Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يُزْجِي: हाँकता है, चलाता है।
- سَحَابًا: बादल।
- يُؤَلِّفُ: मिलाता है, जोड़ता है।
- رُكَامًا: एक के ऊपर एक जमा हुआ।
- الْوَدْقَ: वर्षा (बारिश)।
- خِلَالِهِ: उसके बीच से, दरारों से।
- جِبَالٍ فِيهَا مِن بَرَدٍ: बादलों के पहाड़ जिनमें ओले होते हैं।
- سَنَا: चमक, रोशनी।
- يَذْهَبُ بِالْأَبْصَارِ: आँखों की रोशनी को ले जाती है।
तफ़सीर (व्याख्या):
क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह तआला किस प्रकार बादलों को हाँकता है? वह उन्हें धीरे-धीरे चलाता है, फिर उनके टुकड़ों को आपस में मिला देता है, और फिर उन्हें एक के ऊपर एक जमा करके घना बादल बना देता है। फिर तुम देखते हो कि उसी बादल के बीच से वर्षा की बूँदें निकलकर बरसती हैं। और वही अल्लाह आसमान से उन बादलों के पहाड़ों से ओले बरसाता है, जो अपनी विशालता में पहाड़ों जैसे दिखते हैं। फिर वह इन ओलों को जिसे चाहता है पहुँचाता है और जिससे चाहता है हटा देता है — यह सब उसकी हिकमत और इच्छा के अनुसार होता है। उस बादल की बिजली की चमक इतनी तेज़ होती है कि लगभग आँखों की रोशनी ही ले जाती है।
यह आयत अल्लाह की कुदरत के अद्भुत नज़ारों को हमारे सामने पेश करती है। जो व्यक्ति इन प्राकृतिक घटनाओं पर गौर करे, वह अल्लाह की बेपनाह ताकत और हिकमत को महसूस किए बिना नहीं रह सकता। बादलों का बनना, उनका जुड़ना, उनसे बारिश और ओलों का गिरना, और बिजली की चमक — यह सब उसी ख़ुदा के इशारे से होता है जो अपनी मख़लूक़ात पर पूरी तरह क़ाबू रखता है।
इस आयत में अल्लाह तआला हमें अपनी कुदरत पर ईमान लाने और उसकी नेमतों का शुक्र अदा करने की तरग़ीब देता है। जब हम बारिश को देखते हैं जो ज़मीन को सींचती है, और ओलों को जो कभी रहमत बनकर आते हैं और कभी अज़ाब — तो हमें याद रखना चाहिए कि यह सब अल्लाह के इख़्तियार में है। वही है जो रिज़्क़ बढ़ाता है और वही है जो रोकता है। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की हर मख़्लूक़ में उसकी निशानियाँ हैं, और जो इन निशानियों पर ग़ौर करता है, उसका ईमान मज़बूत होता है और उसका दिल अल्लाह की मुहब्बत से भर जाता है।
इसलिए ऐ इंसान! जब तू बादलों को उमड़ते देखे, बारिश को बरसते देखे, और बिजली की चमक को देखे, तो अपने रब की अज़मत को याद कर और उसके सामने सजदा कर। यह सब कुछ उसी की देन है, और उसी की तरफ़ लौटना है। अल्लाह हमें उसकी कुदरत पर ग़ौर करने और उसकी इबादत में मशग़ूल रहने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 41-45 — सूरा अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 43
सूरा अन-नूर आयत 43 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या तूने उस पर भी नज़र नहीं की कि यक़ीनन…सूरा आयत 43/64 — सूरा अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नूर सुनें, सूरा अन-नूर अनुवाद, सूरा अन-नूर mp3, सूरा अन-नूर pdf. आयत 41–45. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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