Masalul Jannatil latee wu`idal muttaqoona tajree min tahtihal anhaaru ukuluhaa daaa`imunw wa zilluhaa; tilka uqbal lazeenat taqaw wa `uqbal kafireenan Naar
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
जिस बाग़ (बेहश्त) का परहेज़गारों से वायदा किया गया है उसकी सिफत ये है कि उसके नीचे नहरें जारी होगी उसके मेवे सदाबहार और ऐसे ही उसकी छॉव भी ये अन्जाम है उन लोगों को जो (दुनिया में) परहेज़गार थे और काफिरों का अन्जाम (जहन्नुम की) आग है
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جس باغ کا متقیوں سے وعدہ کیا گیا ہے اس کے اوصاف یہ ہیں کہ اس کے نیچے نہریں بہہ رہی ہیں۔ اس کے پھل ہمیشہ (قائم رہنے والے) ہیں اور اس کے سائے بھی۔ یہ ان لوگوں کا انجام ہے جو متقی ہیں۔ اور کافروں کا انجام دوزخ ہے
यह आयत उस जन्नत का वर्णन कर रही है जिसका वादा अल्लाह ने अपने डर रखने वाले, आज्ञाकारी और पापों से बचने वाले बंदों से किया है। उस जन्नत की विशेषता यह है कि उसके महलों और पेड़ों के नीचे नदियाँ बहती हैं। उसके फल कभी समाप्त नहीं होते और न ही मौसमी होते हैं, बल्कि हमेशा उपलब्ध रहते हैं। उसकी छाया भी स्थायी है, जो कभी घटती नहीं और न ही सूरज की तपिश से समाप्त होती है। यह उन लोगों का अंतिम ठिकाना है जिन्होंने अल्लाह से डरकर उसके आदेशों का पालन किया और उसकी मनाही से बचे। इसके विपरीत, जिन्होंने अल्लाह को नकारा और उसके रसूलों को झुठलाया, उनका अंतिम परिणाम आग (नरक) है, जिसमें वे हमेशा रहेंगे। यह आयत इस बात पर भी ज़ोर देती है कि जन्नत का सुख कभी खत्म नहीं होगा, क्योंकि अल्लाह ने इसे स्थायी बनाया है।
फ़ायदे (सबक):
यह आयत मोमिनों को उस स्थायी सुख की याद दिलाती है जो अल्लाह ने उनके लिए तैयार किया है, ताकि वे दुनिया की अस्थायी चीज़ों पर मोहित न हों और धैर्य व ईमान पर कायम रहें।
जन्नत की नेमतें सिर्फ शारीरिक नहीं हैं, बल्कि उसमें हर तरह की खुशी और आराम शामिल है, जो कभी समाप्त नहीं होता—यह अल्लाह की रहमत का सबूत है।
अल्लाह का डर (तक़वा) ही वह रास्ता है जो इंसान को जन्नत तक पहुँचाता है, और यह डर इंसान को अच्छे काम करने और बुराई से बचने की ताकत देता है।
यह आयत चेतावनी देती है कि कुफ्र और नाफ़रमानी का अंजाम नरक है, इसलिए इंसान को अपने जीवन में अल्लाह की राह अपनानी चाहिए।
जन्नत की नेमतें स्थायी हैं, जबकि दुनिया की नेमतें अस्थायी हैं—यह बात इंसान को दुनिया से लगाव कम करने और आख़िरत की तैयारी करने की प्रेरणा देती है।
जिस बाग़ (बेहश्त) का परहेज़गारों से वायदा किया गया है उसकी सिफत ये है कि उसके नीचे नहरें जारी होगी उसके मेवे सदाबहार और ऐसे ही उसकी छॉव भी ये अन्जाम है उन लोगों को जो (दुनिया में) परहेज़गार थे और काफिरों का अन्जाम (जहन्नुम की) आग है
क्या जो (ख़ुदा) हर एक शख़्श के आमाल की ख़बर रखता है (उनको युं ही छोड़ देगा हरगिज़ नहीं) और उन लोगों ने ख़ुदा के (दूसरे दूसरे) शरीक ठहराए (ऐ रसूल तुम उनसे कह दो कि तुम आख़िर उनके नाम तो बताओं या तुम ख़ुदा को ऐसे शरीक़ो की ख़बर देते हो जिनको वह जानता तक नहीं कि वह ज़मीन में (किधर बसते) हैं या (निरी ऊपर से बातें बनाते हैं बल्कि (असल ये है कि) काफिरों को उनकी मक्कारियाँ भली दिखाई गई है और वह (गोया) राहे रास्त से रोक दिए गए हैं और जिस शख़्श को ख़ुदा गुमराही में छोड़ दे तो उसका कोई हिदायत करने वाला नहीं
इन लोगों के वास्ते दुनियावी ज़िन्दगी में (भी) अज़ाब है और आख़िरत का अज़ाब तो यक़ीनी और बहुत सख्त खुलने वाला है (और) (फिर) ख़ुदा (के ग़ज़ब) से उनको कोई बचाने वाला (भी) नहीं
जिस बाग़ (बेहश्त) का परहेज़गारों से वायदा किया गया है उसकी सिफत ये है कि उसके नीचे नहरें जारी होगी उसके मेवे सदाबहार और ऐसे ही उसकी छॉव भी ये अन्जाम है उन लोगों को जो (दुनिया में) परहेज़गार थे और काफिरों का अन्जाम (जहन्नुम की) आग है
और (ए रसूल) जिन लोगों को हमने किताब दी है वह तो जो (एहकाम) तुम्हारे पास नाज़िल किए गए हैं सब ही से खुश होते हैं और बाज़ फिरके उसकी बातों से इन्कार करते हैं तुम (उनसे) कह दो कि (तुम मानो या न मानो) मुझे तो ये हुक्म दिया गया है कि मै ख़ुदा ही की इबादत करु और किसी को उसका शरीक न बनाऊ मै (सब को) उसी की तरफ बुलाता हूँ और हर शख़्श को हिर फिर कर उसकी तरफ जाना है
और यूँ हमने उस क़ुरान को अरबी (ज़बान) का फरमान नाज़िल फरमाया और (ऐ रसूल) अगर कहीं तुमने इसके बाद को तुम्हारे पास इल्म (क़ुरान) आ चुका उन की नफसियानी ख्वाहिशों की पैरवी कर ली तो (याद रखो कि) फिर ख़ुदा की तरफ से न कोई तुम्हारा सरपरस्त होगा न कोई बचाने वाला
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