अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَاذْكُرُونِي: मुझे याद करो, मेरा ज़िक्र करो।
- أَذْكُرْكُمْ: मैं तुम्हें याद करूँगा, तुम्हारा ज़िक्र करूँगा।
- وَاشْكُرُوا لِي: मेरा शुक्र अदा करो।
- وَلَا تَكْفُرُونِ: मेरी नेमतों का इनकार मत करो, मेरी अवज्ञा मत करो।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने ईमानवाले बंदों को आदेश देता है कि वे उसे याद करें—अपने दिलों से, अपनी ज़ुबान से और अपने अंगों से। जब बंदा अल्लाह को याद करता है, तो अल्लाह उसे याद करता है, और अल्लाह का बंदे को याद करना उससे कहीं बेहतर और बड़ा है। यह अल्लाह की ओर से एक महान प्रतिफल है—वह अपने बंदे का ज़िक्र फ़रिश्तों की महफ़िल में करता है, उस पर रहमत भेजता है और उसकी हिफ़ाज़त करता है। यह बदला उसी के जैसा है—जैसे बंदा अल्लाह को याद करता है, अल्लाह उसे उससे बढ़कर याद करता है।
फिर अल्लाह आदेश देता है कि उसका शुक्र अदा करो—अपनी ज़ुबान से उसकी तारीफ़ करो, अपने दिल से उसकी नेमतों को पहचानो, और अपने अंगों से उसकी इबादत और आज्ञाकारिता में उन नेमतों का इस्तेमाल करो। शुक्र का अर्थ सिर्फ़ "शुक्रिया" कहना नहीं है, बल्कि अल्लाह की दी हुई हर नेमत को उसी की राह में खर्च करना है।
और "मेरा कुफ़्र मत करो" का मतलब है कि अल्लाह की नेमतों को न पहचानना, उन्हें जताना नहीं, और उन नेमतों का इस्तेमाल उन कामों में करना जो अल्लाह ने हराम किए हैं। कुफ़्रान-ए-नेमत यानी नेमत का इनकार करना और उसकी नाशुक्री करना।
फ़ायदे (सबक़):
- अल्लाह का ज़िक्र करना बहुत बड़ी इबादत है, और इसका इनाम यह है कि अल्लाह ख़ुद उस बंदे को याद करता है—यह किसी मुसलमान के लिए सबसे बड़ा सम्मान है।
- अल्लाह की याद दिल को सुकून देती है, इंसान को गुनाहों से रोकती है और उसे अल्लाह के करीब लाती है।
- शुक्र अदा करने से नेमतें बढ़ती हैं, और नाशुक्री से नेमतें खत्म हो जाती हैं। इसलिए हर हाल में अल्लाह का शुक्र करना चाहिए।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने बंदों से बहुत प्यार करता है—वह उनसे कहता है कि मुझे याद करो, मैं तुम्हें याद करूँगा। यह अल्लाह की रहमत और करम की निशानी है।
- मुसलमान को चाहिए कि वह अपनी ज़ुबान को अल्लाह के ज़िक्र से, और अपने अंगों को उसकी इबादत से आबाद रखे, ताकि वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हो।
📜 आयत 150-154 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 152
सूरा अल-बकरा आयत 152 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : पस तुम हमारी याद रखो तो मै भी तुम्हारा ज़िक्र…सूरा आयत 152/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 150–154. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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