अर-राद · 23/43
अनुवाद उच्चारण — अर-राद
جَنَّاتُ عَدْنٍ يَدْخُلُونَهَا وَمَن صَلَحَ مِنْ آبَائِهِمْ وَأَزْوَاجِهِمْ وَذُرِّيَّاتِهِمْ ۖ وَالْمَلَائِكَةُ يَدْخُلُونَ عَلَيْهِم مِّن كُلِّ بَابٍ ۝٢٣
jannaatu `adiny yadkhu loonahaa wa man salaha min aabaaa`ihim wa man salaha min aabaaa`ihim wa azwaajihim wa zurriyyaatihim walmalaaa`i katu yadkhuloona `alaihim min kulli baab
📖 हिंदी अर्थ
(यानि) हमेशा रहने के बाग़ जिनमें वह आप जाएॅगे और उनके बाप, दादाओं, बीवियों और उनकी औलाद में से जो लोग नेको कार है (वह सब भी) और फरिश्ते बेहश्त के हर दरवाजे से उनके पास आएगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • جَنَّاتُ عَدْنٍ: स्थायी निवास के बगीचे, यानी ऐसे बगीचे जिनमें हमेशा रहना हो।
  • صَلَحَ: जो सुधर गया, नेक और अच्छा बन गया, जिसने अच्छे कर्म किए।
  • آبَائِهِمْ: उनके बाप-दादा।
  • أَزْوَاجِهِمْ: उनकी पत्नियाँ।
  • ذُرِّيَّاتِهِمْ: उनकी संतानें।
  • يَدْخُلُونَ عَلَيْهِم: उनके पास आते हैं, उनसे मिलने आते हैं।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन मोमिनों के आख़िरती अंजाम का वर्णन कर रही है जिन्होंने अपने रब के आदेशों का पालन किया और अच्छे कर्म किए। उनका अंजाम यह है कि उन्हें "जन्नतुल अद्न" (स्थायी निवास के बगीचे) में दाखिल किया जाएगा, जहाँ वे हमेशा रहेंगे और कभी निकाले नहीं जाएँगे। यह उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान और इनाम है।

सबसे खूबसूरत बात यह है कि अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को अकेला नहीं छोड़ेगा, बल्कि उनके साथ उनके उन रिश्तेदारों को भी जन्नत में दाखिल करेगा जो नेक थे — चाहे वे उनके बाप-दादा हों, पत्नियाँ हों या संतानें हों। यानी जो लोग ईमान और अच्छे कर्मों पर स्थिर रहे, उन्हें उनके परिवार वालों के साथ मिलाकर जन्नत में रखा जाएगा, ताकि उनकी खुशी और भी पूरी हो जाए और उनका आनंद दोगुना हो जाए।

इसके अलावा, जब ये नेक लोग जन्नत में दाखिल होंगे, तो फ़रिश्ते उन्हें मुबारकबाद देने के लिए हर दरवाज़े से उनके पास आएँगे। वे उन्हें सलाम करेंगे और उन्हें जन्नत की खुशखबरी देंगे। यह उनके लिए एक और बड़ा सम्मान है कि अल्लाह के करीबी फ़रिश्ते खुद उनके पास आकर उन्हें बधाई दें।

फ़ायदे (सीख):

  1. परिवार के साथ जन्नत: यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की रहमत इतनी वसीह है कि वह नेक बंदों को उनके परिवार के साथ जन्नत में इकट्ठा करेगा। यह हमें अपने परिवार को नेक बनाने की तरग़ीब देता है, ताकि हम सब मिलकर जन्नत में रह सकें।
  2. अच्छे कर्मों की बरकत: जो लोग अच्छे कर्म करते हैं, उनकी नेकी का फ़ायदा सिर्फ़ उन्हें ही नहीं बल्कि उनके रिश्तेदारों को भी मिलता है। यह हमें अच्छे कर्मों पर स्थिर रहने की प्रेरणा देता है।
  3. फ़रिश्तों का सम्मान: जन्नत में फ़रिश्तों का हर दरवाज़े से आकर मुबारकबाद देना दिखाता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों की कितनी इज़्ज़त करता है। यह हमें अल्लाह की रहमत और करम की उम्मीद दिलाता है।
  4. परिवार की ज़िम्मेदारी: यह आयत हमें याद दिलाती है कि हमें अपने माता-पिता, पत्नी और बच्चों की इस्लाह (सुधार) की कोशिश करनी चाहिए, ताकि हम सब मिलकर उस खूबसूरत मंज़िल तक पहुँच सकें।


