अन-नहल · 97/128
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नहल
مَنْ عَمِلَ صَالِحًا مِّن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَلَنُحْيِيَنَّهُ حَيَاةً طَيِّبَةً ۖ وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ أَجْرَهُم بِأَحْسَنِ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ ۝٩٧
Man `amila saaliham min zakarin aw unsaa wa huwa mu`minun falanuhyiyannahoo hayaatan taiiyibatanw wa lanajzi yannnahum ajrahum bi ahsani maa kaanoo ya`maloon
📖 हिंदी अर्थ
मर्द हो या औरत जो शख़्श नेक काम करेगा और वह ईमानदार भी हो तो हम उसे (दुनिया में भी) पाक व पाकीज़ा जिन्दगी बसर कराएँगें और (आख़िरत में भी) जो कुछ वह करते थे उसका अच्छे से अच्छा अज्र व सवाब अता फरमाएँगें

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • صَالِحًا (सालिहन): अच्छा कर्म, जो शरीयत के अनुसार हो।
  • حَيَاةً طَيِّبَةً (हयातन तय्यिबह): पवित्र एवं सुखमय जीवन।
  • أَحْسَنِ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ (अहसनि मा कानू यअ्मलून): उनके सर्वोत्तम कर्मों के अनुरूप।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उस महान वादे को बयान करती है जो अल्लाह ने अपने ईमानवाले बंदों से किया है। जो कोई भी—चाहे वह पुरुष हो या स्त्री—ईमान की स्थिति में नेक कर्म करेगा, अल्लाह उसे दुनिया में पवित्र और सुखमय जीवन प्रदान करेगा। यह "पवित्र जीवन" केवल धन-दौलत या ऐश्वर्य से नहीं है, बल्कि इसका अर्थ है: दिल का संतोष, अल्लाह की क़ज़ा (तक़दीर) पर रज़ामंदी, क़नाअत (संतोष), हलाल रिज़्क़, और नेक कार्यों के लिए तौफ़ीक़। ऐसा व्यक्ति कम माल वाला भी हो सकता है, लेकिन उसका दिल अमीर होता है, उसकी ज़िंदगी में बरकत होती है और उसे सुकून मिलता है। फिर अल्लाह ने आख़िरत का भी वादा किया है कि वह उन्हें उनके सर्वोत्तम कर्मों के अनुसार पूरा-पूरा बदला देगा, यानी उनकी छोटी से छोटी नेकी को भी बड़ा करके उसका अज्र अता करेगा। यह अल्लाह का अत्यंत उदार पुरस्कार है।

फ़ायदे (लाभ):

  1. यह आयत सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और इनाम में पुरुष और स्त्री के बीच कोई भेदभाव नहीं है—दोनों को समान अवसर और समान प्रतिफल मिलेगा।
  2. सच्ची खुशी और सुकून का रास्ता केवल ईमान और नेक कर्म हैं, न कि दौलत या ओहदा। यही वह चीज़ है जो इंसान को मुश्किलों में भी शांत रखती है।
  3. यह आयत मुसलमानों को उत्साहित करती है कि वे अपने कर्मों की गुणवत्ता पर ध्यान दें, क्योंकि अल्लाह सबसे अच्छे कर्म के अनुसार बदला देगा—यह अल्लाह की ओर से एक बड़ी उदारता है।
  4. इस आयत से यह भी पता चलता है कि नेक कर्म का सच्चा फल आख़िरत में मिलेगा, जो कभी ख़त्म नहीं होगा, इसलिए इंसान को दुनिया के अस्थायी सुखों के पीछे नहीं भागना चाहिए।


📜 आयत 95-99 — सूरा अन-नहल

95وَلَا تَشْتَرُوا بِعَهْدِ اللَّهِ ثَمَنًا قَلِيلًا ۚ إِنَّمَا عِندَ اللَّهِ هُوَ خَيْرٌ لَّكُمْ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
और ख़ुदा के एहदो पैमान के बदले थोड़ी क़ीमत (दुनयावी नफा) न लो अगर तुम जानते (बूझते) हो तो (समझ लो कि) जो कुछ ख़ुदा के पास है वह उससे कहीं बेहतर है
96مَا عِندَكُمْ يَنفَدُ ۖ وَمَا عِندَ اللَّهِ بَاقٍ ۗ وَلَنَجْزِيَنَّ الَّذِينَ صَبَرُوا أَجْرَهُم بِأَحْسَنِ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
(क्योंकि माल दुनिया से) जो कुछ तुम्हारे पास है एक न एक दिन ख़त्म हो जाएगा और (अज्र) ख़ुदा के पास है वह हमेशा बाक़ी रहेगा और जिन लोगों ने दुनिया में सब्र किया था उनको (क़यामत में) उनके कामों का हम अच्छे से अच्छा अज्र व सवाब अता करेंगें
97مَنْ عَمِلَ صَالِحًا مِّن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَلَنُحْيِيَنَّهُ حَيَاةً طَيِّبَةً ۖ وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ أَجْرَهُم بِأَحْسَنِ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
मर्द हो या औरत जो शख़्श नेक काम करेगा और वह ईमानदार भी हो तो हम उसे (दुनिया में भी) पाक व पाकीज़ा जिन्दगी बसर कराएँगें और (आख़िरत में भी) जो कुछ वह करते थे उसका अच्छे से अच्छा अज्र व सवाब अता फरमाएँगें
98فَإِذَا قَرَأْتَ الْقُرْآنَ فَاسْتَعِذْ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ
और जब तुम क़ुरान पढ़ने लगो तो शैतान मरदूद (के वसवसो) से ख़ुदा की पनाह तलब कर लिया करो
99إِنَّهُ لَيْسَ لَهُ سُلْطَانٌ عَلَى الَّذِينَ آمَنُوا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ
इसमें शक नहीं कि जो लोग ईमानदार हैं और अपने परवरदिगार पर भरोसा रखते हैं उन पर उसका क़ाबू नहीं चलता
अन-नहलकुरान सूची
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मक्कीअवतरण स्थान
97आयत

अनुवाद — अन-नहल 97

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Monday, September 28, 2026

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