अल-बकरा · 151/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
كَمَا أَرْسَلْنَا فِيكُمْ رَسُولًا مِّنكُمْ يَتْلُو عَلَيْكُمْ آيَاتِنَا وَيُزَكِّيكُمْ وَيُعَلِّمُكُمُ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَيُعَلِّمُكُم مَّا لَمْ تَكُونُوا تَعْلَمُونَ ۝١٥١
kamaaa arsalnaa feekum Rasoolam minkum yatloo `alaikum aayaatina wa yuzakkeekum wa yu`alli mukumul kitaaba wal hikmata wa yu`allimukum maa lam takoonoo ta`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
और तीसरा फायदा ये है ताकि तुम हिदायत पाओ मुसलमानों ये एहसान भी वैसा ही है जैसे हम ने तुम में तुम ही में का एक रसूल भेजा जो तुमको हमारी आयतें पढ़ कर सुनाए और तुम्हारे नफ्स को पाकीज़ा करे और तुम्हें किताब क़ुरान और अक्ल की बातें सिखाए और तुम को वह बातें बतांए जिन की तुम्हें पहले से खबर भी न थी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَتْلُو – पढ़कर सुनाते हैं
  • آيَاتِنَا – हमारी आयतें (क़ुरआन की आयतें)
  • يُزَكِّيكُمْ – तुम्हें पवित्र करते हैं (शिर्क और बुरे आचरण से साफ़ करते हैं)
  • الْكِتَابَ – किताब (क़ुरआन)
  • الْحِكْمَةَ – हिकमत (सुन्नत और समझदारी)
  • مَا لَمْ تَكُونُوا تَعْلَمُونَ – वह चीज़ें जो तुम नहीं जानते थे

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी एक और बड़ी नेमत (कृपा) का ज़िक्र किया है। जिस तरह उसने तुम्हें काबा की तरफ़ रुख़ करने की नेमत दी, उसी तरह उसने तुम्हारे बीच एक रसूल भेजा जो ख़ुद तुम्हीं में से है — यानी हज़रत मुहम्मद ﷺ। यह बहुत बड़ी बात है कि रसूल तुम्हारी ही क़ौम से आया, ताकि तुम उनकी ज़िंदगी, उनके अख़लाक़ और उनके हालात को अच्छी तरह जान सको और उनसे सीख सको।

उस रसूल के चार बड़े काम बताए गए हैं:

पहला: वह तुम्हें अल्लाह की आयतें पढ़कर सुनाते हैं — यानी क़ुरआन की वह आयतें जो हक़ (सच्चाई) को बातिल (झूठ) से अलग करती हैं, और तुम्हें रास्ता दिखाती हैं।

दूसरा: वह तुम्हें पवित्र करते हैं — यानी तुम्हें शिर्क की गंदगी से, बुरे अख़लाक़ से, बुरे कामों से पाक करते हैं। वह तुम्हें अच्छाइयाँ और भलाई के काम सिखाते हैं और बुराइयों से रोकते हैं, ताकि तुम्हारे दिल साफ़ हों और तुम्हारी ज़िंदगी पाकीज़ा बने।

तीसरा: वह तुम्हें किताब (क़ुरआन) और हिकमत (सुन्नत) सिखाते हैं — यानी अल्लाह का कलाम और रसूल ﷺ का तरीक़ा, दोनों तुम्हें सिखाया जाता है, ताकि तुम दुनिया और आख़िरत की भलाई समझ सको।

चौथा: वह तुम्हें वह चीज़ें सिखाते हैं जो तुम नहीं जानते थे — यानी अंबिया के हालात, पिछली उम्मतों के क़िस्से, दीन के अहकाम, हलाल-हराम, और दुनिया-आख़िरत की वह बातें जिनका तुम्हें ज़रा भी इल्म नहीं था।

यह अल्लाह की बहुत बड़ी मेहरबानी है कि उसने तुम्हें ऐसा रसूल दिया जो तुम्हें अंधेरे से निकालकर रोशनी की तरफ़ लाता है। इस नेमत की क़द्र करनी चाहिए, उस पर शुक्र अदा करना चाहिए, और रसूल ﷺ की बताई हुई राह पर चलना चाहिए। यही सच्ची कामयाबी है — कि हम क़ुरआन को पढ़ें, उस पर अमल करें, रसूल ﷺ की सुन्नत को अपनाएँ, और अपनी ज़िंदगी को पाक और साफ़ बनाएँ। अल्लाह हमें इस नेमत का सही शुक्र अदा करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 149-153 — अल-बकरा

