Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يُقَلِّبُ: पलटता है, बदलता है, एक को दूसरे पर लाता है।
- اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ: रात और दिन।
- عِبْرَةً: सबक, नसीहत, सीख लेने की चीज़।
- لِأُولِي الْأَبْصَارِ: आँखों वालों के लिए, यानी समझदार और बुद्धिमान लोगों के लिए।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला अपनी क़ुदरत (शक्ति) के नमूनों में से एक अज़ीम नमूना पेश करता है कि वह रात और दिन को बदलता रहता है। कभी रात लंबी होती है और दिन छोटा, तो कभी दिन लंबा और रात छोटी। एक के आने से दूसरा चला जाता है, और इसी तरह यह सिलसिला बराबर जारी रहता है। यह बदलाव अल्लाह के इशारे से होता है, बिना किसी रुकावट के, और इसी में उसकी तदबीर (योजना) और हिकमत (बुद्धिमत्ता) झलकती है।
इस बदलते नज़ारे में उन लोगों के लिए बड़ी नसीहत और सबक है जो आँखें रखते हैं, यानी जो देखते हुए सोचते हैं और समझते हैं। वे इससे अल्लाह की क़ुदरत, उसकी वहदानियत (एकता) और उसके इल्म (ज्ञान) का सबूत लेते हैं। जब वे देखते हैं कि रात और दिन कैसे एक दूसरे की जगह लेते हैं, तो उनका ईमान मज़बूत होता है और वे अल्लाह की बड़ाई करते हैं।
यह तक़ल्लुब (बदलाव) सिर्फ़ एक इत्तफ़ाक़ नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ़ से एक तदबीर है, जो हमें याद दिलाती है कि इस कायनात (ब्रह्मांड) का मालिक कोई और नहीं, बल्कि अल्लाह ही है। वही रात को दिन में और दिन को रात में बदलता है, और यह सब कुछ उसी के हुक्म से होता है।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! ज़रा सोचिए, जो अल्लाह रात और दिन को इतनी खूबसूरती से बदलता है, वही आपकी ज़िंदगी के हालात भी बदल सकता है। जैसे रात के बाद सुबह आती है, वैसे ही मुश्किलों के बाद आसानी आती है। यह क़ुदरत का नज़ारा हमें सिखाता है कि हम अल्लाह पर भरोसा रखें, उसकी इबादत करें और उसके दिए हुए वक़्त को अच्छे कामों में गुज़ारें। जो लोग इस सबक को समझ लेते हैं, वे कभी अल्लाह से ग़ाफ़िल (बेखबर) नहीं रहते, बल्कि हर पल उसका शुक्र अदा करते हैं। यही असली बुद्धिमानी है — कि हम इन निशानियों से सीख लें और अपने रब की तरफ़ रुजू करें।
📜 आयत 42-46 — सूरा अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 44
सूरा अन-नूर आयत 44 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़ुदा ही रात और दिन को फेर बदल करता रहता…सूरा आयत 44/64 — सूरा अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नूर सुनें, सूरा अन-नूर अनुवाद, सूरा अन-नूर mp3, सूरा अन-नूर pdf. आयत 42–46. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Sunday, October 11, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