📜 आयत 21-25 — अर-राद

21وَالَّذِينَ يَصِلُونَ مَا أَمَرَ اللَّهُ بِهِ أَن يُوصَلَ وَيَخْشَوْنَ رَبَّهُمْ وَيَخَافُونَ سُوءَ الْحِسَابِ
(ये) वह लोग हैं कि जिन (ताल्लुक़ात) के क़ायम रखने का ख़ुदा ने हुक्म दिया उन्हें क़ायम रखते हैं और अपने परवरदिगार से डरते हैं और (क़यामत के दिन) बुरी तरह हिसाब लिए जाने से ख़ौफ खाते हैं
22وَالَّذِينَ صَبَرُوا ابْتِغَاءَ وَجْهِ رَبِّهِمْ وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ وَأَنفَقُوا مِمَّا رَزَقْنَاهُمْ سِرًّا وَعَلَانِيَةً وَيَدْرَءُونَ بِالْحَسَنَةِ السَّيِّئَةَ أُولَٰئِكَ لَهُمْ عُقْبَى الدَّارِ
और (ये) वह लोग हैं जो अपने परवरदिगार की खुशनूदी हासिल करने की ग़रज़ से (जो मुसीबत उन पर पड़ी है) झेल गए और पाबन्दी से नमाज़ अदा की और जो कुछ हमने उन्हें रोज़ी दी थी उसमें से छिपाकर और खुल कर ख़ुदा की राह में खर्च किया और ये लोग बुराई को भी भलाई स दफा करते हैं -यही लोग हैं जिनके लिए आख़िरत की खूबी मख़सूस है
23جَنَّاتُ عَدْنٍ يَدْخُلُونَهَا وَمَن صَلَحَ مِنْ آبَائِهِمْ وَأَزْوَاجِهِمْ وَذُرِّيَّاتِهِمْ ۖ وَالْمَلَائِكَةُ يَدْخُلُونَ عَلَيْهِم مِّن كُلِّ بَابٍ
(यानि) हमेशा रहने के बाग़ जिनमें वह आप जाएॅगे और उनके बाप, दादाओं, बीवियों और उनकी औलाद में से जो लोग नेको कार है (वह सब भी) और फरिश्ते बेहश्त के हर दरवाजे से उनके पास आएगें
24سَلَامٌ عَلَيْكُم بِمَا صَبَرْتُمْ ۚ فَنِعْمَ عُقْبَى الدَّارِ
और सलाम अलैकुम (के बाद कहेगें) कि (दुनिया में) तुमने सब्र किया (ये उसी का सिला है देखो) तो आख़िरत का घर कैसा अच्छा है
25وَالَّذِينَ يَنقُضُونَ عَهْدَ اللَّهِ مِن بَعْدِ مِيثَاقِهِ وَيَقْطَعُونَ مَا أَمَرَ اللَّهُ بِهِ أَن يُوصَلَ وَيُفْسِدُونَ فِي الْأَرْضِ ۙ أُولَٰئِكَ لَهُمُ اللَّعْنَةُ وَلَهُمْ سُوءُ الدَّارِ
और जो लोग ख़ुदा से एहद व पैमान को पक्का करने के बाद तोड़ डालते हैं और जिन (तालुकात बाहमी) के क़ायम रखने का ख़ुदा ने हुक्म दिया है उन्हें क़तआ (तोड़ते) करते हैं और रुए ज़मीन पर फ़साद फैलाते फिरते हैं ऐसे ही लोग हैं जिनके लिए लानत है और ऐसे ही लोगों के वास्ते बड़ा घर (जहन्नुम) है
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अनुवाद — अर-राद 23

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Tuesday, August 18, 2026

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