अर-राद · 2/43
अनुवाद उच्चारण — अर-राद
اللَّهُ الَّذِي رَفَعَ السَّمَاوَاتِ بِغَيْرِ عَمَدٍ تَرَوْنَهَا ۖ ثُمَّ اسْتَوَىٰ عَلَى الْعَرْشِ ۖ وَسَخَّرَ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ ۖ كُلٌّ يَجْرِي لِأَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ يُدَبِّرُ الْأَمْرَ يُفَصِّلُ الْآيَاتِ لَعَلَّكُم بِلِقَاءِ رَبِّكُمْ تُوقِنُونَ ۝٢
Allaahul lazee raf`as samaawaati bighairi `amadin tarawnahaa summas tawaa `alal `Arshi wa sakhkharash shamsa walqamara kulluny yajree li ajalim musammaa; yudabbirul amra yufassilil Aayaati la`allakum biliqaaa`i Rabbikum tooqinoon
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा वही तो है जिसने आसमानों को जिन्हें तुम देखते हो बग़ैर सुतून (खम्बों) के उठाकर खड़ा कर दिया फिर अर्श (के बनाने) पर आमादा हुआ और सूरज और चाँद को (अपना) ताबेदार बनाया कि हर एक वक्त मुक़र्ररा तक चला करते है वही (दुनिया के) हर एक काम का इन्तेज़ाम करता है और इसी ग़रज़ से कि तुम लोग अपने परवरदिगार के सामने हाज़िर होने का यक़ीन करो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِغَيْرِ عَمَدٍ: बिना किसी स्तंभ (खंभे) के।
  • تَرَوْنَهَا: तुम उन्हें (आकाशों को) देखते हो।
  • اسْتَوَى: ऊपर उठना, सिंहासन पर विराजमान होना (जो अल्लाह की शान के अनुकूल है, बिना किसी प्रकार या आकार के)।
  • سَخَّرَ: वश में किया, अधीन किया।
  • يَجْرِي: चलता है, गतिशील है।
  • أَجَلٍ مُّسَمًّى: निर्धारित समय तक।
  • يُدَبِّرُ: प्रबंध करता है, योजना बनाता है।
  • يُفَصِّلُ: विस्तार से स्पष्ट करता है, खोलकर बयान करता है।
  • تُوقِنُونَ: यक़ीन करना, पक्का विश्वास करना।

विस्तृत तफ़सीर:

यह आयत मुसलमानों को अल्लाह की महान शक्ति और उसकी रचना के अद्भुत नज़ारों पर ग़ौर करने की दावत देती है। अल्लाह ही वह (एकमात्र) है जिसने सातों आकाशों को बिना किसी दिखाई देने वाले स्तंभ के ऊपर उठाया। तुम उन्हें अपनी आँखों से देखते हो कि वे बिना किसी सहारे के कैसे खड़े हैं, और यह उसकी कुदरत (शक्ति) का सबसे बड़ा प्रमाण है। इसके बाद वह अपने अर्श (सिंहासन) पर विराजमान हुआ — एक ऐसा उठना और ऊपर होना जो उसकी महानता और जलाल के योग्य है, न किसी प्रकार के साथ और न किसी चीज़ से मिलता-जुलता। उसने सूर्य और चंद्रमा को अपनी रचना के लाभ के लिए वश में कर रखा है; दोनों अपने निर्धारित कक्षाओं में एक निश्चित समय (क़यामत तक) के लिए चलते रहते हैं। वही सारे मामलों का प्रबंधन करता है — आकाश और धरती के हर काम को वही चलाता है, और कोई उसमें उसका साझी नहीं। वह अपनी निशानियों (आयतों) को विस्तार से स्पष्ट करता है ताकि तुम अपने रब से मिलने (आख़िरत) पर पक्का यक़ीन करो, और उसके वादे और डरावने अंजाम को सच मानकर उसकी इबादत में एकाग्र हो जाओ।


फ़ायदे (सीख):

