अल-बकरा · 242/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمْ آيَاتِهِ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ ۝٢٤٢
Kazaalika yubaiyinul laahu lakum aayaatihee la`allakum ta`qiloon
📖 हिंदी अर्थ
(ये भी) परहेज़गारों पर एक हक़ है उसी तरह ख़ुदा तुम लोगों की हिदायत के वास्ते अपने एहक़ाम साफ़ साफ़ बयान फरमाता है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • كَذَٰلِكَ – इसी प्रकार, उसी तरह
  • يُبَيِّنُ – स्पष्ट करता है, खोलकर बयान करता है
  • آيَاتِهِ – अपनी आयतें (निशानियाँ और आदेश)
  • لَعَلَّكُمْ – ताकि तुम, कदाचित तुम
  • تَعْقِلُونَ – समझो, अक्ल से काम लो

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में फ़रमाता है कि जिस प्रकार उसने पिछली आयतों में बच्चों, औरतों, विरासत और अन्य अहकाम (आदेशों) के बारे में स्पष्ट और विस्तृत नियम बयान किए हैं, उसी प्रकार वह अपनी सारी आयतें और निशानियाँ तुम्हारे लिए खोलकर स्पष्ट करता है। यह बयान सिर्फ़ इन्हीं मसाइल तक सीमित नहीं है, बल्कि अल्लाह ने दीन और दुनिया की हर उस चीज़ के बारे में जो तुम्हें चाहिए, अपने कलाम में हिदायतें और अहकाम उतारे हैं।

अल्लाह का यह बयान उसके रहम और करम की वजह से है, ताकि बंदे उसकी आयतों को समझें, उन पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करें और उन पर अमल करें। यह बयान सिर्फ़ ज़बानी इल्म नहीं है, बल्कि इसका मक़सद दिल और दिमाग़ को रोशन करना है ताकि इंसान सही रास्ते पर चले। जो लोग इन आयतों को समझकर उन पर अमल करते हैं, वही दुनिया और आख़िरत में भलाई पाते हैं।

यह आयत उन आयतों का ख़ातिमा है जिनमें तलाक़, इद्दत, रज़ा' (दूध पिलाने) और विरासत के अहकाम बयान हुए हैं। अल्लाह ने इन सबको इतनी वाज़ेह तरतीब से बयान किया कि उनमें कोई पेचीदगी या इब्हाम (अस्पष्टता) नहीं रही।

फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह तआला अपने बंदों पर बेहद मेहरबान है — वह अपने अहकाम इस तरह स्पष्ट करता है कि बंदे आसानी से समझ सकें और उन पर अमल कर सकें। यह अल्लाह की रहमत की बड़ी दलील है।
  2. क़ुरआन सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि समझने और अमल करने के लिए उतारा गया है। जो इसे समझकर अमल करेगा, उसकी ज़िंदगी दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होगी।
  3. अक़्ल और समझ का सही इस्तेमाल अल्लाह की आयतों पर ग़ौर करने में है। जो इंसान अपनी अक़्ल को अल्लाह की हिदायत के ताबे करता है, वही सच्चा अक़्लमंद है।
  4. अल्लाह का बयान हर ज़माने और हर हालत के लिए काफ़ी है — उसने दीन और दुनिया की हर ज़रूरत के लिए हिदायतें दी हैं, इसलिए हमें क़ुरआन की तरफ़ रुजू करना चाहिए।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि जब अल्लाह खुद अपने अहकाम स्पष्ट कर देता है, तो हमारा फ़र्ज़ बनता है कि हम उन्हें समझें, उन पर अमल करें और उन्हें दूसरों तक पहुँचाएँ।


📜 आयत 240-244 — सूरा अल-बकरा

240وَالَّذِينَ يُتَوَفَّوْنَ مِنكُمْ وَيَذَرُونَ أَزْوَاجًا وَصِيَّةً لِّأَزْوَاجِهِم مَّتَاعًا إِلَى الْحَوْلِ غَيْرَ إِخْرَاجٍ ۚ فَإِنْ خَرَجْنَ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمْ فِي مَا فَعَلْنَ فِي أَنفُسِهِنَّ مِن مَّعْرُوفٍ ۗ وَاللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
उसी तरह ख़ुदा को याद करो और तुम में से जो लोग अपनी बीवियों को छोड़ कर मर जाएँ उन पर अपनी बीबियों के हक़ में साल भर तक के नान व नुफ्के (रोटी कपड़ा) और (घर से) न निकलने की वसीयत करनी (लाज़िम) है पस अगर औरतें ख़ुद निकल खड़ी हो तो जायज़ बातों (निकाह वगैरह) से कुछ अपने हक़ में करे उसका तुम पर कुछ इल्ज़ाम नही है और ख़ुदा हर यै पर ग़ालिब और हिक़मत वाला है
241وَلِلْمُطَلَّقَاتِ مَتَاعٌ بِالْمَعْرُوفِ ۖ حَقًّا عَلَى الْمُتَّقِينَ
और जिन औरतों को ताअय्युन मेहर और हाथ लगाए बगैर तलाक़ दे दी जाए उनके साथ जोड़े रुपए वगैरह से सुलूक करना लाज़िम है
242كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمْ آيَاتِهِ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ
(ये भी) परहेज़गारों पर एक हक़ है उसी तरह ख़ुदा तुम लोगों की हिदायत के वास्ते अपने एहक़ाम साफ़ साफ़ बयान फरमाता है
243۞ أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ خَرَجُوا مِن دِيَارِهِمْ وَهُمْ أُلُوفٌ حَذَرَ الْمَوْتِ فَقَالَ لَهُمُ اللَّهُ مُوتُوا ثُمَّ أَحْيَاهُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَذُو فَضْلٍ عَلَى النَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَشْكُرُونَ
ताकि तुम समझो (ऐ रसूल) क्या तुम ने उन लोगों के हाल पर नज़र नही की जो मौत के डर के मारे अपने घरों से निकल भागे और वह हज़ारो आदमी थे तो ख़ुदा ने उन से फरमाया कि सब के सब मर जाओ (और वह मर गए) फिर ख़ुदा न उन्हें जिन्दा किया बेशक ख़ुदा लोगों पर बड़ा मेहरबान है मगर अक्सर लोग उसका शुक्र नहीं करते
244وَقَاتِلُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
और मुसलमानों ख़ुदा की राह मे जिहाद करो और जान रखो कि ख़ुदा ज़रुर सब कुछ सुनता (और) जानता है
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीअवतरण स्थान
242आयत

अनुवाद — अल-बकरा 242

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Thursday, October 1, 2026

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