अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَهُمْ عَذَابٌ: उनके लिए यातना है।
- فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا: सांसारिक जीवन में।
- وَلَعَذَابُ الْآخِرَةِ أَشَقُّ: और आख़िरत की यातना अधिक कठिन और भारी है।
- مِنْ وَاقٍ: कोई बचाने वाला, रक्षा करने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
इन काफ़िरों के लिए जो अल्लाह के मार्ग से रोकते हैं, दुनिया की ज़िंदगी में भी एक कष्टदायक यातना है — जैसे क़त्ल, क़ैद (बंदी बनाना), और अपमान जो उन्हें मोमिनों के हाथों पहुँचता है। यह उनकी सांसारिक सज़ा है। लेकिन आख़िरत की यातना उससे कहीं अधिक कठोर, भारी और स्थायी है; क्योंकि उसमें दर्द की शिद्दत भी अधिक होगी और वह कभी समाप्त न होने वाली होगी। और उस दिन उनके लिए अल्लाह की ओर से कोई बचाने वाला, रक्षा करने वाला या सिफ़ारिश करने वाला नहीं होगा जो उन्हें उस यातना से छुड़ा सके।
फ़ायदे (लाभ और सबक़):
- दुनिया की सज़ा आख़िरत की सज़ा से हल्की है — यह आयत हमें सिखाती है कि अगर किसी गुनाहगार को दुनिया में सज़ा मिल जाए, तो यह उसके लिए रहमत है, क्योंकि इससे आख़िरत की सज़ा कम हो सकती है। लेकिन जो दुनिया में भी नहीं सुधरते, उनके लिए आख़िरत की सज़ा अधिक भयानक है।
- अल्लाह से कोई बचा नहीं सकता — जब अल्लाह किसी को सज़ा देना चाहे, तो न कोई ताक़त, न कोई धन-दौलत, न कोई रिश्तेदार और न कोई सिफ़ारिशी उसे बचा सकता है। इसलिए हमें सिर्फ़ अल्लाह की राह पर चलना चाहिए और उसकी नाराज़गी से बचना चाहिए।
- कुफ़्र और सत्य के मार्ग में रुकावट डालने का अंजाम — जो लोग दूसरों को अल्लाह के मार्ग से रोकते हैं या उसमें संदेह पैदा करते हैं, उनके लिए दुनिया और आख़िरत दोनों में बुरा अंजाम है। यह हमें सिखाता है कि हमें ख़ुद भी सीधे रास्ते पर चलना चाहिए और दूसरों को भी इसकी दावत देनी चाहिए।
- अल्लाह की रहमत और अदल का एहसास — यह आयत हमें अल्लाह के न्याय की याद दिलाती है कि वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि हर किसी को उसके कर्मों का पूरा बदला देगा। यह हमें अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करता है और बुराई से दूर रखता है।
📜 आयत 32-36 — अर-राद
अनुवाद — अर-राद 34
सूरा अर-राद आयत 34 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इन लोगों के वास्ते दुनियावी ज़िन्दगी में (भी) अज़ाब है…सूरा आयत 34/43 — अर-राद الرعد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-राद सुनें, अर-राद अनुवाद, अर-राद mp3, अर-राद pdf. आयत 32–36. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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