  1. अल्लाह की कुदरत पर ग़ौर करना इमान की मज़बूती का ज़रिया है — जब इंसान आसमानों की बुलंदी और सूरज-चाँद के नियमित चलने को देखता है, तो उसका दिल अल्लाह की अज़मत (महानता) से भर जाता है और उस पर भरोसा बढ़ता है।
  2. अल्लाह हर चीज़ का प्रबंधक है — यह आयत हमें सिखाती है कि इस कायनात का हर छोटा-बड़ा काम अल्लाह के हाथ में है। इससे इंसान को सुकून मिलता है कि उसका मामला किसी और के हाथ में नहीं, बल्कि सबसे दयालु और सबसे ताक़तवर के हाथ में है।
  3. आख़िरत पर यक़ीन ही असली कामयाबी की कुंजी है — अल्लाह ने यह सब निशानियाँ इसलिए बयान कीं ताकि हमें अपने रब से मिलने का यक़ीन हो। यह यक़ीन इंसान को अच्छे कामों की तरफ़ प्रेरित करता है और बुराई से दूर रखता है, क्योंकि वह जानता है कि उसे एक दिन अपने रब के सामने हाज़िर होना है।
  4. अल्लाह की इबादत में एकाग्रता — जब हमें यक़ीन हो जाए कि सब कुछ अल्लाह के हाथ में है और हमें उसी के पास लौटना है, तो हमारी इबादत ख़ालिस (शुद्ध) हो जाती है और हम किसी और से उम्मीद नहीं रखते। यही तौहीद (एकेश्वरवाद) की असली रूह है।
🎧 सुनें

📜 आयत 1-4 — अर-राद

1المر ۚ تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ ۗ وَالَّذِي أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ الْحَقُّ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يُؤْمِنُونَ
अलिफ़ लाम मीम रा ये किताब (क़ुरान) की आयतें है और तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से जो कुछ तुम्हारे पास नाज़िल किया गया है बिल्कुल ठीक है मगर बहुतेरे लोग ईमान नहीं लाते
2اللَّهُ الَّذِي رَفَعَ السَّمَاوَاتِ بِغَيْرِ عَمَدٍ تَرَوْنَهَا ۖ ثُمَّ اسْتَوَىٰ عَلَى الْعَرْشِ ۖ وَسَخَّرَ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ ۖ كُلٌّ يَجْرِي لِأَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ يُدَبِّرُ الْأَمْرَ يُفَصِّلُ الْآيَاتِ لَعَلَّكُم بِلِقَاءِ رَبِّكُمْ تُوقِنُونَ
ख़ुदा वही तो है जिसने आसमानों को जिन्हें तुम देखते हो बग़ैर सुतून (खम्बों) के उठाकर खड़ा कर दिया फिर अर्श (के बनाने) पर आमादा हुआ और सूरज और चाँद को (अपना) ताबेदार बनाया कि हर एक वक्त मुक़र्ररा तक चला करते है वही (दुनिया के) हर एक काम का इन्तेज़ाम करता है और इसी ग़रज़ से कि तुम लोग अपने परवरदिगार के सामने हाज़िर होने का यक़ीन करो
3وَهُوَ الَّذِي مَدَّ الْأَرْضَ وَجَعَلَ فِيهَا رَوَاسِيَ وَأَنْهَارًا ۖ وَمِن كُلِّ الثَّمَرَاتِ جَعَلَ فِيهَا زَوْجَيْنِ اثْنَيْنِ ۖ يُغْشِي اللَّيْلَ النَّهَارَ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
(अपनी) आयतें तफसीलदार बयान करता है और वह वही है जिसने ज़मीन को बिछाया और उसमें (बड़े बड़े) अटल पहाड़ और दरिया बनाए और उसने हर तरह के मेवों की दो दो किस्में पैदा की (जैसे खट्टे मीठे) वही रात (के परदे) से दिन को ढाक देता है इसमें शक़ नहीं कि जो लोग और ग़ौर व फिक्र करते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत खुदा की) बहुतेरी निशानियाँ हैं
4وَفِي الْأَرْضِ قِطَعٌ مُّتَجَاوِرَاتٌ وَجَنَّاتٌ مِّنْ أَعْنَابٍ وَزَرْعٌ وَنَخِيلٌ صِنْوَانٌ وَغَيْرُ صِنْوَانٍ يُسْقَىٰ بِمَاءٍ وَاحِدٍ وَنُفَضِّلُ بَعْضَهَا عَلَىٰ بَعْضٍ فِي الْأُكُلِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
और खुरमों (खजूर) के दरख्त की एक जड़ और दो याखें और बाज़ अकेला (एक ही याख़ का) हालॉकि सब एक ही पानी से सीचे जाते हैं और फलों में बाज़ को बाज़ पर हम तरजीह देते हैं बेशक जो लोग अक़ल वाले हैं उनके लिए इसमें (कुदरत खुदा की) बहुतेरी निशानियाँ हैं
अर-रादकुरान सूची
43आयत
मदनीRevelation
2आयत

अनुवाद — अर-राद 2

सूरा अर-राद आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़ुदा वही तो है जिसने आसमानों को जिन्हें तुम देखते…

सूरा आयत 2/43 — अर-राद الرعد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-राद सुनें, अर-राद अनुवाद, अर-राद mp3, अर-राद pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए