अन-नूर · 44/64
अनुवाद उच्चारण — अन-नूर
يُقَلِّبُ اللَّهُ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَعِبْرَةً لِّأُولِي الْأَبْصَارِ ۝٤٤
Yuqallibul laahul laila wannahaar; inna fee zaalika la`ibratal li ulil absaar
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा ही रात और दिन को फेर बदल करता रहता है- बेशक इसमें ऑंख वालों के लिए बड़ी इबरत है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُقَلِّبُ: पलटता है, बदलता है, एक को दूसरे पर लाता है।
  • اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ: रात और दिन।
  • عِبْرَةً: सबक, नसीहत, सीख लेने की चीज़।
  • لِأُولِي الْأَبْصَارِ: आँखों वालों के लिए, यानी समझदार और बुद्धिमान लोगों के लिए।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला अपनी क़ुदरत (शक्ति) के नमूनों में से एक अज़ीम नमूना पेश करता है कि वह रात और दिन को बदलता रहता है। कभी रात लंबी होती है और दिन छोटा, तो कभी दिन लंबा और रात छोटी। एक के आने से दूसरा चला जाता है, और इसी तरह यह सिलसिला बराबर जारी रहता है। यह बदलाव अल्लाह के इशारे से होता है, बिना किसी रुकावट के, और इसी में उसकी तदबीर (योजना) और हिकमत (बुद्धिमत्ता) झलकती है।

इस बदलते नज़ारे में उन लोगों के लिए बड़ी नसीहत और सबक है जो आँखें रखते हैं, यानी जो देखते हुए सोचते हैं और समझते हैं। वे इससे अल्लाह की क़ुदरत, उसकी वहदानियत (एकता) और उसके इल्म (ज्ञान) का सबूत लेते हैं। जब वे देखते हैं कि रात और दिन कैसे एक दूसरे की जगह लेते हैं, तो उनका ईमान मज़बूत होता है और वे अल्लाह की बड़ाई करते हैं।

यह तक़ल्लुब (बदलाव) सिर्फ़ एक इत्तफ़ाक़ नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ़ से एक तदबीर है, जो हमें याद दिलाती है कि इस कायनात (ब्रह्मांड) का मालिक कोई और नहीं, बल्कि अल्लाह ही है। वही रात को दिन में और दिन को रात में बदलता है, और यह सब कुछ उसी के हुक्म से होता है।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! ज़रा सोचिए, जो अल्लाह रात और दिन को इतनी खूबसूरती से बदलता है, वही आपकी ज़िंदगी के हालात भी बदल सकता है। जैसे रात के बाद सुबह आती है, वैसे ही मुश्किलों के बाद आसानी आती है। यह क़ुदरत का नज़ारा हमें सिखाता है कि हम अल्लाह पर भरोसा रखें, उसकी इबादत करें और उसके दिए हुए वक़्त को अच्छे कामों में गुज़ारें। जो लोग इस सबक को समझ लेते हैं, वे कभी अल्लाह से ग़ाफ़िल (बेखबर) नहीं रहते, बल्कि हर पल उसका शुक्र अदा करते हैं। यही असली बुद्धिमानी है — कि हम इन निशानियों से सीख लें और अपने रब की तरफ़ रुजू करें।



📜 आयत 42-46 — अन-नूर

42وَلِلَّهِ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ وَإِلَى اللَّهِ الْمَصِيرُ
और सारे आसमान व ज़मीन की सल्तनत ख़ास ख़ुदा ही की है और ख़ुदा ही की तरफ (सब को) लौट कर जाना है
43أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يُزْجِي سَحَابًا ثُمَّ يُؤَلِّفُ بَيْنَهُ ثُمَّ يَجْعَلُهُ رُكَامًا فَتَرَى الْوَدْقَ يَخْرُجُ مِنْ خِلَالِهِ وَيُنَزِّلُ مِنَ السَّمَاءِ مِن جِبَالٍ فِيهَا مِن بَرَدٍ فَيُصِيبُ بِهِ مَن يَشَاءُ وَيَصْرِفُهُ عَن مَّن يَشَاءُ ۖ يَكَادُ سَنَا بَرْقِهِ يَذْهَبُ بِالْأَبْصَارِ
क्या तूने उस पर भी नज़र नहीं की कि यक़ीनन ख़ुदा ही अब्र को चलाता है फिर वही बाहम उसे जोड़ता है-फिर वही उसे तह ब तह रखता है तब तू तो बारिश उसके दरमियान से निकलते हुए देखता है और आसमान में जो (जमे हुए बादलों के) पहाड़ है उनमें से वही उसे बरसाता है- फिर उन्हें जिस (के सर) पर चाहता है पहुँचा देता है- और जिस (के सर) से चाहता है टाल देता है- क़रीब है कि उसकी बिजली की कौन्द आखों की रौशनी उचके लिये जाती है
44يُقَلِّبُ اللَّهُ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَعِبْرَةً لِّأُولِي الْأَبْصَارِ
ख़ुदा ही रात और दिन को फेर बदल करता रहता है- बेशक इसमें ऑंख वालों के लिए बड़ी इबरत है
45وَاللَّهُ خَلَقَ كُلَّ دَابَّةٍ مِّن مَّاءٍ ۖ فَمِنْهُم مَّن يَمْشِي عَلَىٰ بَطْنِهِ وَمِنْهُم مَّن يَمْشِي عَلَىٰ رِجْلَيْنِ وَمِنْهُم مَّن يَمْشِي عَلَىٰ أَرْبَعٍ ۚ يَخْلُقُ اللَّهُ مَا يَشَاءُ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
और ख़ुदा ही ने तमाम ज़मीन पर चलने वाले (जानवरों) को पानी से पैदा किया उनमें से बाज़ तो ऐसे हैं जो अपने पेट के बल चलते हैं और बाज़ उनमें से ऐसे हैं जो दो पाँव पर चलते हैं और बाज़ उनमें से ऐसे हैं जो चार पावों पर चलते हैं- ख़ुदा जो चाहता है पैदा करता है इसमें शक नहीं कि खुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
46لَّقَدْ أَنزَلْنَا آيَاتٍ مُّبَيِّنَاتٍ ۚ وَاللَّهُ يَهْدِي مَن يَشَاءُ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
हम ही ने यक़ीनन वाजेए व रौशन आयतें नाज़िल की और खुदा ही जिसको चाहता है सीधी राह की हिदायत करता है
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अनुवाद — अन-नूर 44

सूरा अन-नूर आयत 44 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़ुदा ही रात और दिन को फेर बदल करता रहता…

सूरा आयत 44/64 — अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नूर सुनें, अन-नूर अनुवाद, अन-नूर mp3, अन-नूर pdf. आयत 42–46. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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