अन-नूर · 43/64
अनुवाद उच्चारण — अन-नूर
أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يُزْجِي سَحَابًا ثُمَّ يُؤَلِّفُ بَيْنَهُ ثُمَّ يَجْعَلُهُ رُكَامًا فَتَرَى الْوَدْقَ يَخْرُجُ مِنْ خِلَالِهِ وَيُنَزِّلُ مِنَ السَّمَاءِ مِن جِبَالٍ فِيهَا مِن بَرَدٍ فَيُصِيبُ بِهِ مَن يَشَاءُ وَيَصْرِفُهُ عَن مَّن يَشَاءُ ۖ يَكَادُ سَنَا بَرْقِهِ يَذْهَبُ بِالْأَبْصَارِ ۝٤٣
Alam tara annal laaha yuzjee sahaaban summa yu`allifu bainahoo summa yaj`aluhoo rukaaman fataral wadqa yakhruju min khilaalihee wa yunazzilu minas samaaa`i min jibaalin feehaa mim barain fa yuseebu bihee mai yashaaa`u wa yasrifuhoo `am mai yashaaa`u yakkaadu sanaa barqihee yazhabu bil absaar
📖 हिंदी अर्थ
क्या तूने उस पर भी नज़र नहीं की कि यक़ीनन ख़ुदा ही अब्र को चलाता है फिर वही बाहम उसे जोड़ता है-फिर वही उसे तह ब तह रखता है तब तू तो बारिश उसके दरमियान से निकलते हुए देखता है और आसमान में जो (जमे हुए बादलों के) पहाड़ है उनमें से वही उसे बरसाता है- फिर उन्हें जिस (के सर) पर चाहता है पहुँचा देता है- और जिस (के सर) से चाहता है टाल देता है- क़रीब है कि उसकी बिजली की कौन्द आखों की रौशनी उचके लिये जाती है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُزْجِي: हाँकता है, चलाता है।
  • سَحَابًا: बादल।
  • يُؤَلِّفُ: मिलाता है, जोड़ता है।
  • رُكَامًا: एक के ऊपर एक जमा हुआ।
  • الْوَدْقَ: वर्षा (बारिश)।
  • خِلَالِهِ: उसके बीच से, दरारों से।
  • جِبَالٍ فِيهَا مِن بَرَدٍ: बादलों के पहाड़ जिनमें ओले होते हैं।
  • سَنَا: चमक, रोशनी।
  • يَذْهَبُ بِالْأَبْصَارِ: आँखों की रोशनी को ले जाती है।

तफ़सीर (व्याख्या):

क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह तआला किस प्रकार बादलों को हाँकता है? वह उन्हें धीरे-धीरे चलाता है, फिर उनके टुकड़ों को आपस में मिला देता है, और फिर उन्हें एक के ऊपर एक जमा करके घना बादल बना देता है। फिर तुम देखते हो कि उसी बादल के बीच से वर्षा की बूँदें निकलकर बरसती हैं। और वही अल्लाह आसमान से उन बादलों के पहाड़ों से ओले बरसाता है, जो अपनी विशालता में पहाड़ों जैसे दिखते हैं। फिर वह इन ओलों को जिसे चाहता है पहुँचाता है और जिससे चाहता है हटा देता है — यह सब उसकी हिकमत और इच्छा के अनुसार होता है। उस बादल की बिजली की चमक इतनी तेज़ होती है कि लगभग आँखों की रोशनी ही ले जाती है।

यह आयत अल्लाह की कुदरत के अद्भुत नज़ारों को हमारे सामने पेश करती है। जो व्यक्ति इन प्राकृतिक घटनाओं पर गौर करे, वह अल्लाह की बेपनाह ताकत और हिकमत को महसूस किए बिना नहीं रह सकता। बादलों का बनना, उनका जुड़ना, उनसे बारिश और ओलों का गिरना, और बिजली की चमक — यह सब उसी ख़ुदा के इशारे से होता है जो अपनी मख़लूक़ात पर पूरी तरह क़ाबू रखता है।

इस आयत में अल्लाह तआला हमें अपनी कुदरत पर ईमान लाने और उसकी नेमतों का शुक्र अदा करने की तरग़ीब देता है। जब हम बारिश को देखते हैं जो ज़मीन को सींचती है, और ओलों को जो कभी रहमत बनकर आते हैं और कभी अज़ाब — तो हमें याद रखना चाहिए कि यह सब अल्लाह के इख़्तियार में है। वही है जो रिज़्क़ बढ़ाता है और वही है जो रोकता है। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की हर मख़्लूक़ में उसकी निशानियाँ हैं, और जो इन निशानियों पर ग़ौर करता है, उसका ईमान मज़बूत होता है और उसका दिल अल्लाह की मुहब्बत से भर जाता है।

