Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَعْلَمُ الْقَوْلَ – हर बात को जानता है
- فِي السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ – आसमान और ज़मीन में
- السَّمِيعُ – सब कुछ सुनने वाला
- الْعَلِيمُ – सब कुछ जानने वाला
तफ़सीर:
जब काफ़िरों ने नबी करीम ﷺ से तंज़ और मज़ाक़िया अंदाज़ में कहा कि "क्या यही शख्स आपके इलाह का ज़िक्र करता है?" तो अल्लाह के नबी ﷺ ने उन्हें जवाब देते हुए फ़रमाया: "मेरा रब हर उस बात को जानता है जो आसमान और ज़मीन में कही जाती है।" यानी तुम चाहे जितनी भी साज़िशें करो, चाहे जितने भी शब्द अपनी ज़ुबान से निकालो, चाहे उन्हें छुपाकर कहो या आहिस्ता से, अल्लाह तआला को हर लफ़्ज़ का इल्म है। वह हर आवाज़ को सुनता है, चाहे वह कितनी ही धीमी क्यों न हो, और हर नीयत और हर अमल से वह पूरी तरह वाक़िफ है।
यह जवाब दरअसल उन काफ़िरों के लिए एक सख्त तनबीह और खतरनाक चेतावनी थी। अल्लाह का नबी ﷺ उन्हें बता रहे थे कि तुम्हारी सारी बातें, तुम्हारी सारी चालें, तुम्हारे सारे राज़ — सब कुछ अल्लाह के इल्म में हैं। वह तुम्हारी हर बात सुन रहा है और तुम्हारे हर अमल को देख रहा है। और यही अल्लाह का इल्म और उसकी निगरानी क़यामत के दिन तुम्हारे खिलाफ गवाही देगी।
इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है। जिस तरह अल्लाह तआला काफ़िरों की बातें सुनता और जानता था, उसी तरह वह हमारी हर बात, हर अमल, हर दिल की धड़कन और हर ख्याल से बाख़बर है। यह हमारे लिए दो चीज़ों का ज़रिया है: एक तो यह कि हमें गुनाह से बचना चाहिए, क्योंकि अल्लाह सब देख रहा है; और दूसरा यह कि हमें अच्छे कामों पर सब्र और इस्तिक़ामत रखनी चाहिए, क्योंकि अल्लाह हमारी नेकियों को भी जानता है और उनका अज्र ज़रूर देगा।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि जब दुनिया में कोई हमारी बात न सुने या हमें समझे नहीं, तो हमें अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। वह सब कुछ सुनता और जानता है। उसकी निगरानी से कोई चीज़ बाहर नहीं है। और यही वह इल्म है जो मोमिन को सुकून देता है — यह जानना कि मेरा रब मेरी हर बात सुन रहा है, मेरी हर दुआ क़बूल करने वाला है, और मेरे हर अमल का हिसाब रखने वाला है। वह सुनने वाला भी है और जानने वाला भी — उसके इल्म और उसकी सुनने की क़ुदरत की कोई हद नहीं।
📜 आयत 2-6 — सूरा अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 4
सूरा अल-अंबिया आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (तो उस पर) रसूल ने कहा कि मेरा परवरदिगार जितनी…सूरा आयत 4/112 — सूरा अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अंबिया सुनें, सूरा अल-अंबिया अनुवाद, सूरा अल-अंबिया mp3, सूरा अल-अंबिया pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अंबिया
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


