Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- बुयूत (घर): यहाँ अर्थ मस्जिदें हैं।
- अज़िना: आदेश दिया, अनुमति दी।
- तुरफ़अ: ऊँचा किया जाए, सम्मानित किया जाए, बुलंद किया जाए।
- युसब्बिहु: पवित्रता का वर्णन करते हैं, नमाज़ पढ़ते हैं, तस्बीह करते हैं।
- गुदुव्व: सुबह का समय।
- आसाल: शाम का समय (दोपहर के बाद से रात तक)।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उस नूर (प्रकाश) का वर्णन कर रही है जो अल्लाह ने मोमिनों के दिलों में डाला है, और उस प्रकाश का संबंध उन घरों (मस्जिदों) से है जिन्हें अल्लाह ने स्वयं ऊँचा उठाने का आदेश दिया है। ये वे पवित्र स्थान हैं जिन्हें अल्लाह ने सम्मानित किया है, उनकी बुनियाद को बुलंद किया है, और उन्हें अपनी इबादत के लिए चुना है। इन मस्जिदों में अल्लाह का नाम लिया जाता है—अज़ान के माध्यम से, कुरआन की तिलावत के माध्यम से, और हर प्रकार के ज़िक्र (याद) के माध्यम से। ये वे स्थान हैं जहाँ सुबह और शाम अल्लाह की तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) की जाती है, यानी नमाज़ें अदा की जाती हैं—फज्र की नमाज़ सुबह, और ज़ुहर, अस्र, मग़रिब और इशा की नमाज़ें शाम के समय। ये पाँचों नमाज़ें अल्लाह की रज़ा (प्रसन्नता) की तलाश में पढ़ी जाती हैं।
इस आयत में अल्लाह ने मस्जिदों के सम्मान और उनकी देखभाल का विशेष ध्यान रखने की शिक्षा दी है। मस्जिदें सिर्फ़ इमारतें नहीं हैं, बल्कि ये धरती पर अल्लाह के घर हैं, जहाँ बंदे अपने रब के सामने सजदे में झुकते हैं, अपने गुनाहों की माफ़ी माँगते हैं, और अपने दिलों को सुकून देते हैं। जो लोग इन मस्जिदों को आबाद रखते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास बड़ा इनाम है। यह आयत हमें बताती है कि मस्जिदों की देखभाल करना, उन्हें साफ़-सुथरा रखना, और उनमें अल्लाह की इबादत के लिए आना—यह ईमान की निशानी है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें यह सिखाती है कि मस्जिदें सिर्फ़ नमाज़ पढ़ने की जगह नहीं हैं, बल्कि ये हमारी ज़िंदगी का केंद्र हैं। जब हम सुबह उठते हैं और फज्र की नमाज़ के लिए मस्जिद जाते हैं, तो हमारा दिन अल्लाह की याद से शुरू होता है, और जब हम शाम को मस्जिद में हाज़िरी देते हैं, तो हमारा दिन भी अल्लाह की याद पर खत्म होता है। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया की परेशानियों से निकालकर अल्लाह की रहमत की तरफ ले जाता है। मस्जिदें हमें भाईचारे, एकता, और आपसी मोहब्बत का पाठ पढ़ाती हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम मस्जिदों से जुड़े रहें, उन्हें आबाद रखें, और अपने बच्चों को भी मस्जिद से जोड़ें। याद रखें, जो लोग मस्जिदों को आबाद रखते हैं, अल्लाह उन्हें क़यामत के दिन अपने अर्श की छाँव में जगह देगा, जब कोई और छाँव नहीं होगी।
📜 आयत 34-38 — सूरा अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 36
सूरा अन-नूर आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (वह क़न्दील) उन घरों में रौशन है जिनकी निस्बत ख़ुदा…सूरा आयत 36/64 — सूरा अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नूर सुनें, सूरा अन-नूर अनुवाद, सूरा अन-नूर mp3, सूरा अन-नूर pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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