इसलिए ऐ इंसान! जब तू बादलों को उमड़ते देखे, बारिश को बरसते देखे, और बिजली की चमक को देखे, तो अपने रब की अज़मत को याद कर और उसके सामने सजदा कर। यह सब कुछ उसी की देन है, और उसी की तरफ़ लौटना है। अल्लाह हमें उसकी कुदरत पर ग़ौर करने और उसकी इबादत में मशग़ूल रहने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 41-45 — अन-नूर

41أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يُسَبِّحُ لَهُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَالطَّيْرُ صَافَّاتٍ ۖ كُلٌّ قَدْ عَلِمَ صَلَاتَهُ وَتَسْبِيحَهُ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ بِمَا يَفْعَلُونَ
(ऐ शख्स) क्या तूने इतना भी नहीं देखा कि जितनी मख़लूक़ात सारे आसमान और ज़मीन में हैं और परिन्दें पर फैलाए (ग़रज़ सब) उसी को तस्बीह किया करते हैं सब के सब अपनी नमाज़ और अपनी तस्बीह का तरीक़ा खूब जानते हैं और जो कुछ ये किया करते हैं ख़ुदा उससे खूब वाक़िफ है
42وَلِلَّهِ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ وَإِلَى اللَّهِ الْمَصِيرُ
और सारे आसमान व ज़मीन की सल्तनत ख़ास ख़ुदा ही की है और ख़ुदा ही की तरफ (सब को) लौट कर जाना है
43أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يُزْجِي سَحَابًا ثُمَّ يُؤَلِّفُ بَيْنَهُ ثُمَّ يَجْعَلُهُ رُكَامًا فَتَرَى الْوَدْقَ يَخْرُجُ مِنْ خِلَالِهِ وَيُنَزِّلُ مِنَ السَّمَاءِ مِن جِبَالٍ فِيهَا مِن بَرَدٍ فَيُصِيبُ بِهِ مَن يَشَاءُ وَيَصْرِفُهُ عَن مَّن يَشَاءُ ۖ يَكَادُ سَنَا بَرْقِهِ يَذْهَبُ بِالْأَبْصَارِ
क्या तूने उस पर भी नज़र नहीं की कि यक़ीनन ख़ुदा ही अब्र को चलाता है फिर वही बाहम उसे जोड़ता है-फिर वही उसे तह ब तह रखता है तब तू तो बारिश उसके दरमियान से निकलते हुए देखता है और आसमान में जो (जमे हुए बादलों के) पहाड़ है उनमें से वही उसे बरसाता है- फिर उन्हें जिस (के सर) पर चाहता है पहुँचा देता है- और जिस (के सर) से चाहता है टाल देता है- क़रीब है कि उसकी बिजली की कौन्द आखों की रौशनी उचके लिये जाती है
44يُقَلِّبُ اللَّهُ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَعِبْرَةً لِّأُولِي الْأَبْصَارِ
ख़ुदा ही रात और दिन को फेर बदल करता रहता है- बेशक इसमें ऑंख वालों के लिए बड़ी इबरत है
45وَاللَّهُ خَلَقَ كُلَّ دَابَّةٍ مِّن مَّاءٍ ۖ فَمِنْهُم مَّن يَمْشِي عَلَىٰ بَطْنِهِ وَمِنْهُم مَّن يَمْشِي عَلَىٰ رِجْلَيْنِ وَمِنْهُم مَّن يَمْشِي عَلَىٰ أَرْبَعٍ ۚ يَخْلُقُ اللَّهُ مَا يَشَاءُ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
और ख़ुदा ही ने तमाम ज़मीन पर चलने वाले (जानवरों) को पानी से पैदा किया उनमें से बाज़ तो ऐसे हैं जो अपने पेट के बल चलते हैं और बाज़ उनमें से ऐसे हैं जो दो पाँव पर चलते हैं और बाज़ उनमें से ऐसे हैं जो चार पावों पर चलते हैं- ख़ुदा जो चाहता है पैदा करता है इसमें शक नहीं कि खुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
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अनुवाद — अन-नूर 43

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Tuesday, August 18, 2026

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