अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَاهِيَةً قُلُوبُهُمْ: उनके दिल बेखबर और ग़ाफ़िल हैं।
- وَأَسَرُّوا النَّجْوَى: उन्होंने आपस में चुपके-चुपके सलाह-मशविरा किया और इसे छिपाया।
- هَلْ هَذَا إِلَّا بَشَرٌ مِثْلُكُمْ: यह (मुहम्मद) तो बस तुम्हारे जैसा एक इंसान है।
- السِّحْرَ: जादू (यहाँ उनका मतलब क़ुरआन से था, जिसे उन्होंने जादू कहा)।
- وَأَنْتُمْ تُبْصِرُونَ: हालाँकि तुम जानते और समझते हो।
विस्तृत तफ़सीर:
यह आयत उन लोगों के हाल का वर्णन करती है जो क़ुरआन सुनते तो हैं, लेकिन उनके दिल पूरी तरह बेखबर और ग़ाफ़िल होते हैं। वे क़ुरआन की आयतों पर ध्यान नहीं देते, न उन्हें समझने की कोशिश करते हैं। उनके दिल दुनिया की बातों, झूठी आशाओं और खोखले कामों में लगे रहते हैं, इसलिए क़ुरआन की रौशनी उनके दिलों तक नहीं पहुँच पाती।
फिर अल्लाह तआला बताता है कि ज़ालिमों (यानी काफ़िरों) ने चुपके-चुपके आपस में साज़िश रची और एक दूसरे से कहा: "क्या यह (मुहम्मद) हमारे जैसा ही एक इंसान नहीं है? इसमें कोई फ़र्क़ नहीं कि यह कोई फ़रिश्ता हो या कोई ख़ास मख़लूक़। यह तो बस हमारी ही तरह खाता-पीता और चलता-फिरता है।" उन्होंने यह भी कहा कि यह जो कुछ लेकर आया है, वह सिर्फ़ जादू है। और वे लोगों से कहते थे: "क्या तुम उसके पीछे चलोगे और उसकी बात मानोगे, जबकि तुम ख़ुद जानते हो कि यह एक इंसान है और जो कुछ यह कहता है वह जादू है?"
यानी उन्होंने यह सोचकर उसे झुठलाया कि रसूल इंसान ही होता है, और वे यह भूल गए कि अल्लाह ने हमेशा इंसानों को ही रसूल बनाकर भेजा है। उनकी यह दलील बिल्कुल बेबुनियाद थी, क्योंकि रिसालत का ताल्लुक़ इंसान होने से नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ़ से चुने जाने से है।
इस आयत में उनकी उस हालत पर अफ़सोस किया गया है कि वे जानते-बूझते हुए भी हक़ को क़बूल नहीं करते। वे अपनी आँखों से सच्चाई देखते हुए भी उसे जादू कहते हैं और लोगों को रोकते हैं।
दावत और नसीहत:
यह आयत हमें सिखाती है कि दिल की ग़ाफ़िलगी सबसे बड़ी बीमारी है। अगर दिल साफ़ और अल्लाह की तरफ़ झुका हुआ हो, तो हक़ को क़बूल करने में देर नहीं लगती। लेकिन जिनके दिल दुनिया की मोहब्बत और अहंकार से भरे होते हैं, वे साफ़ सच्चाई को भी नहीं देख पाते।
हमें चाहिए कि क़ुरआन को सिर्फ़ सुनें नहीं, बल्कि उस पर ग़ौर करें, समझें और उस पर अमल करें। क़ुरआन ही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह तआला हमें ग़ाफ़िल दिलों से बचाए और हमें समझने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 1-5 — अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 3
सूरा अल-अंबिया आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उनके दिल (आख़िरत के ख्याल से) बिल्कुल बेख़बर हैं और…सूरा आयत 3/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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