अल-कहफ · 47/110
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-कहफ
وَيَوْمَ نُسَيِّرُ الْجِبَالَ وَتَرَى الْأَرْضَ بَارِزَةً وَحَشَرْنَاهُمْ فَلَمْ نُغَادِرْ مِنْهُمْ أَحَدًا ۝٤٧
Wa yawma nusaiyirul jibaala wa taral arda baariza tanw wa hasharnaahum falam nughaadir minhum ahadaa
📖 हिंदी अर्थ
और (उस दिन से डरो) जिस दिन हम पहाड़ों को चलाएँगें और तुम ज़मीन को खुला मैदान (पहाड़ों से) खाली देखोगे और हम इन सभी को इकट्ठा करेगे तो उनमें से एक को न छोड़ेगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نُسَيِّرُ الْجِبَالَ — हम पहाड़ों को चलाएँगे (उन्हें उनके स्थानों से हटा देंगे)।
  • بَارِزَةً — खुली हुई, स्पष्ट, बिना किसी आवरण के।
  • حَشَرْنَاهُمْ — हमने उन्हें (सभी प्राणियों को) इकट्ठा किया।
  • نُغَادِرَ — हम छोड़ेंगे, पीछे छोड़ देंगे।

विस्तृत तफ़सीर:

ऐ नबी! आप लोगों को उस दिन की याद दिलाएँ जब हम पहाड़ों को उनके स्थानों से उखाड़कर उन्हें बादलों की तरह चलाएँगे, और वे रेत के ढेरों की तरह बिखर जाएँगे। उस दिन तुम पृथ्वी को बिल्कुल समतल और खुली हुई देखोगे — न उस पर कोई पहाड़ होगा, न पेड़, न इमारतें, न कोई आड़ — सब कुछ मिट चुका होगा। यह दृश्य उस महान शक्ति को दर्शाएगा जो कभी पहाड़ों को सजाकर रखती थी और अब उन्हें बिखेर देगी।

फिर हम सभी प्राणियों को — चाहे वे पहले गुज़रे हों या बाद में आएँ — एक ही मैदान में इकट्ठा करेंगे। कोई भी व्यक्ति, कोई भी जीव, कोई भी चीज़ हमारी पकड़ से बाहर नहीं होगी। हर एक को उसके कर्मों का हिसाब देने के लिए उपस्थित किया जाएगा। यहाँ तक कि जो लोग क़ब्रों में दफ़न थे, वे भी अपनी क़ब्रों से निकलकर उठ खड़े होंगे। कोई नहीं बचेगा, कोई छूटेगा नहीं — न छोटा, न बड़ा, न अमीर, न ग़रीब।

यह दिन उस न्याय का दिन है जिसका वादा अल्लाह ने किया है। जिस दिन सारी दुनिया की सत्ता और ताकतें मिट जाएँगी, केवल अल्लाह की सत्ता शेष रहेगी। यह दृश्य हमें याद दिलाता है कि यह दुनिया का जीवन अस्थायी है — इसके पहाड़, इसकी इमारतें, इसकी ताकतें — सब कुछ एक दिन मिट जाएगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने जीवन को उस स्थायी जीवन के लिए तैयार करें, अच्छे कर्म करें और अल्लाह की रहमत के पात्र बनें।

यह आयत हमें उस दिन की गंभीरता का एहसास कराती है जब हर व्यक्ति को उसके अच्छे और बुरे कर्मों का सामना करना होगा। जो लोग इस दुनिया में अल्लाह की इबादत करते हैं और उसके आदेशों का पालन करते हैं, उनके लिए उस दिन खुशखबरी है — वे जन्नत में दाखिल होंगे। और जो लोग अल्लाह को भूलकर दुनिया के मोह में डूबे रहे, उनके लिए वह दिन बड़ा कठिन होगा। आइए, हम इस दिन की तैयारी करें — अपने दिलों को अल्लाह की याद से जोड़ें, अपने कर्मों को सुधारें, और अपने जीवन को उसकी रज़ा के अनुसार ढालें। यही सफलता का मार्ग है।



