अल-इसरा · 10/111
अनुवाद उच्चारण — अल-इसरा
وَأَنَّ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ أَعْتَدْنَا لَهُمْ عَذَابًا أَلِيمًا ۝١٠
Wa annal lazeena laa yu`minoona bil aakhirati a`tadnaa lahum `azaaban aleemaa
📖 हिंदी अर्थ
और ये भी कि बेशक जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते हैं उनके लिए हमने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ: जो आख़िरत (परलोक) पर ईमान नहीं रखते।
  • أَعْتَدْنَا: हमने तैयार कर रखा है।
  • عَذَابًا أَلِيمًا: दर्दनाक (बहुत तकलीफ़ देने वाला) अज़ाब।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो लोग आख़िरत (क़यामत के दिन) पर ईमान नहीं रखते, यानी जो मरने के बाद जी उठने, हिसाब-किताब, जन्नत और जहन्नम को नहीं मानते, उनके लिए हमने बहुत ही दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है। यह अज़ाब जहन्नम की आग है, जो उनके इनकार और अविश्वास की सज़ा होगी। यह बात उन लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी है जो दुनिया को ही सब कुछ समझ बैठते हैं और आख़िरत के मामले को भूल जाते हैं या उसे झुठलाते हैं। साथ ही, यह मोमिनीन के लिए एक ख़ुशख़बरी भी है कि जो लोग ईमान लाए और अच्छे काम किए, उनके लिए बड़ा अज्र (इनाम) है, और जो काफ़िर हैं, उनके लिए इसी तरह की सख़्त सज़ा है। अल्लाह ने यह क़ुरआन इसलिए उतारा कि लोगों को सबसे अच्छा रास्ता दिखाए, और वह रास्ता इस्लाम है। जो लोग इस रास्ते पर चलेंगे, उन्हें अल्लाह की रहमत और जन्नत मिलेगी, और जो इससे मुँह मोड़ेंगे, उनके लिए दर्दनाक अज़ाब तैयार है।

फ़ायदे:

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि आख़िरत पर ईमान रखना कितना ज़रूरी है। जो लोग इस पर ईमान नहीं रखते, वे सबसे बड़े नुक़सान में हैं, क्योंकि उनका अंजाम बहुत बुरा है।
  2. अल्लाह का इंसाफ़ बिल्कुल कामिल है — वह नेक लोगों को उनके अच्छे कामों का बदला देगा और बुरे लोगों को उनकी बुराई की सज़ा। यह चीज़ हमें अच्छे काम करने की तरफ़ राग़िब करती है।
  3. यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन सिर्फ़ एक किताब नहीं, बल्कि हिदायत का ज़रिया है जो इंसान को सबसे अच्छे रास्ते पर चलाता है। जो इसे अपनाएगा, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होगा।
  4. मोमिन के लिए यह बात तसल्ली का ज़रिया है कि उसका रब उसके साथ है, और उसके दुश्मनों (काफ़िरों) के लिए अज़ाब तैयार है। इससे मोमिन का दिल मज़बूत होता है और वह अल्लाह पर भरोसा रखता है।
  5. यह आयत हमें याद दिलाती है कि दुनिया की ज़िंदगी आख़िरी नहीं है; असली ज़िंदगी आख़िरत की है। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाना चाहिए, ताकि उस दिन हम कामयाब हों।


📜 आयत 8-12 — अल-इसरा

8عَسَىٰ رَبُّكُمْ أَن يَرْحَمَكُمْ ۚ وَإِنْ عُدتُّمْ عُدْنَا ۘ وَجَعَلْنَا جَهَنَّمَ لِلْكَافِرِينَ حَصِيرًا
(अब भी अगर तुम चैन से रहो तो) उम्मीद है कि तुम्हारा परवरदिगार तुम पर तरस खाए और अगर (कहीं) वही शरारत करोगे तो हम भी फिर पकड़ेंगे और हमने तो काफिरों के लिए जहन्नुम को क़ैद खाना बना ही रखा है
9إِنَّ هَٰذَا الْقُرْآنَ يَهْدِي لِلَّتِي هِيَ أَقْوَمُ وَيُبَشِّرُ الْمُؤْمِنِينَ الَّذِينَ يَعْمَلُونَ الصَّالِحَاتِ أَنَّ لَهُمْ أَجْرًا كَبِيرًا
इसमें शक़ नहीं कि ये क़ुरान उस राह की हिदायत करता है जो सबसे ज्यादा सीधी है और जो ईमानदार अच्छे अच्छे काम करते हैं उनको ये खुशख़बरी देता है कि उनके लिए बहुत बड़ा अज्र और सवाब (मौजूद) है
10وَأَنَّ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ أَعْتَدْنَا لَهُمْ عَذَابًا أَلِيمًا
और ये भी कि बेशक जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते हैं उनके लिए हमने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है
11وَيَدْعُ الْإِنسَانُ بِالشَّرِّ دُعَاءَهُ بِالْخَيْرِ ۖ وَكَانَ الْإِنسَانُ عَجُولًا
और आदमी कभी (आजिज़ होकर अपने हक़ में) बुराई (अज़ाब वग़ैरह की दुआ) इस तरह माँगता है जिस तरह अपने लिए भलाई की दुआ करता है और आदमी तो बड़ा जल्दबाज़ है
12وَجَعَلْنَا اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ آيَتَيْنِ ۖ فَمَحَوْنَا آيَةَ اللَّيْلِ وَجَعَلْنَا آيَةَ النَّهَارِ مُبْصِرَةً لِّتَبْتَغُوا فَضْلًا مِّن رَّبِّكُمْ وَلِتَعْلَمُوا عَدَدَ السِّنِينَ وَالْحِسَابَ ۚ وَكُلَّ شَيْءٍ فَصَّلْنَاهُ تَفْصِيلًا
और हमने रात और दिन को (अपनी क़ुदरत की) दो निशानियाँ क़रार दिया फिर हमने रात की निशानी (चाँद) को धुँधला बनाया और दिन की निशानी (सूरज) को रौशन बनाया (कि सब चीज़े दिखाई दें) ताकि तुम लोग अपने परवरदिगार का फज़ल ढूँढते फिरों और ताकि तुम बरसों की गिनती और हिसाब को जानो (बूझों) और हमने हर चीज़ को खूब अच्छी तरह तफसील से बयान कर दिया है
अल-इसराकुरान सूची
111आयत
मक्कीRevelation
10आयत

अनुवाद — अल-इसरा 10

सूरा अल-इसरा आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये भी कि बेशक जो लोग आख़िरत पर ईमान…

सूरा आयत 10/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए