अनुवाद — Tafsir
वही अल्लाह है जिसने तुम्हारे लिए रात को (अंधकार का) आवरण बनाया, और नींद को आराम और सुकून का ज़रिया ठहराया, और दिन को उठ खड़े होने (और काम-काज की तलाश) का समय बनाया।
शब्दों के अर्थ:
- لِبَاسًا (लिबासन): ढकने वाला, आवरण, छिपाने वाला। यहाँ रात के अंधकार को लिबास कहा गया है क्योंकि यह इंसान को दूसरों की नज़रों से छिपाता है।
- سُبَاتًا (सुबातन): आराम, सुकून, थकान दूर करने वाली चीज़। यह नींद की उस हालत को कहते हैं जिसमें इंसान को पूर्ण शांति मिलती है।
- نُشُورًا (नुशूरन): फैलना, उठना, जागना। यह उस हालत को कहते हैं जब इंसान नींद से उठकर अपने कामों और रोज़ी की तलाश में फैल जाता है।
व्याख्या:
अल्लाह तआला अपनी उन बेशुमार नेमतों का ज़िक्र कर रहा है जो उसने अपने बंदों पर की हैं। वही अल्लाह है जिसने रात को तुम्हारे लिए ऐसा आवरण बनाया जो तुम्हें ढक लेता है, जैसे कपड़ा इंसान के शरीर को ढकता है। रात का अंधकार तुम्हारे लिए एक पर्दा है जो तुम्हारी गतिविधियों को छिपाता है, तुम्हें दूसरों की नज़रों से बचाता है, और तुम्हें सुकून और प्राइवेसी देता है।
फिर अल्लाह ने नींद को तुम्हारे लिए "सुबात" (आराम) बनाया। यानी नींद तुम्हारे शरीर और दिमाग की थकान को दूर करने का ज़रिया है। यह वह चीज़ है जो तुम्हारी ताकत को लौटाती है, तुम्हारे दिल को सुकून देती है, और तुम्हें नई ज़िंदगी और ऊर्जा प्रदान करती है। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने नींद को मौत नहीं बनाया, बल्कि एक ऐसी हालत बनाई जिसमें इंसान को आराम मिले और फिर वह उठकर अपने कामों में लग जाए।
और फिर अल्लाह ने दिन को "नुशूर" (फैलने और उठने का समय) बनाया। यानी दिन वह समय है जब इंसान नींद से उठता है, अपने काम-काज, रोज़ी-रोटी की तलाश, इल्म हासिल करने, और दुनिया की भलाई के लिए फैल जाता है। दिन में इंसान अपनी ज़िंदगी के मामलात को अंजाम देता है।
यह अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत है कि उसने रात और दिन का यह सिलसिला बनाया। अगर हमेशा रात ही रहती तो इंसान अपने काम नहीं कर पाता, और अगर हमेशा दिन ही रहता तो इंसान को आराम नहीं मिलता। अल्लाह ने अपनी हिकमत से इन दोनों को बदल-बदल कर लाया है ताकि इंसान की ज़िंदगी आसान हो जाए।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह अपने बंदों पर कितना मेहरबान है। वह हर छोटी-बड़ी चीज़ में अपनी रहमत और हिकमत रखता है। जब हम रात की सुकून भरी नींद सोते हैं और सुबह ताज़ा होकर उठते हैं, तो हमें अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए और उसकी इन नेमतों को याद रखना चाहिए। यह नेमतें हमें अल्लाह की तरफ ले जाने वाली हैं, क्योंकि जो इंसान अल्लाह की नेमतों को पहचान लेता है, वह उसका शुक्र अदा करता है और उसकी इबादत में लग जाता है।
अल्लाह तआला हम सबको अपनी नेमतों का शुक्र अदा करने की तौफीक दे। आमीन।
📜 आयत 45-49 — अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 47
सूरा अल-फुरकान आयत 47 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वही तो वह (ख़ुदा) है जिसने तुम्हारे वास्ते रात…सूरा आयत 47/77 — अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फुरकान सुनें, अल-फुरकान अनुवाद, अल-फुरकान mp3, अल-फुरकान pdf. आयत 45–49. हिंदी अर्थ: اردو.
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Wednesday, August 19, 2026
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