमान नहीं लाते

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • المر: ये हुरूफ़-ए-मुक़त्तआत (अलग-अलग अक्षर) हैं, जिनका सही अर्थ केवल अल्लाह ही जानता है। ये क़ुरआन की अजीमुश्शान किताब की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए हैं।
  • تِلْكَ: ये (आयतें) — इशारा उन आयतों की ओर है जो इस सूरह में मौजूद हैं।
  • آيَاتُ الْكِتَابِ: किताब की आयतें — यानी क़ुरआन की आयतें, या पिछली किताबों (तौरात, इंजील आदि) की आयतें।
  • الْحَقُّ: सत्य, जिसमें कोई संदेह नहीं — पूर्ण सत्य।
  • لَا يُؤْمِنُونَ: ईमान नहीं लाते — विश्वास नहीं करते।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इन शुरुआती हुरूफ़ (अक्षरों) से हमारा ध्यान अपनी अज़ीम किताब की ओर दिलाते हैं। ये अक्षर — अलिफ़, लाम, मीम, रा — अपने आप में एक चुनौती हैं कि ये क़ुरआन उन्हीं अरबी अक्षरों से बना है जिन्हें तुम बोलते और लिखते हो, फिर भी तुम इस जैसी कोई किताब नहीं ला सकते।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि "ये किताब की आयतें हैं" — यानी ये वो आयतें हैं जो अल्लाह की तरफ़ से नाज़िल हुई हैं, जिनमें हिदायत और रोशनी है। ये आयतें पिछली किताबों की भी तस्दीक़ करती हैं और उनकी मूल शिक्षाओं को संरक्षित रखती हैं।

इसके बाद अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को संबोधित करते हुए फ़रमाता है: "और जो कुछ तुम्हारे रब की तरफ़ से तुम पर उतारा गया है — यानी क़ुरआन — वह सत्य है।" ये एक बहुत बड़ी तसल्ली और यक़ीन की बात है। इस किताब में कोई संदेह नहीं, कोई कमी नहीं, कोई झूठ नहीं। ये हर उस चीज़ में सच्चा है जो ये बताती है — अल्लाह की वहदानियत (एकता), आख़िरत, नबुव्वत, और जीवन के हर पहलू के लिए हिदायत।

मगर अफ़सोस! अधिकतर लोग ईमान नहीं लाते। ये उनका अंदाज़ा नहीं है कि सच्चाई उन तक नहीं पहुँची, बल्कि ये उनकी ज़िद, हठधर्मिता और घमंड की वजह से है। वे इस पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र नहीं करते, अपने दिलों पर पर्दा डाल लेते हैं, और सच्चाई को देखते हुए भी उसे क़बूल नहीं करते।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! ये आयत हमें सिखाती है कि क़ुरआन सच्चाई की आख़िरी किताब है। जिसने इसे पकड़ लिया, उसने सच्चाई को पकड़ लिया। जिसने इसे छोड़ दिया, वह गुमराही में भटकता रहेगा। अल्लाह ने इस किताब को हमारे लिए आसान बना दिया है — पढ़ने के लिए, समझने के लिए, और उस पर अमल करने के लिए।

आज हमें चाहिए कि हम क़ुरआन को सिर्फ़ तिलावत के लिए न रखें, बल्कि उसे अपनी ज़िंदगी का दस्तूर बनाएँ। जब हम क़ुरआन पढ़ें तो सोचें कि अल्लाह हमसे क्या चाहता है। ये किताब हमारे लिए रहनुमा है, शिफ़ा है, और रहमत है।

और जो लोग ईमान नहीं लाते, उनके लिए ये आयत एक चेतावनी है — कि सच्चाई सामने आ चुकी है, अब इसे नकारना सिर्फ़ अपने नुक़सान का सामान करना है। अल्लाह हम सबको क़ुरआन को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 1-3 — सूरा अर-राद

1المر ۚ تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ ۗ وَالَّذِي أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ الْحَقُّ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يُؤْمِنُونَ
अलिफ़ लाम मीम रा ये किताब (क़ुरान) की आयतें है और तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से जो कुछ तुम्हारे पास नाज़िल किया गया है बिल्कुल ठीक है मगर बहुतेरे लोग ईमान नहीं लाते
2اللَّهُ الَّذِي رَفَعَ السَّمَاوَاتِ بِغَيْرِ عَمَدٍ تَرَوْنَهَا ۖ ثُمَّ اسْتَوَىٰ عَلَى الْعَرْشِ ۖ وَسَخَّرَ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ ۖ كُلٌّ يَجْرِي لِأَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ يُدَبِّرُ الْأَمْرَ يُفَصِّلُ الْآيَاتِ لَعَلَّكُم بِلِقَاءِ رَبِّكُمْ تُوقِنُونَ
ख़ुदा वही तो है जिसने आसमानों को जिन्हें तुम देखते हो बग़ैर सुतून (खम्बों) के उठाकर खड़ा कर दिया फिर अर्श (के बनाने) पर आमादा हुआ और सूरज और चाँद को (अपना) ताबेदार बनाया कि हर एक वक्त मुक़र्ररा तक चला करते है वही (दुनिया के) हर एक काम का इन्तेज़ाम करता है और इसी ग़रज़ से कि तुम लोग अपने परवरदिगार के सामने हाज़िर होने का यक़ीन करो
3وَهُوَ الَّذِي مَدَّ الْأَرْضَ وَجَعَلَ فِيهَا رَوَاسِيَ وَأَنْهَارًا ۖ وَمِن كُلِّ الثَّمَرَاتِ جَعَلَ فِيهَا زَوْجَيْنِ اثْنَيْنِ ۖ يُغْشِي اللَّيْلَ النَّهَارَ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
(अपनी) आयतें तफसीलदार बयान करता है और वह वही है जिसने ज़मीन को बिछाया और उसमें (बड़े बड़े) अटल पहाड़ और दरिया बनाए और उसने हर तरह के मेवों की दो दो किस्में पैदा की (जैसे खट्टे मीठे) वही रात (के परदे) से दिन को ढाक देता है इसमें शक़ नहीं कि जो लोग और ग़ौर व फिक्र करते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत खुदा की) बहुतेरी निशानियाँ हैं
अर-रादकुरान सूची
43आयत
मदनीअवतरण स्थान
1आयत

अनुवाद — अर-राद 1

सूरा अर-राद आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अलिफ़ लाम मीम रा ये किताब (क़ुरान) की आयतें है…

सूरा आयत 1/43 — सूरा अर-राद الرعد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-राद सुनें, सूरा अर-राद अनुवाद, सूरा अर-राद mp3, सूरा अर-राद pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए