अल-फुरकान · 48/77
अनुवाद उच्चारण — अल-फुरकान
وَهُوَ الَّذِي أَرْسَلَ الرِّيَاحَ بُشْرًا بَيْنَ يَدَيْ رَحْمَتِهِ ۚ وَأَنزَلْنَا مِنَ السَّمَاءِ مَاءً طَهُورًا ۝٤٨
Wa Huwal lazeee arsalar riyaaha bushram baina yadai rahmatih; wa anzalnaa minas samaaa`i maaa`an tahooraa
📖 हिंदी अर्थ
और वही तो वह (ख़ुदा) है जिसने अपनी रहमत (बारिश) के आगे आगे हवाओं को खुश ख़बरी देने के लिए (पेश ख़ेमा बना के) भेजा और हम ही ने आसमान से बहुत पाक और सुथरा हुआ पानी बरसाया
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • बुश्रन (بُشْرًا): खुशखबरी देने वाली।
  • बैन यदै रहमतिही (بَيْنَ يَدَيْ رَحْمَتِهِ): अपनी रहमत (बारिश) से पहले।
  • तहूरन (طَهُورًا): पाक और पवित्र करने वाला पानी, जो अपनी मूल प्रकृति पर कायम हो।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ही वह (सर्वशक्तिमान) है जिसने हवाओं को भेजा, जो बारिश की खुशखबरी लेकर आती हैं। ये हवाएँ बादलों को उठाती हैं और उन्हें उन जगहों की ओर ले जाती हैं जहाँ अल्लाह चाहता है, ताकि वे अपनी रहमत (बारिश) से पहले बंदों को सचेत कर दें। फिर अल्लाह ने आसमान से पाक और पवित्र करने वाला पानी उतारा — वह पानी जो अपनी मूल फितरत पर कायम है, न तो नापाक है और न ही उसमें कोई मिलावट है। यही पानी लोगों के लिए तहारत (पवित्रता) का ज़रिया बनता है, जिससे वे वुज़ू और ग़ुस्ल करते हैं, और इसी पानी से अल्लाह बंजर ज़मीन को हरा-भरा करता है, मुर्दा इलाक़ों को ज़िंदगी देता है, और इससे इंसानों और जानवरों की कसरत को सिंचाई करता है।

दावती पहलू:

इस आयत में अल्लाह की उन नेमतों का ज़िक्र है जिन्हें हम अक्सर आम समझकर अनदेखा कर देते हैं। ज़रा सोचिए — जब हवाएँ चलती हैं और बारिश के बादल आते हैं, तो यह अल्लाह की रहमत का पैग़ाम होता है। यह पानी जो हमारे लिए पाकी और सफ़ाई का ज़रिया बना, और जिससे हमारी ज़िंदगी क़ायम है — यह अल्लाह की महान दया का सबूत है। क्या हमें इस पर शुक्र नहीं करना चाहिए? क्या हमें अपने रब की इन नेमतों को पहचानकर उसकी इबादत और उसके हुक्मों पर अमल नहीं करना चाहिए? यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत हर जगह फैली हुई है, और उसका पानी सिर्फ शारीरिक पवित्रता ही नहीं, बल्कि आत्मिक पवित्रता की भी दावत देता है। जैसे यह पानी गंदगी को धोता है, वैसे ही तौबा और ईमान इंसान के गुनाहों को धो देते हैं। आइए, हम अल्लाह के इस एहसान को याद रखें और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक बनाएँ।

🎧 सुनें

📜 आयत 46-50 — अल-फुरकान

46ثُمَّ قَبَضْنَاهُ إِلَيْنَا قَبْضًا يَسِيرًا
फिर हमने उसको थोड़ा थोड़ा करके अपनी तरफ खीच लिया
47وَهُوَ الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ اللَّيْلَ لِبَاسًا وَالنَّوْمَ سُبَاتًا وَجَعَلَ النَّهَارَ نُشُورًا
और वही तो वह (ख़ुदा) है जिसने तुम्हारे वास्ते रात को पर्दा बनाया और नींद को राहत और दिन को (कारोबार के लिए) उठ खड़ा होने का वक्त बनाया
48وَهُوَ الَّذِي أَرْسَلَ الرِّيَاحَ بُشْرًا بَيْنَ يَدَيْ رَحْمَتِهِ ۚ وَأَنزَلْنَا مِنَ السَّمَاءِ مَاءً طَهُورًا
और वही तो वह (ख़ुदा) है जिसने अपनी रहमत (बारिश) के आगे आगे हवाओं को खुश ख़बरी देने के लिए (पेश ख़ेमा बना के) भेजा और हम ही ने आसमान से बहुत पाक और सुथरा हुआ पानी बरसाया
49لِّنُحْيِيَ بِهِ بَلْدَةً مَّيْتًا وَنُسْقِيَهُ مِمَّا خَلَقْنَا أَنْعَامًا وَأَنَاسِيَّ كَثِيرًا
ताकि हम उसके ज़रिए से मुर्दा (वीरान) शहर को ज़िन्दा (आबाद) कर दें और अपनी मख़लूकात में से चौपायों और बहुत से आदमियों को उससे सेराब करें
50وَلَقَدْ صَرَّفْنَاهُ بَيْنَهُمْ لِيَذَّكَّرُوا فَأَبَىٰ أَكْثَرُ النَّاسِ إِلَّا كُفُورًا
और हमने पानी को उनके दरमियान (तरह तरह से) तक़सीम किया ताकि लोग नसीहत हासिल करें मगर अक्सर लोगों ने नाशुक्री के सिवा कुछ न माना
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अनुवाद — अल-फुरकान 48

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Tuesday, August 18, 2026

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