149وَمِنْ حَيْثُ خَرَجْتَ فَوَلِّ وَجْهَكَ شَطْرَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ ۖ وَإِنَّهُ لَلْحَقُّ مِن رَّبِّكَ ۗ وَمَا اللَّهُ بِغَافِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَ
और (ऐ रसूल) तुम जहाँ से जाओ (यहाँ तक मक्का से) तो भी नमाज़ मे तुम अपना मुँह मस्ज़िदे मोहतरम (काबा) की तरफ़ कर लिया करो और बेशक ये नया क़िबला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है
150وَمِنْ حَيْثُ خَرَجْتَ فَوَلِّ وَجْهَكَ شَطْرَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ ۚ وَحَيْثُ مَا كُنتُمْ فَوَلُّوا وُجُوهَكُمْ شَطْرَهُ لِئَلَّا يَكُونَ لِلنَّاسِ عَلَيْكُمْ حُجَّةٌ إِلَّا الَّذِينَ ظَلَمُوا مِنْهُمْ فَلَا تَخْشَوْهُمْ وَاخْشَوْنِي وَلِأُتِمَّ نِعْمَتِي عَلَيْكُمْ وَلَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ
और तुम्हारे कामों से ख़ुदा ग़ाफिल नही है और (ऐ रसूल) तुम जहाँ से जाओ (यहाँ तक के मक्का से तो भी) तुम (नमाज़ में) अपना मुँह मस्ज़िदे हराम की तरफ कर लिया करो और (ऐ रसूल) तुम जहाँ कही हुआ करो तो नमाज़ में अपना मुँह उसी काबा की तरफ़ कर लिया करो (बार बार हुक्म देने का एक फायदा ये है ताकि लोगों का इल्ज़ाम तुम पर न आने पाए मगर उन में से जो लोग नाहक़ हठधर्मी करते हैं वह तो ज़रुर इल्ज़ाम देगें) तो तुम लोग उनसे डरो नहीं और सिर्फ़ मुझसे डरो और (दूसरा फ़ायदा ये है) ताकि तुम पर अपनी नेअमत पूरी कर दूँ
151كَمَا أَرْسَلْنَا فِيكُمْ رَسُولًا مِّنكُمْ يَتْلُو عَلَيْكُمْ آيَاتِنَا وَيُزَكِّيكُمْ وَيُعَلِّمُكُمُ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَيُعَلِّمُكُم مَّا لَمْ تَكُونُوا تَعْلَمُونَ
और तीसरा फायदा ये है ताकि तुम हिदायत पाओ मुसलमानों ये एहसान भी वैसा ही है जैसे हम ने तुम में तुम ही में का एक रसूल भेजा जो तुमको हमारी आयतें पढ़ कर सुनाए और तुम्हारे नफ्स को पाकीज़ा करे और तुम्हें किताब क़ुरान और अक्ल की बातें सिखाए और तुम को वह बातें बतांए जिन की तुम्हें पहले से खबर भी न थी
152فَاذْكُرُونِي أَذْكُرْكُمْ وَاشْكُرُوا لِي وَلَا تَكْفُرُونِ
पस तुम हमारी याद रखो तो मै भी तुम्हारा ज़िक्र (खैर) किया करुगाँ और मेरा शुक्रिया अदा करते रहो और नाशुक्री न करो
153يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اسْتَعِينُوا بِالصَّبْرِ وَالصَّلَاةِ ۚ إِنَّ اللَّهَ مَعَ الصَّابِرِينَ
ऐ ईमानदारों मुसीबत के वक्त सब्र और नमाज़ के ज़रिए से ख़ुदा की मदद माँगों बेशक ख़ुदा सब्र करने वालों ही का साथी है
अल-बकराकुरान सूची
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अनुवाद — अल-बकरा 151

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Tuesday, August 18, 2026

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