Man `amila saaliham min zakarin aw unsaa wa huwa mu`minun falanuhyiyannahoo hayaatan taiiyibatanw wa lanajzi yannnahum ajrahum bi ahsani maa kaanoo ya`maloon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
मर्द हो या औरत जो शख़्श नेक काम करेगा और वह ईमानदार भी हो तो हम उसे (दुनिया में भी) पाक व पाकीज़ा जिन्दगी बसर कराएँगें और (आख़िरत में भी) जो कुछ वह करते थे उसका अच्छे से अच्छा अज्र व सवाब अता फरमाएँगें
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🌐 اردو
جو شخص نیک اعمال کرے گا مرد ہو یا عورت وہ مومن بھی ہوگا تو ہم اس کو (دنیا میں) پاک (اور آرام کی) زندگی سے زندہ رکھیں گے اور (آخرت میں) اُن کے اعمال کا نہایت اچھا صلہ دیں گے
मर्द हो या औरत जो शख़्श नेक काम करेगा और वह ईमानदार भी हो तो हम उसे (दुनिया में भी) पाक व पाकीज़ा जिन्दगी बसर कराएँगें और (आख़िरत में भी) जो कुछ वह करते थे उसका अच्छे से अच्छा अज्र व सवाब अता फरमाएँगें
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
صَالِحًا (सालिहन): अच्छा कर्म, जो शरीयत के अनुसार हो।
حَيَاةً طَيِّبَةً (हयातन तय्यिबह): पवित्र एवं सुखमय जीवन।
أَحْسَنِ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ (अहसनि मा कानू यअ्मलून): उनके सर्वोत्तम कर्मों के अनुरूप।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उस महान वादे को बयान करती है जो अल्लाह ने अपने ईमानवाले बंदों से किया है। जो कोई भी—चाहे वह पुरुष हो या स्त्री—ईमान की स्थिति में नेक कर्म करेगा, अल्लाह उसे दुनिया में पवित्र और सुखमय जीवन प्रदान करेगा। यह "पवित्र जीवन" केवल धन-दौलत या ऐश्वर्य से नहीं है, बल्कि इसका अर्थ है: दिल का संतोष, अल्लाह की क़ज़ा (तक़दीर) पर रज़ामंदी, क़नाअत (संतोष), हलाल रिज़्क़, और नेक कार्यों के लिए तौफ़ीक़। ऐसा व्यक्ति कम माल वाला भी हो सकता है, लेकिन उसका दिल अमीर होता है, उसकी ज़िंदगी में बरकत होती है और उसे सुकून मिलता है। फिर अल्लाह ने आख़िरत का भी वादा किया है कि वह उन्हें उनके सर्वोत्तम कर्मों के अनुसार पूरा-पूरा बदला देगा, यानी उनकी छोटी से छोटी नेकी को भी बड़ा करके उसका अज्र अता करेगा। यह अल्लाह का अत्यंत उदार पुरस्कार है।
फ़ायदे (लाभ):
यह आयत सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और इनाम में पुरुष और स्त्री के बीच कोई भेदभाव नहीं है—दोनों को समान अवसर और समान प्रतिफल मिलेगा।
सच्ची खुशी और सुकून का रास्ता केवल ईमान और नेक कर्म हैं, न कि दौलत या ओहदा। यही वह चीज़ है जो इंसान को मुश्किलों में भी शांत रखती है।
यह आयत मुसलमानों को उत्साहित करती है कि वे अपने कर्मों की गुणवत्ता पर ध्यान दें, क्योंकि अल्लाह सबसे अच्छे कर्म के अनुसार बदला देगा—यह अल्लाह की ओर से एक बड़ी उदारता है।
इस आयत से यह भी पता चलता है कि नेक कर्म का सच्चा फल आख़िरत में मिलेगा, जो कभी ख़त्म नहीं होगा, इसलिए इंसान को दुनिया के अस्थायी सुखों के पीछे नहीं भागना चाहिए।
(क्योंकि माल दुनिया से) जो कुछ तुम्हारे पास है एक न एक दिन ख़त्म हो जाएगा और (अज्र) ख़ुदा के पास है वह हमेशा बाक़ी रहेगा और जिन लोगों ने दुनिया में सब्र किया था उनको (क़यामत में) उनके कामों का हम अच्छे से अच्छा अज्र व सवाब अता करेंगें
मर्द हो या औरत जो शख़्श नेक काम करेगा और वह ईमानदार भी हो तो हम उसे (दुनिया में भी) पाक व पाकीज़ा जिन्दगी बसर कराएँगें और (आख़िरत में भी) जो कुछ वह करते थे उसका अच्छे से अच्छा अज्र व सवाब अता फरमाएँगें
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