अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَإِذَا قَرَأْتَ الْقُرْآنَ: जब आप क़ुरआन पढ़ने का इरादा करें (यहाँ "पढ़ना" से अभिप्राय "पढ़ने का इरादा करना" है, जैसा कि अधिकांश मुफ़स्सिरीन ने बयान किया है)।
- فَاسْتَعِذْ بِاللّهِ: तो अल्लाह से पनाह माँगें।
- الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ: शैतान से जो अल्लाह की रहमत से मरदूद (निकाला हुआ) है।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ ईमान वाले! जब आप क़ुरआन मजीद की कोई भी आयत या सूरह पढ़ने का इरादा करें, तो सबसे पहले अल्लाह से शैतान के शर से पनाह माँगें। यह पनाह माँगना ज़ुबान से "أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ" (मैं अल्लाह की पनाह चाहता हूँ मरदूद शैतान से) कहकर किया जाता है। इसका कारण यह है कि शैतान इंसान का खुला दुश्मन है और वह हर संभव कोशिश करता है कि इंसान को क़ुरआन पढ़ने, समझने और उस पर अमल करने से रोके। वह पढ़ने के दौरान दिल में वसवसे (बुरे ख़यालात) डालता है, ताकि इंसान का ध्यान भटके और उसे क़ुरआन से वह फ़ायदा न मिल सके जो अल्लाह ने उसमें रखा है। इसलिए अल्लाह ने हुक्म दिया कि क़ुरआन पढ़ने से पहले उसी से पनाह माँगी जाए, क्योंकि वही शैतान के शर से बचाने वाला है। यह आदेश हर उस शख़्स के लिए है जो क़ुरआन पढ़ना चाहता है, चाहे वह पढ़ना सीखने के लिए हो या तिलावत के लिए या किसी और मक़सद से।
फ़ायदे (सबक़ और नसीहतें):
- अल्लाह पर भरोसा: इस आयत से हमें सीख मिलती है कि हर अच्छे काम की शुरुआत अल्लाह के नाम और उसकी पनाह से करनी चाहिए। क़ुरआन जैसी अज़ीमुश्शान किताब पढ़ने से पहले भी अल्लाह की पनाह लेना सिखाया गया, ताकि हमें उसका पूरा फ़ायदा मिल सके।
- शैतान से हमेशा सावधानी: यह आयत हमें याद दिलाती है कि शैतान हमारा पुराना और पक्का दुश्मन है। वह हमें अच्छे कामों से रोकने की कोशिश करता है, इसलिए हमें हर अच्छे काम से पहले अल्लाह से पनाह माँगनी चाहिए।
- क़ुरआन की अहमियत: क़ुरआन पढ़ने के लिए अलग से पनाह माँगने का हुक्म इस बात की दलील है कि क़ुरआन पढ़ना कितनी बड़ी नेमत और इबादत है। शैतान इस इबादत में खलल डालने की कोशिश करता है, इसलिए अल्लाह ने हमें यह हथियार दिया है।
- इस्लाम की आसानी: इस्लाम में हर अच्छे काम के लिए रहनुमाई की गई है। यहाँ तक कि क़ुरआन पढ़ने की शुरुआत का तरीक़ा भी सिखाया गया है, ताकि इंसान हर हाल में अल्लाह की रहमत और हिफ़ाज़त में रहे।
- अल्लाह की रहमत की उम्मीद: जब हम अल्लाह से पनाह माँगते हैं, तो यह अल्लाह की रहमत और क़ुदरत पर भरोसे का इज़हार है। यह हमें सिखाता है कि हर मुश्किल में अल्लाह ही सहारा है और वही हमें हर बुराई से बचा सकता है।
📜 आयत 96-100 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 98
सूरा अन-नहल आयत 98 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब तुम क़ुरान पढ़ने लगो तो शैतान मरदूद (के…सूरा आयत 98/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 96–100. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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