Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- مُعْجِزِينَ: अल्लाह को विवश करने वाले, यानी उसकी पकड़ से बच निकलने वाले।
- مَأْوَاهُمُ: उनका ठिकाना, उनका आश्रय स्थल।
- مَصِيرُ: अंतिम परिणाम, जहाँ वे जाकर रुकेंगे।
तफसीर:
ऐ नबी! आप कभी यह ख़याल न करें कि जिन लोगों ने अल्लाह का इनकार किया है, वे धरती में अल्लाह को मात देने वाले या उसकी पकड़ से बच निकलने वाले हैं। यह उनका भ्रम है कि वे अपनी ताक़त, साज़िशों या संसाधनों के बल पर अल्लाह के इरादे को विफल कर देंगे। अल्लाह उन पर पूरी तरह क़ाबू रखता है, और जब चाहेगा उन्हें पकड़ लेगा। उनकी यह अस्थायी सफलता और सांसारिक शक्ति उन्हें अल्लाह की पकड़ से नहीं बचा सकती।
उनका असली ठिकाना आख़िरत में आग है — जहन्नुम की भयानक आग। वही उनका अंतिम पड़ाव होगा, और वह बहुत ही बुरा ठिकाना है। जो व्यक्ति अपने रब को ठुकरा दे, उसके लिए इससे बुरा अंजाम और क्या हो सकता है कि उसे हमेशा के लिए आग में झोंक दिया जाए।
यह आयत सिर्फ़ नबी ﷺ को संबोधित नहीं है, बल्कि पूरी उम्मत के लिए एक सबक़ और तसल्ली है। जब आप देखें कि बुराई करने वाले लोग दुनिया में फल-फूल रहे हैं और सच्चाई के पैरोकारों पर मुसीबतें आ रही हैं, तो घबराइए नहीं। यह दुनिया इम्तिहान की जगह है, इंसाफ़ की जगह नहीं। अल्लाह ने अपने वादे को सच कर दिखाना है — अच्छाई की जीत होगी और बुराई का अंत तय है।
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि हमें कभी भी अल्लाह की ताक़त पर शक नहीं करना चाहिए। चाहे हालात कितने भी विपरीत क्यों न हों, अल्लाह का दीन बुलंद होकर रहेगा। और जो लोग इस दीन के खिलाफ साज़िशें रचते हैं, उनका अंजाम तय है — जहन्नुम की आग। यह हमारे लिए एक चेतावनी भी है कि हम खुद को उन लोगों में न पाएँ जिनका ठिकाना आग है, बल्कि हम उन लोगों में हों जो अल्लाह की रहमत और जन्नत के हक़दार बनें।
याद रखिए, अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और उसका फैसला कभी टलता नहीं। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह सब्र और यक़ीन के साथ अपने दीन पर क़ायम रहे, और अल्लाह से डरते हुए उसकी इबादत करे। जो लोग अल्लाह के रास्ते में सब्र करते हैं, उनके लिए बड़ी खुशखबरी है — उनका अंजाम जन्नत है, और जन्नत से बेहतर कोई ठिकाना नहीं।
📜 आयत 55-59 — सूरा अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 57
सूरा अन-नूर आयत 57 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) तुम ये ख्याल न करो कि कुफ्फार…सूरा आयत 57/64 — सूरा अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नूर सुनें, सूरा अन-नूर अनुवाद, सूरा अन-नूर mp3, सूरा अन-नूर pdf. आयत 55–59. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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