अल-इसरा · 9/111
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-इसरा
إِنَّ هَٰذَا الْقُرْآنَ يَهْدِي لِلَّتِي هِيَ أَقْوَمُ وَيُبَشِّرُ الْمُؤْمِنِينَ الَّذِينَ يَعْمَلُونَ الصَّالِحَاتِ أَنَّ لَهُمْ أَجْرًا كَبِيرًا ۝٩
Inna haazal Quraana yahdee lillatee hiya aqwamu wa yubashshirul mu`mineenal lazeena ya`maloonas saalihaati anna lahum ajran kabeeraa
📖 हिंदी अर्थ
इसमें शक़ नहीं कि ये क़ुरान उस राह की हिदायत करता है जो सबसे ज्यादा सीधी है और जो ईमानदार अच्छे अच्छे काम करते हैं उनको ये खुशख़बरी देता है कि उनके लिए बहुत बड़ा अज्र और सवाब (मौजूद) है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَهْدِي: मार्गदर्शन करता है, रास्ता दिखाता है।
  • لِلَّتِي هِيَ أَقْوَمُ: उस (राह) की ओर जो सबसे अधिक सीधी, सही और स्थिर है।
  • يُبَشِّرُ: खुशखबरी देता है।
  • الصَّالِحَاتِ: अच्छे और नेक कार्य, जो अल्लाह की रज़ा के अनुसार हों।
  • أَجْرًا كَبِيرًا: बहुत बड़ा बदला और इनाम।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत बताती है कि यह क़ुरआन, जो अल्लाह ने अपने नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर उतारा है, इंसानों को सबसे अच्छे और सबसे सीधे रास्ते की ओर मार्गदर्शन करता है। वह रास्ता इस्लाम है, जो अल्लाह की इबादत, अच्छे आचरण और नेकियों पर चलने की शिक्षा देता है। यह क़ुरआन सिर्फ़ रास्ता ही नहीं दिखाता, बल्कि उन लोगों को खुशखबरी भी देता है जो अल्लाह पर ईमान रखते हैं और अच्छे काम करते हैं—जैसे नमाज़ पढ़ना, ज़कात देना, सच बोलना, माता-पिता का सम्मान करना और दूसरों के साथ भलाई करना—कि उनके लिए अल्लाह के पास बहुत बड़ा इनाम और बदला तैयार है। यह बदला दुनिया की किसी भी चीज़ से बेहतर और हमेशा रहने वाला है। यानी क़ुरआन दो काम करता है: एक तरफ़ वह सही रास्ता दिखाता है, और दूसरी तरफ़ नेक लोगों को जन्नत और अल्लाह की रहमत की खुशखबरी देता है।

फ़ायदे (सबक):

  1. क़ुरआन सिर्फ़ एक किताब नहीं, बल्कि ज़िंदगी का पूरा नक्शा है। जो इसे पढ़ता और समझता है, उसे हर मामले में सबसे अच्छा रास्ता मिल जाता है।
  2. अल्लाह ने क़ुरआन को इसलिए भेजा ताकि हम अपनी ज़िंदगी को सही तरीके से चलाएँ और दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।
  3. ईमान और अच्छे काम साथ-साथ चलते हैं। सिर्फ़ ईमान काफ़ी नहीं, बल्कि अच्छे काम करने भी ज़रूरी हैं।
  4. अल्लाह अपने नेक बंदों को कभी निराश नहीं करता। उनके लिए बहुत बड़ा इनाम तैयार है, जो दुनिया की किसी भी चीज़ से बेहतर है।
  5. यह आयत हमें उम्मीद देती है कि अगर हम सच्चे दिल से अल्लाह पर भरोसा करें और अच्छे काम करते रहें, तो हमारा भविष्य उज्ज्वल है, चाहे दुनिया में मुश्किलें ही क्यों न हों।


📜 आयत 7-11 — सूरा अल-इसरा

7إِنْ أَحْسَنتُمْ أَحْسَنتُمْ لِأَنفُسِكُمْ ۖ وَإِنْ أَسَأْتُمْ فَلَهَا ۚ فَإِذَا جَاءَ وَعْدُ الْآخِرَةِ لِيَسُوءُوا وُجُوهَكُمْ وَلِيَدْخُلُوا الْمَسْجِدَ كَمَا دَخَلُوهُ أَوَّلَ مَرَّةٍ وَلِيُتَبِّرُوا مَا عَلَوْا تَتْبِيرًا
अगर तुम अच्छे काम करोगे तो अपने फायदे के लिए अच्छे काम करोगे और अगर तुम बुरे काम करोगे तो (भी) अपने ही लिए फिर जब दूसरे वक्त क़ा वायदा आ पहुँचा तो (हमने तैतूस रोगी को तुम पर मुसल्लत किया) ताकि वह लोग (मारते मारते) तुम्हारे चेहरे बिगाड़ दें (कि पहचाने न जाओ) और जिस तरह पहली दफा मस्जिद बैतुल मुक़द्दस में घुस गये थे उसी तरह फिर घुस पड़ें और जिस चीज़ पर क़ाबू पाए खूब अच्छी तरह बरबाद कर दी
8عَسَىٰ رَبُّكُمْ أَن يَرْحَمَكُمْ ۚ وَإِنْ عُدتُّمْ عُدْنَا ۘ وَجَعَلْنَا جَهَنَّمَ لِلْكَافِرِينَ حَصِيرًا
(अब भी अगर तुम चैन से रहो तो) उम्मीद है कि तुम्हारा परवरदिगार तुम पर तरस खाए और अगर (कहीं) वही शरारत करोगे तो हम भी फिर पकड़ेंगे और हमने तो काफिरों के लिए जहन्नुम को क़ैद खाना बना ही रखा है
9إِنَّ هَٰذَا الْقُرْآنَ يَهْدِي لِلَّتِي هِيَ أَقْوَمُ وَيُبَشِّرُ الْمُؤْمِنِينَ الَّذِينَ يَعْمَلُونَ الصَّالِحَاتِ أَنَّ لَهُمْ أَجْرًا كَبِيرًا
इसमें शक़ नहीं कि ये क़ुरान उस राह की हिदायत करता है जो सबसे ज्यादा सीधी है और जो ईमानदार अच्छे अच्छे काम करते हैं उनको ये खुशख़बरी देता है कि उनके लिए बहुत बड़ा अज्र और सवाब (मौजूद) है
10وَأَنَّ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ أَعْتَدْنَا لَهُمْ عَذَابًا أَلِيمًا
और ये भी कि बेशक जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते हैं उनके लिए हमने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है
11وَيَدْعُ الْإِنسَانُ بِالشَّرِّ دُعَاءَهُ بِالْخَيْرِ ۖ وَكَانَ الْإِنسَانُ عَجُولًا
और आदमी कभी (आजिज़ होकर अपने हक़ में) बुराई (अज़ाब वग़ैरह की दुआ) इस तरह माँगता है जिस तरह अपने लिए भलाई की दुआ करता है और आदमी तो बड़ा जल्दबाज़ है
अल-इसराकुरान सूची
111आयत
मक्कीअवतरण स्थान
9आयत

अनुवाद — अल-इसरा 9

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Tuesday, September 29, 2026

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