📜 आयत 45-49 — सूरा अल-कहफ

45وَاضْرِبْ لَهُم مَّثَلَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا كَمَاءٍ أَنزَلْنَاهُ مِنَ السَّمَاءِ فَاخْتَلَطَ بِهِ نَبَاتُ الْأَرْضِ فَأَصْبَحَ هَشِيمًا تَذْرُوهُ الرِّيَاحُ ۗ وَكَانَ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ مُّقْتَدِرًا
और (ऐ रसूल) इनसे दुनिया की ज़िन्दगी की मसल भी बयान कर दो कि उसके हालत पानी की सी है जिसे हमने आसमान से बरसाया तो ज़मीन की उगाने की ताक़त उसमें मिल गई और (खूब फली फूली) फिर आख़िर रेज़ा रेज़ा (भूसा) हो गई कि उसको हवाएँ उड़ाए फिरती है और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
46الْمَالُ وَالْبَنُونَ زِينَةُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَالْبَاقِيَاتُ الصَّالِحَاتُ خَيْرٌ عِندَ رَبِّكَ ثَوَابًا وَخَيْرٌ أَمَلًا
(ऐ रसूल) माल और औलाद (इस ज़रा सी) दुनिया की ज़िन्दगी की ज़ीनत हैं और बाक़ी रहने वाली नेकियाँ तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक सवाब में उससे कही ज्यादा अच्छी हैं और तमन्नाएँ व आरजू की राह से (भी) बेहतर हैं
47وَيَوْمَ نُسَيِّرُ الْجِبَالَ وَتَرَى الْأَرْضَ بَارِزَةً وَحَشَرْنَاهُمْ فَلَمْ نُغَادِرْ مِنْهُمْ أَحَدًا
और (उस दिन से डरो) जिस दिन हम पहाड़ों को चलाएँगें और तुम ज़मीन को खुला मैदान (पहाड़ों से) खाली देखोगे और हम इन सभी को इकट्ठा करेगे तो उनमें से एक को न छोड़ेगें
48وَعُرِضُوا عَلَىٰ رَبِّكَ صَفًّا لَّقَدْ جِئْتُمُونَا كَمَا خَلَقْنَاكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍ ۚ بَلْ زَعَمْتُمْ أَلَّن نَّجْعَلَ لَكُم مَّوْعِدًا
सबके सब तुम्हारे परवरदिगार के सामने कतार पे क़तार पेश किए जाएँगें और (उस वक्त हम याद दिलाएँगे कि जिस तरह हमने तुमको पहली बार पैदा किया था (उसी तरह) तुम लोगों को (आख़िर) हमारे पास आना पड़ा मगर तुम तो ये ख्याल करते थे कि हम तुम्हारे (दोबारा पैदा करने के) लिए कोई वक्त ही न ठहराएँगें
49وَوُضِعَ الْكِتَابُ فَتَرَى الْمُجْرِمِينَ مُشْفِقِينَ مِمَّا فِيهِ وَيَقُولُونَ يَا وَيْلَتَنَا مَالِ هَٰذَا الْكِتَابِ لَا يُغَادِرُ صَغِيرَةً وَلَا كَبِيرَةً إِلَّا أَحْصَاهَا ۚ وَوَجَدُوا مَا عَمِلُوا حَاضِرًا ۗ وَلَا يَظْلِمُ رَبُّكَ أَحَدًا
और लोगों के आमाल की किताब (सामने) रखी जाएँगी तो तुम गुनेहगारों को देखोगे कि जो कुछ उसमें (लिखा) है (देख देख कर) सहमे हुए हैं और कहते जाते हैं हाए हमारी यामत ये कैसी किताब है कि न छोटे ही गुनाह को बे क़लमबन्द किए छोड़ती है न बड़े गुनाह को और जो कुछ इन लोगों ने (दुनिया में) किया था वह सब (लिखा हुआ) मौजूद पाएँगें और तेरा परवरदिगार किसी पर (ज़र्रा बराबर) ज़ुल्म न करेगा
अल-कहफकुरान सूची
110आयत
मक्कीअवतरण स्थान
47आयत

अनुवाद — अल-कहफ 47

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Thursday, October 1, 2026

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