अल-कहफ · 46/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
الْمَالُ وَالْبَنُونَ زِينَةُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَالْبَاقِيَاتُ الصَّالِحَاتُ خَيْرٌ عِندَ رَبِّكَ ثَوَابًا وَخَيْرٌ أَمَلًا ۝٤٦
Almaalu walbanoona zeenatul hayaatid dunya wal baaqiyaatus saalihaatu khairun `inda Rabbika sawaabanw wa khairun amalaa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) माल और औलाद (इस ज़रा सी) दुनिया की ज़िन्दगी की ज़ीनत हैं और बाक़ी रहने वाली नेकियाँ तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक सवाब में उससे कही ज्यादा अच्छी हैं और तमन्नाएँ व आरजू की राह से (भी) बेहतर हैं

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अल-मालु वल-बनून: धन और संतान।
  • ज़ीनतु अल-हयात अद-दुन्या: सांसारिक जीवन की शोभा और सजावट।
  • अल-बाक़ियातु अस-सालिहात: स्थायी और शाश्वत अच्छे कर्म, विशेष रूप से तस्बीह (सुब्हानअल्लाह), तहमीद (अल्हम्दुलिल्लाह), तकबीर (अल्लाहु अकबर), तहलील (ला इलाहा इल्लल्लाह) और 'ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह' जैसे वाक्य।
  • थवाबन: बदले या पुरस्कार के रूप में।
  • अमलन: आशा या वह चीज़ जिसकी मनुष्य को उम्मीद हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में हमें एक बहुत बड़ी सच्चाई समझा रहे हैं। धन और संतान—ये दोनों चीज़ें इस दुनिया की ज़िंदगी की शोभा और सजावट हैं। इन्हीं पर लोग फ़ख़्र करते हैं, इन्हीं को अपनी ताक़त समझते हैं, और इन्हीं के दम पर दूसरों से बढ़ने का दावा करते हैं। लेकिन यह सब कुछ फ़ानी (नाशवान) है। यह दुनिया ख़त्म होने वाली है, और यह सारी शोभा एक दिन मिट्टी में मिल जाएगी। धन और संतान का कोई फ़ायदा आख़िरत में नहीं होगा, सिवाय उस धन के जो अल्लाह की राह में ख़र्च किया जाए और उस संतान के जो नेक और सालिह हो।

इसके विपरीत, "अल-बाक़ियातु अस-सालिहात" यानी वे अच्छे कर्म और पाक वाक्य जो अल्लाह की रज़ा के लिए किए जाएँ—जैसे सुब्हानअल्लाह, अल्हम्दुलिल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाह, अल्लाहु अकबर, और ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह—ये स्थायी हैं। ये कभी ख़त्म नहीं होते। ये आपके रब के पास बेहतर हैं, थवाब (पुरस्कार) के लिहाज़ से भी और आशा के लिहाज़ से भी। यानी जो इंसान इन अच्छे कर्मों को अपनाता है, उसे आख़िरत में वह कुछ मिलता है जिसकी उसे उम्मीद थी, और उसका अंजाम भी बेहतरीन होता है।


दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि दुनिया की चमक-दमक पर दिल मत लगाओ। धन और संतान अल्लाह की नेमत हैं, लेकिन इन्हें अपना निशाना मत बनाओ। असली कामयाबी उस इंसान की है जो अपने रब की याद में जिए, उसके हुक्मों पर अमल करे, और अपने अच्छे कर्मों को जमा करता रहे। याद रखो, यह दुनिया एक दिन ख़त्म हो जाएगी, लेकिन अच्छे कर्मों का सिला कभी ख़त्म नहीं होगा। इसलिए अपनी ज़िंदगी को ऐसे कर्मों से भर दो जो आख़िरत में तुम्हारे काम आएँ, और अल्लाह से उस चीज़ की उम्मीद रखो जो हमेशा रहने वाली है—जन्नत और उसकी रज़ा। यही सबसे बड़ी कामयाबी है।



📜 आयत 44-48 — अल-कहफ

44هُنَالِكَ الْوَلَايَةُ لِلَّهِ الْحَقِّ ۚ هُوَ خَيْرٌ ثَوَابًا وَخَيْرٌ عُقْبًا
कि सरपरस्ती ख़ास ख़ुदा ही के लिए है जो सच्चा है वही बेहतर सवाब (देने) वाला है और अन्जाम के जंगल से भी वही बेहतर है
45وَاضْرِبْ لَهُم مَّثَلَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا كَمَاءٍ أَنزَلْنَاهُ مِنَ السَّمَاءِ فَاخْتَلَطَ بِهِ نَبَاتُ الْأَرْضِ فَأَصْبَحَ هَشِيمًا تَذْرُوهُ الرِّيَاحُ ۗ وَكَانَ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ مُّقْتَدِرًا
और (ऐ रसूल) इनसे दुनिया की ज़िन्दगी की मसल भी बयान कर दो कि उसके हालत पानी की सी है जिसे हमने आसमान से बरसाया तो ज़मीन की उगाने की ताक़त उसमें मिल गई और (खूब फली फूली) फिर आख़िर रेज़ा रेज़ा (भूसा) हो गई कि उसको हवाएँ उड़ाए फिरती है और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
46الْمَالُ وَالْبَنُونَ زِينَةُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَالْبَاقِيَاتُ الصَّالِحَاتُ خَيْرٌ عِندَ رَبِّكَ ثَوَابًا وَخَيْرٌ أَمَلًا
(ऐ रसूल) माल और औलाद (इस ज़रा सी) दुनिया की ज़िन्दगी की ज़ीनत हैं और बाक़ी रहने वाली नेकियाँ तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक सवाब में उससे कही ज्यादा अच्छी हैं और तमन्नाएँ व आरजू की राह से (भी) बेहतर हैं
47وَيَوْمَ نُسَيِّرُ الْجِبَالَ وَتَرَى الْأَرْضَ بَارِزَةً وَحَشَرْنَاهُمْ فَلَمْ نُغَادِرْ مِنْهُمْ أَحَدًا
और (उस दिन से डरो) जिस दिन हम पहाड़ों को चलाएँगें और तुम ज़मीन को खुला मैदान (पहाड़ों से) खाली देखोगे और हम इन सभी को इकट्ठा करेगे तो उनमें से एक को न छोड़ेगें
48وَعُرِضُوا عَلَىٰ رَبِّكَ صَفًّا لَّقَدْ جِئْتُمُونَا كَمَا خَلَقْنَاكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍ ۚ بَلْ زَعَمْتُمْ أَلَّن نَّجْعَلَ لَكُم مَّوْعِدًا
सबके सब तुम्हारे परवरदिगार के सामने कतार पे क़तार पेश किए जाएँगें और (उस वक्त हम याद दिलाएँगे कि जिस तरह हमने तुमको पहली बार पैदा किया था (उसी तरह) तुम लोगों को (आख़िर) हमारे पास आना पड़ा मगर तुम तो ये ख्याल करते थे कि हम तुम्हारे (दोबारा पैदा करने के) लिए कोई वक्त ही न ठहराएँगें
अल-कहफकुरान सूची
110आयत
मक्कीRevelation
46आयत

अनुवाद — अल-कहफ 46

सूरा अल-कहफ आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) माल और औलाद (इस ज़रा सी) दुनिया की…

सूरा आयत 46/110 — अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-कहफ सुनें, अल-कहफ अनुवाद, अल-कहफ mp3, अल-कहफ pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए