Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- كَذَٰلِكَ – इसी प्रकार, उसी तरह
- يُبَيِّنُ – स्पष्ट करता है, खोलकर बयान करता है
- آيَاتِهِ – अपनी आयतें (निशानियाँ और आदेश)
- لَعَلَّكُمْ – ताकि तुम, कदाचित तुम
- تَعْقِلُونَ – समझो, अक्ल से काम लो
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में फ़रमाता है कि जिस प्रकार उसने पिछली आयतों में बच्चों, औरतों, विरासत और अन्य अहकाम (आदेशों) के बारे में स्पष्ट और विस्तृत नियम बयान किए हैं, उसी प्रकार वह अपनी सारी आयतें और निशानियाँ तुम्हारे लिए खोलकर स्पष्ट करता है। यह बयान सिर्फ़ इन्हीं मसाइल तक सीमित नहीं है, बल्कि अल्लाह ने दीन और दुनिया की हर उस चीज़ के बारे में जो तुम्हें चाहिए, अपने कलाम में हिदायतें और अहकाम उतारे हैं।
अल्लाह का यह बयान उसके रहम और करम की वजह से है, ताकि बंदे उसकी आयतों को समझें, उन पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करें और उन पर अमल करें। यह बयान सिर्फ़ ज़बानी इल्म नहीं है, बल्कि इसका मक़सद दिल और दिमाग़ को रोशन करना है ताकि इंसान सही रास्ते पर चले। जो लोग इन आयतों को समझकर उन पर अमल करते हैं, वही दुनिया और आख़िरत में भलाई पाते हैं।
यह आयत उन आयतों का ख़ातिमा है जिनमें तलाक़, इद्दत, रज़ा' (दूध पिलाने) और विरासत के अहकाम बयान हुए हैं। अल्लाह ने इन सबको इतनी वाज़ेह तरतीब से बयान किया कि उनमें कोई पेचीदगी या इब्हाम (अस्पष्टता) नहीं रही।
फ़ायदे (सबक़):
- अल्लाह तआला अपने बंदों पर बेहद मेहरबान है — वह अपने अहकाम इस तरह स्पष्ट करता है कि बंदे आसानी से समझ सकें और उन पर अमल कर सकें। यह अल्लाह की रहमत की बड़ी दलील है।
- क़ुरआन सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि समझने और अमल करने के लिए उतारा गया है। जो इसे समझकर अमल करेगा, उसकी ज़िंदगी दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होगी।
- अक़्ल और समझ का सही इस्तेमाल अल्लाह की आयतों पर ग़ौर करने में है। जो इंसान अपनी अक़्ल को अल्लाह की हिदायत के ताबे करता है, वही सच्चा अक़्लमंद है।
- अल्लाह का बयान हर ज़माने और हर हालत के लिए काफ़ी है — उसने दीन और दुनिया की हर ज़रूरत के लिए हिदायतें दी हैं, इसलिए हमें क़ुरआन की तरफ़ रुजू करना चाहिए।
- यह आयत हमें सिखाती है कि जब अल्लाह खुद अपने अहकाम स्पष्ट कर देता है, तो हमारा फ़र्ज़ बनता है कि हम उन्हें समझें, उन पर अमल करें और उन्हें दूसरों तक पहुँचाएँ।
📜 आयत 240-244 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 242
सूरा अल-बकरा आयत 242 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ये भी) परहेज़गारों पर एक हक़ है उसी तरह ख़ुदा…सूरा आयत 242/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 240–244. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


