अन-नूर · 45/64
अनुवाद उच्चारण — अन-नूर
وَاللَّهُ خَلَقَ كُلَّ دَابَّةٍ مِّن مَّاءٍ ۖ فَمِنْهُم مَّن يَمْشِي عَلَىٰ بَطْنِهِ وَمِنْهُم مَّن يَمْشِي عَلَىٰ رِجْلَيْنِ وَمِنْهُم مَّن يَمْشِي عَلَىٰ أَرْبَعٍ ۚ يَخْلُقُ اللَّهُ مَا يَشَاءُ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ ۝٤٥
Wallaahu khalaqa kulla daaabbatim mim maaa`in faminhum mai yamshee `alaa batnihee wa minhum mai yamshee `alaa rijlaine wa minhum mai yamshee `alaaa arba`; yakhluqul laahu maa yashaaa`; innal laaha `alaa kulli shai`in Qadeer
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा ही ने तमाम ज़मीन पर चलने वाले (जानवरों) को पानी से पैदा किया उनमें से बाज़ तो ऐसे हैं जो अपने पेट के बल चलते हैं और बाज़ उनमें से ऐसे हैं जो दो पाँव पर चलते हैं और बाज़ उनमें से ऐसे हैं जो चार पावों पर चलते हैं- ख़ुदा जो चाहता है पैदा करता है इसमें शक नहीं कि खुदा हर चीज़ पर क़ादिर है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • دَابَّةٍ: चलने-फिरने वाला प्राणी, धरती पर चलने वाला जीव।
  • مِن مَّاءٍ: पानी से, अर्थात नुत्फ़े (वीर्य) से।
  • يَمْشِي عَلَىٰ بَطْنِهِ: अपने पेट के बल चलता है (रेंगता है)।
  • يَمْشِي عَلَىٰ رِجْلَيْنِ: दो पैरों पर चलता है।
  • يَمْشِي عَلَىٰ أَرْبَعٍ: चार पैरों पर चलता है।
  • قَدِيرٌ: हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी कुदरत के अज़ीम नमूने पेश किए हैं। वह बताता है कि उसने हर चलने-फिरने वाले जीव को पानी से पैदा किया है। यानी सभी जानदारों की बुनियाद नुत्फ़े (वीर्य) है, जो पानी की तरह बहता है। यही वह मूल तत्व है जिससे अल्लाह ने अनगिनत किस्मों के जीव बनाए।

फिर अल्लाह ने इन प्राणियों की चाल-ढाल की विविधता की ओर इशारा किया:

  • कुछ जीव अपने पेट के बल रेंगते हैं, जैसे साँप, कीड़े-मकोड़े और इसी तरह के दूसरे जीव।
  • कुछ जीव दो पैरों पर चलते हैं, जैसे इंसान और पक्षी।
  • कुछ जीव चार पैरों पर चलते हैं, जैसे चौपाए जानवर — गाय, बकरी, ऊँट, घोड़े आदि।

यह सिर्फ़ कुछ मिसालें हैं। अल्लाह ने जो चाहा पैदा किया और जो चाहता है पैदा करता रहेगा। उसकी रचना की कोई सीमा नहीं, कोई हद नहीं। वह जिस रूप में चाहे, जिस तरह चाहे, जिस हालत में चाहे पैदा कर सकता है। क्योंकि वह हर चीज़ पर पूरी कुदरत रखता है। उसके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं, न कोई चीज़ उसे असमर्थ कर सकती है।

यह आयत हमें अल्लाह की कुदरत पर ग़ौर करने की दावत देती है। जिस अल्लाह ने पानी की एक बूंद से इतनी तरह के जीव बना दिए, क्या वह मौत के बाद दोबारा ज़िंदा करने पर क़ादिर नहीं? ज़रूर क़ादिर है। यही अल्लाह की कुदरत का सबूत है। जो इंसान इन मख़लूक़ात को देखकर अल्लाह की अज़मत को न पहचाने, वह कितना बड़ा ग़ाफ़िल है!

