अल-अंबिया · 3/112
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंबिया
لَاهِيَةً قُلُوبُهُمْ ۗ وَأَسَرُّوا النَّجْوَى الَّذِينَ ظَلَمُوا هَلْ هَٰذَا إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُكُمْ ۖ أَفَتَأْتُونَ السِّحْرَ وَأَنتُمْ تُبْصِرُونَ ۝٣
Laahiyatan quloobuhum; wa asarrun najwal lazeena zalamoo hal haazaa illaa basharum mislukum afataa toonas sihra wa antum tubsiroon
📖 हिंदी अर्थ
उनके दिल (आख़िरत के ख्याल से) बिल्कुल बेख़बर हैं और ये ज़ालिम चुपके-चुपके कानाफूसी किया करते हैं कि ये शख्स (मोहम्मद कुछ भी नहीं) बस तुम्हारे ही सा आदमी है तो क्या तुम दीन व दानिस्ता जादू में फँसते हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَاهِيَةً قُلُوبُهُمْ: उनके दिल बेखबर और ग़ाफ़िल हैं।
  • وَأَسَرُّوا النَّجْوَى: उन्होंने आपस में चुपके-चुपके सलाह-मशविरा किया और इसे छिपाया।
  • هَلْ هَذَا إِلَّا بَشَرٌ مِثْلُكُمْ: यह (मुहम्मद) तो बस तुम्हारे जैसा एक इंसान है।
  • السِّحْرَ: जादू (यहाँ उनका मतलब क़ुरआन से था, जिसे उन्होंने जादू कहा)।
  • وَأَنْتُمْ تُبْصِرُونَ: हालाँकि तुम जानते और समझते हो।

विस्तृत तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के हाल का वर्णन करती है जो क़ुरआन सुनते तो हैं, लेकिन उनके दिल पूरी तरह बेखबर और ग़ाफ़िल होते हैं। वे क़ुरआन की आयतों पर ध्यान नहीं देते, न उन्हें समझने की कोशिश करते हैं। उनके दिल दुनिया की बातों, झूठी आशाओं और खोखले कामों में लगे रहते हैं, इसलिए क़ुरआन की रौशनी उनके दिलों तक नहीं पहुँच पाती।

फिर अल्लाह तआला बताता है कि ज़ालिमों (यानी काफ़िरों) ने चुपके-चुपके आपस में साज़िश रची और एक दूसरे से कहा: "क्या यह (मुहम्मद) हमारे जैसा ही एक इंसान नहीं है? इसमें कोई फ़र्क़ नहीं कि यह कोई फ़रिश्ता हो या कोई ख़ास मख़लूक़। यह तो बस हमारी ही तरह खाता-पीता और चलता-फिरता है।" उन्होंने यह भी कहा कि यह जो कुछ लेकर आया है, वह सिर्फ़ जादू है। और वे लोगों से कहते थे: "क्या तुम उसके पीछे चलोगे और उसकी बात मानोगे, जबकि तुम ख़ुद जानते हो कि यह एक इंसान है और जो कुछ यह कहता है वह जादू है?"

यानी उन्होंने यह सोचकर उसे झुठलाया कि रसूल इंसान ही होता है, और वे यह भूल गए कि अल्लाह ने हमेशा इंसानों को ही रसूल बनाकर भेजा है। उनकी यह दलील बिल्कुल बेबुनियाद थी, क्योंकि रिसालत का ताल्लुक़ इंसान होने से नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ़ से चुने जाने से है।

इस आयत में उनकी उस हालत पर अफ़सोस किया गया है कि वे जानते-बूझते हुए भी हक़ को क़बूल नहीं करते। वे अपनी आँखों से सच्चाई देखते हुए भी उसे जादू कहते हैं और लोगों को रोकते हैं।


दावत और नसीहत:

यह आयत हमें सिखाती है कि दिल की ग़ाफ़िलगी सबसे बड़ी बीमारी है। अगर दिल साफ़ और अल्लाह की तरफ़ झुका हुआ हो, तो हक़ को क़बूल करने में देर नहीं लगती। लेकिन जिनके दिल दुनिया की मोहब्बत और अहंकार से भरे होते हैं, वे साफ़ सच्चाई को भी नहीं देख पाते।

हमें चाहिए कि क़ुरआन को सिर्फ़ सुनें नहीं, बल्कि उस पर ग़ौर करें, समझें और उस पर अमल करें। क़ुरआन ही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह तआला हमें ग़ाफ़िल दिलों से बचाए और हमें समझने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 1-5 — सूरा अल-अंबिया

1اقْتَرَبَ لِلنَّاسِ حِسَابُهُمْ وَهُمْ فِي غَفْلَةٍ مُّعْرِضُونَ
लोगों के पास उनका हिसाब (उसका वक्त) अा पहुँचा और वह है कि गफ़लत में पड़े मुँह मोड़े ही जाते हैं
2مَا يَأْتِيهِم مِّن ذِكْرٍ مِّن رَّبِّهِم مُّحْدَثٍ إِلَّا اسْتَمَعُوهُ وَهُمْ يَلْعَبُونَ
जब उनके परवरदिगार की तरफ से उनके पास कोई नया हुक्म आता है तो उसे सिर्फ कान लगाकर सुन लेते हैं और (फिर उसका) हँसी खेल उड़ाते हैं
3لَاهِيَةً قُلُوبُهُمْ ۗ وَأَسَرُّوا النَّجْوَى الَّذِينَ ظَلَمُوا هَلْ هَٰذَا إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُكُمْ ۖ أَفَتَأْتُونَ السِّحْرَ وَأَنتُمْ تُبْصِرُونَ
उनके दिल (आख़िरत के ख्याल से) बिल्कुल बेख़बर हैं और ये ज़ालिम चुपके-चुपके कानाफूसी किया करते हैं कि ये शख्स (मोहम्मद कुछ भी नहीं) बस तुम्हारे ही सा आदमी है तो क्या तुम दीन व दानिस्ता जादू में फँसते हो
4قَالَ رَبِّي يَعْلَمُ الْقَوْلَ فِي السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ ۖ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
(तो उस पर) रसूल ने कहा कि मेरा परवरदिगार जितनी बातें आसमान और ज़मीन में होती हैं खूब जानता है (फिर क्यों कानाफूसी करते हो) और वह तो बड़ा सुनने वाला वाक़िफ़कार है
5بَلْ قَالُوا أَضْغَاثُ أَحْلَامٍ بَلِ افْتَرَاهُ بَلْ هُوَ شَاعِرٌ فَلْيَأْتِنَا بِآيَةٍ كَمَا أُرْسِلَ الْأَوَّلُونَ
(उस पर भी उन लोगों ने इक्तिफ़ा न की) बल्कि कहने लगे (ये कुरान तो) ख़ाबहाय परीशाँ का मजमूआ है बल्कि उसने खुद अपने जी से झूट-मूट गढ़ लिया है बल्कि ये शख्स शायर है और अगर हक़ीकतन रसूल है) तो जिस तरह अगले पैग़म्बर मौजिज़ों के साथ भेजे गए थे
अल-अंबियाकुरान सूची
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3आयत

अनुवाद — अल-अंबिया 3

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Friday, October 2, 2026

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