अल-फुरकान · 1/77
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फुरकान
تَبَارَكَ الَّذِي نَزَّلَ الْفُرْقَانَ عَلَىٰ عَبْدِهِ لِيَكُونَ لِلْعَالَمِينَ نَذِيرًا ۝١
Tabaarakal lazee nazzalal Furqaana `alaa `abdihee li yakoona lil`aalameena nazeera
📖 हिंदी अर्थ
(ख़ुदा) बहुत बाबरकत है जिसने अपने बन्दे (मोहम्मद) पर कुरान नाज़िल किया ताकि सारे जहॉन के लिए (ख़ुदा के अज़ाब से) डराने वाला हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَبَارَكَ: अत्यंत बरकत वाला, महान और पवित्र है।
  • الْفُرْقَانَ: क़ुरआन, जो सत्य और असत्य के बीच अंतर करने वाला है।
  • عَبْدِهِ: उसके बंदे (मुहम्मद ﷺ)।
  • نَذِيرًا: डराने वाला, सावधान करने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अत्यंत बरकत वाला और महान है, उसकी भलाइयाँ असीम हैं और उसके गुण परिपूर्ण हैं। उसी ने अपने बंदे और रसूल मुहम्मद ﷺ पर क़ुरआन उतारा, जो सत्य और असत्य, अच्छे और बुरे के बीच स्पष्ट अंतर करने वाला है। यह क़िताब इसलिए उतारी गई ताकि वह (नबी ﷺ) सारे जहानों के लिए — चाहे वे जिन्न हों या इंसान, उस समय के हों या बाद में आने वाले — एक सचेत करने वाले और डराने वाले बनकर आएं। वे लोगों को अल्लाह के अज़ाब से डराएँ, उन्हें सीधे रास्ते की ओर बुलाएँ और उनके लिए खुशखबरी और चेतावनी दोनों लेकर आएँ।

यह क़ुरआन ही वह फ़ुरक़ान है जो हक़ और बातिल के बीच फर्क करता है, और इसी की बदौलत इंसान अपनी ज़िंदगी की राह पा सकता है। अल्लाह ने यह किताब अपने सबसे प्यारे बंदे पर उतारी, जो पूरी मख़लूक़ के लिए रहमत और निगरानी का ज़रिया बने। यह अल्लाह की सबसे बड़ी नेमत है कि उसने हमें यह किताब दी, जो हमें जहन्नुम के अज़ाब से बचाकर जन्नत की राह दिखाती है। इसलिए हमें इस किताब को पढ़ना चाहिए, समझना चाहिए और इस पर अमल करना चाहिए, ताकि हम उन लोगों में शामिल हों जिन्हें अल्लाह की रहमत और मग़फिरत हासिल हो। याद रखें, यह क़ुरआन हमारे लिए रोशनी है, हिदायत है और हर उस शख्स के लिए नजात का ज़रिया है जो इसे थाम ले।



📜 आयत 1-3 — सूरा अल-फुरकान

1تَبَارَكَ الَّذِي نَزَّلَ الْفُرْقَانَ عَلَىٰ عَبْدِهِ لِيَكُونَ لِلْعَالَمِينَ نَذِيرًا
(ख़ुदा) बहुत बाबरकत है जिसने अपने बन्दे (मोहम्मद) पर कुरान नाज़िल किया ताकि सारे जहॉन के लिए (ख़ुदा के अज़ाब से) डराने वाला हो
2الَّذِي لَهُ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَلَمْ يَتَّخِذْ وَلَدًا وَلَمْ يَكُن لَّهُ شَرِيكٌ فِي الْمُلْكِ وَخَلَقَ كُلَّ شَيْءٍ فَقَدَّرَهُ تَقْدِيرًا
वह खुदा कि सारे आसमान व ज़मीन की बादशाहत उसी की है और उसने (किसी को) न अपना लड़का बनाया और न सल्तनत में उसका कोई शरीक है और हर चीज़ को (उसी ने पैदा किया) फिर उस अन्दाज़े से दुरुस्त किया
3وَاتَّخَذُوا مِن دُونِهِ آلِهَةً لَّا يَخْلُقُونَ شَيْئًا وَهُمْ يُخْلَقُونَ وَلَا يَمْلِكُونَ لِأَنفُسِهِمْ ضَرًّا وَلَا نَفْعًا وَلَا يَمْلِكُونَ مَوْتًا وَلَا حَيَاةً وَلَا نُشُورًا
और लोगों ने उसके सिवा दूसरे दूसरे माबूद बना रखें हैं जो कुछ भी पैदा नहीं कर सकते बल्कि वह खुद दूसरे के पैदा किए हुए हैं और वह खुद अपने लिए भी न नुक़सान पर क़ाबू रखते हैं न नफा पर और न मौत ही पर एख़्तियार रखते हैं और न ज़िन्दगी पर और न मरने बाद जी उठने पर
अल-फुरकानकुरान सूची
77आयत
मक्कीअवतरण स्थान
1आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 1

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Thursday, October 1, 2026

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