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह की रचना में कोई एकरूपता नहीं, बल्कि बेहद تنوع (विविधता) है। यह विविधता ही अल्लाह की कुदरत की निशानी है। जिस अल्लाह ने यह सब बनाया, वही हमारा रब है, वही हमारी परवरिश करता है, और उसी की इबादत हम पर फ़र्ज़ है। हमें चाहिए कि उसकी नेमतों का शुक्र अदा करें और उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें। क्योंकि वही सब कुछ कर सकता है, और उसके सिवा कोई मददगार नहीं।



📜 आयत 43-47 — अन-नूर

43أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يُزْجِي سَحَابًا ثُمَّ يُؤَلِّفُ بَيْنَهُ ثُمَّ يَجْعَلُهُ رُكَامًا فَتَرَى الْوَدْقَ يَخْرُجُ مِنْ خِلَالِهِ وَيُنَزِّلُ مِنَ السَّمَاءِ مِن جِبَالٍ فِيهَا مِن بَرَدٍ فَيُصِيبُ بِهِ مَن يَشَاءُ وَيَصْرِفُهُ عَن مَّن يَشَاءُ ۖ يَكَادُ سَنَا بَرْقِهِ يَذْهَبُ بِالْأَبْصَارِ
क्या तूने उस पर भी नज़र नहीं की कि यक़ीनन ख़ुदा ही अब्र को चलाता है फिर वही बाहम उसे जोड़ता है-फिर वही उसे तह ब तह रखता है तब तू तो बारिश उसके दरमियान से निकलते हुए देखता है और आसमान में जो (जमे हुए बादलों के) पहाड़ है उनमें से वही उसे बरसाता है- फिर उन्हें जिस (के सर) पर चाहता है पहुँचा देता है- और जिस (के सर) से चाहता है टाल देता है- क़रीब है कि उसकी बिजली की कौन्द आखों की रौशनी उचके लिये जाती है
44يُقَلِّبُ اللَّهُ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَعِبْرَةً لِّأُولِي الْأَبْصَارِ
ख़ुदा ही रात और दिन को फेर बदल करता रहता है- बेशक इसमें ऑंख वालों के लिए बड़ी इबरत है
45وَاللَّهُ خَلَقَ كُلَّ دَابَّةٍ مِّن مَّاءٍ ۖ فَمِنْهُم مَّن يَمْشِي عَلَىٰ بَطْنِهِ وَمِنْهُم مَّن يَمْشِي عَلَىٰ رِجْلَيْنِ وَمِنْهُم مَّن يَمْشِي عَلَىٰ أَرْبَعٍ ۚ يَخْلُقُ اللَّهُ مَا يَشَاءُ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
और ख़ुदा ही ने तमाम ज़मीन पर चलने वाले (जानवरों) को पानी से पैदा किया उनमें से बाज़ तो ऐसे हैं जो अपने पेट के बल चलते हैं और बाज़ उनमें से ऐसे हैं जो दो पाँव पर चलते हैं और बाज़ उनमें से ऐसे हैं जो चार पावों पर चलते हैं- ख़ुदा जो चाहता है पैदा करता है इसमें शक नहीं कि खुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
46لَّقَدْ أَنزَلْنَا آيَاتٍ مُّبَيِّنَاتٍ ۚ وَاللَّهُ يَهْدِي مَن يَشَاءُ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
हम ही ने यक़ीनन वाजेए व रौशन आयतें नाज़िल की और खुदा ही जिसको चाहता है सीधी राह की हिदायत करता है
47وَيَقُولُونَ آمَنَّا بِاللَّهِ وَبِالرَّسُولِ وَأَطَعْنَا ثُمَّ يَتَوَلَّىٰ فَرِيقٌ مِّنْهُم مِّن بَعْدِ ذَٰلِكَ ۚ وَمَا أُولَٰئِكَ بِالْمُؤْمِنِينَ
और (जो लोग ऐसे भी है जो) कहते हैं कि ख़ुदा पर और रसूल पर ईमान लाए और हमने इताअत क़ुबूल की- फिर उसके बाद उन में से कुछ लोग (ख़ुदा के हुक्म से) मुँह फेर लेते हैं और (सच यूँ है कि) ये लोग ईमानदार थे ही नहीं
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अनुवाद — अन-नूर 45

सूरा अन-नूर आयत 45 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा ही ने तमाम ज़मीन पर चलने वाले (जानवरों)…

सूरा आयत 45/64 — अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नूर सुनें, अन-नूर अनुवाद, अन-नूर mp3, अन-नूर pdf. आयत 43–47. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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