अल-फुरकान · 8/77
अनुवाद उच्चारण — अल-फुरकान
أَوْ يُلْقَىٰ إِلَيْهِ كَنزٌ أَوْ تَكُونُ لَهُ جَنَّةٌ يَأْكُلُ مِنْهَا ۚ وَقَالَ الظَّالِمُونَ إِن تَتَّبِعُونَ إِلَّا رَجُلًا مَّسْحُورًا ۝٨
Aw yulqaaa ilaihi kanzun aw takoonu lahoo jannatuny yaakulu minhaa; wa qaalaz zaalimoona in tattabi`oona illaa rajulam mas hooraa
📖 हिंदी अर्थ
(कम से कम) इसके पास ख़ज़ाना ही ख़ज़ाना ही (आसमान से) गिरा दिया जाता या (और नहीं तो) उसके पास कोई बाग़ ही होता कि उससे खाता (पीता) और ये ज़ालिम (कुफ्फ़ार मोमिनों से) कहते हैं कि तुम लोग तो बस ऐसे आदमी की पैरवी करते हो जिस पर जादू कर दिया गया है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • कन्ज़ (خزانہ): खज़ाना, धन-दौलत का भंडार।
  • जन्नत (باغ): बाग़, बगीचा।
  • मस्हूर (جادو زدہ): जिस पर जादू कर दिया गया हो, जिसकी अक़्ल पर जादू का असर हो।

तफ़सीर:

मुशरिकीन (बहुदेववादियों) ने कहा कि यह व्यक्ति (जिसका अर्थ है मुहम्मद ﷺ) हमारी तरह ही खाना खाता है और बाज़ारों में चलता-फिरता है (रोज़ी कमाने के लिए)। उन्होंने आपत्ति जताई कि अगर यह सच में अल्लाह का रसूल है, तो अल्लाह उसके साथ कोई फ़रिश्ता क्यों नहीं भेजता जो उसकी सच्चाई की गवाही दे? या उस पर आसमान से कोई खज़ाना क्यों नहीं उतारा जाता? या उसके पास कोई बड़ा बाग़ क्यों नहीं होता जिसके फल वह खाता, ताकि उसे बाज़ारों में रोज़ी की तलाश में न चलना पड़े?

फिर उन ज़ालिमों (अत्याचारियों) ने अपने अनुयायियों से कहा: "तुम लोग (ऐ ईमानवालों!) एक ऐसे आदमी के पीछे चल रहे हो जिस पर जादू कर दिया गया है और उसकी अक़्ल पर जादू का असर है।" उनका कहना था कि यह व्यक्ति अपने दावे में सच्चा नहीं है, बल्कि जादू से प्रभावित है, इसलिए उसकी बातों पर ध्यान न दो।

यह आयत उन लोगों की हालत बयान करती है जो हक़ (सत्य) को कबूल करने के बजाय बहाने बनाते हैं। वे सच्चाई को मापने का पैमाना यह बनाते हैं कि रसूल कैसा दिखता है, क्या खाता है, कहाँ रहता है — जबकि सच्चाई की कसौटी उसका पैग़ाम और उसकी दलीलें हैं। अल्लाह ने अपने रसूलों को इंसान ही बनाकर भेजा, ताकि लोग उनसे सीधे सीख सकें और उनकी ज़िंदगी उनके लिए नमूना बने।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि हमें सच्चाई को उसके दलीलों की रोशनी में परखना चाहिए, न कि अपनी सोच और अंदाज़े से। अल्लाह के रसूल ﷺ की सबसे बड़ी निशानी उनका क़ुरआन और उनका उत्तम चरित्र था, न कि दौलत या शाही ठाठ-बाठ। जो लोग सच्चाई को ठुकराते हैं, वे हमेशा ऐसे ही बहाने ढूंढते हैं, लेकिन हक़ तो हक़ है, चाहे उसे कितना भी झुठलाया जाए। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के दीन को समझें और उस पर अमल करें, क्योंकि यही हमारी कामयाबी का रास्ता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 6-10 — अल-फुरकान

6قُلْ أَنزَلَهُ الَّذِي يَعْلَمُ السِّرَّ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ إِنَّهُ كَانَ غَفُورًا رَّحِيمًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि इसको उस शख्स ने नाज़िल किया है जो सारे आसमान व ज़मीन की पोशीदा बातों को ख़ूब जानता है बेशक वह बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
7وَقَالُوا مَالِ هَٰذَا الرَّسُولِ يَأْكُلُ الطَّعَامَ وَيَمْشِي فِي الْأَسْوَاقِ ۙ لَوْلَا أُنزِلَ إِلَيْهِ مَلَكٌ فَيَكُونَ مَعَهُ نَذِيرًا
और उन लोगों ने (ये भी) कहा कि ये कैसा रसूल है जो खाना खाता है और बाज़ारों में चलता है फिरता है उसके पास कोई फरिश्ता क्यों नहीं नाज़िल होता कि वह भी उसके साथ (ख़ुदा के अज़ाब से) डराने वाला होता
8أَوْ يُلْقَىٰ إِلَيْهِ كَنزٌ أَوْ تَكُونُ لَهُ جَنَّةٌ يَأْكُلُ مِنْهَا ۚ وَقَالَ الظَّالِمُونَ إِن تَتَّبِعُونَ إِلَّا رَجُلًا مَّسْحُورًا
(कम से कम) इसके पास ख़ज़ाना ही ख़ज़ाना ही (आसमान से) गिरा दिया जाता या (और नहीं तो) उसके पास कोई बाग़ ही होता कि उससे खाता (पीता) और ये ज़ालिम (कुफ्फ़ार मोमिनों से) कहते हैं कि तुम लोग तो बस ऐसे आदमी की पैरवी करते हो जिस पर जादू कर दिया गया है
9انظُرْ كَيْفَ ضَرَبُوا لَكَ الْأَمْثَالَ فَضَلُّوا فَلَا يَسْتَطِيعُونَ سَبِيلًا
(ऐ रसूल) ज़रा देखो तो कि इन लोगों ने तुम्हारे वास्ते कैसी कैसी फबत्तियां गढ़ी हैं और गुमराह हो गए तो अब ये लोग किसी तरह राह पर आ ही नहीं सकते
10تَبَارَكَ الَّذِي إِن شَاءَ جَعَلَ لَكَ خَيْرًا مِّن ذَٰلِكَ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ وَيَجْعَل لَّكَ قُصُورًا
ख़ुदा तो ऐसा बारबरकत है कि अगर चाहे तो (एक बाग़ क्या चीज़ है) इससे बेहतर बहुतेरे ऐसे बाग़ात तुम्हारे वास्ते पैदा करे जिन के नीचे नहरें जारी हों और (बाग़ात के अलावा उनमें) तुम्हारे वास्ते महल बना दे
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अनुवाद — अल-फुरकान 8

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Tuesday, August 18, 2026

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