अल-फुरकान · 9/77
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फुरकान
انظُرْ كَيْفَ ضَرَبُوا لَكَ الْأَمْثَالَ فَضَلُّوا فَلَا يَسْتَطِيعُونَ سَبِيلًا ۝٩
Unzur kaifa daraboo lakal amsaala fadalloo falaa yastatee`oona sabeelaa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) ज़रा देखो तो कि इन लोगों ने तुम्हारे वास्ते कैसी कैसी फबत्तियां गढ़ी हैं और गुमराह हो गए तो अब ये लोग किसी तरह राह पर आ ही नहीं सकते

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ضَرَبُوا لَكَ الْأَمْثَالَ: उन्होंने तुम्हारे लिए मिसालें बनाईं, यानी तुम्हें ऐसे नाम और विशेषण दिए जो ग़लत और बेतुके थे।
  • فَضَلُّوا: वे सत्य से भटक गए।
  • سَبِيلًا: कोई रास्ता या मार्ग।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! ज़रा ग़ौर करो और हैरान रह जाओ कि ये मक्का के मुशरिकीन तुम्हारे बारे में कैसी-कैसी अजीब और बेबुनियाद बातें कहते हैं। वे तुम्हें जादूगर, काहिन (ज्योतिषी), शायर और दीवाना कहते हैं, और तुम्हारे बारे में ऐसी मिसालें पेश करते हैं जो हक़ीक़त से बिल्कुल दूर हैं। उनका मक़सद ये है कि लोगों को तुमसे दूर करें और तुम्हारी दावत को बदनाम करें। लेकिन इन झूठी बातों की वजह से वे खुद सच्चाई से इतना दूर भटक गए हैं कि अब उन्हें कोई रास्ता नहीं मिलता। वे न तो हिदायत की तरफ कोई राह पा सकते हैं और न ही तुम्हारी सच्चाई और अमानतदारी पर कोई आरोप लगाने का कोई ज़रिया उनके पास बचा है। उनकी हर कोशिश नाकाम है, और उनके पास कोई दलील या सबूत नहीं है जिससे वे अपनी बात को साबित कर सकें।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई पर चलने वालों को हमेशा मुख़ालिफ़ों की तरफ से तानों और बेतुके इल्ज़ामों का सामना करना पड़ता है। लेकिन अल्लाह तआला अपने नबी को तसल्ली देते हैं कि ये सब बातें उनकी अपनी गुमराही की निशानी हैं, न कि तुम्हारी सच्चाई में कोई कमी। जब सच्चाई इतनी रौशन हो, तो झूठ अपनी ही टांगों पर खड़ा नहीं रह सकता। इसलिए ऐ ईमान वालों! जब तुम पर भी बेबुनियाद इल्ज़ाम लगाए जाएं, तो घबराना नहीं, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखो और अपने अमल से सच्चाई साबित करते रहो। याद रखो, हिदायत की राह उन्हीं को मिलती है जो सच्चाई के भूखे हों, और जो लोग झूठ और बहानों में उलझे रहते हैं, वे कभी मंज़िल तक नहीं पहुंच सकते।



📜 आयत 7-11 — सूरा अल-फुरकान

7وَقَالُوا مَالِ هَٰذَا الرَّسُولِ يَأْكُلُ الطَّعَامَ وَيَمْشِي فِي الْأَسْوَاقِ ۙ لَوْلَا أُنزِلَ إِلَيْهِ مَلَكٌ فَيَكُونَ مَعَهُ نَذِيرًا
और उन लोगों ने (ये भी) कहा कि ये कैसा रसूल है जो खाना खाता है और बाज़ारों में चलता है फिरता है उसके पास कोई फरिश्ता क्यों नहीं नाज़िल होता कि वह भी उसके साथ (ख़ुदा के अज़ाब से) डराने वाला होता
8أَوْ يُلْقَىٰ إِلَيْهِ كَنزٌ أَوْ تَكُونُ لَهُ جَنَّةٌ يَأْكُلُ مِنْهَا ۚ وَقَالَ الظَّالِمُونَ إِن تَتَّبِعُونَ إِلَّا رَجُلًا مَّسْحُورًا
(कम से कम) इसके पास ख़ज़ाना ही ख़ज़ाना ही (आसमान से) गिरा दिया जाता या (और नहीं तो) उसके पास कोई बाग़ ही होता कि उससे खाता (पीता) और ये ज़ालिम (कुफ्फ़ार मोमिनों से) कहते हैं कि तुम लोग तो बस ऐसे आदमी की पैरवी करते हो जिस पर जादू कर दिया गया है
9انظُرْ كَيْفَ ضَرَبُوا لَكَ الْأَمْثَالَ فَضَلُّوا فَلَا يَسْتَطِيعُونَ سَبِيلًا
(ऐ रसूल) ज़रा देखो तो कि इन लोगों ने तुम्हारे वास्ते कैसी कैसी फबत्तियां गढ़ी हैं और गुमराह हो गए तो अब ये लोग किसी तरह राह पर आ ही नहीं सकते
10تَبَارَكَ الَّذِي إِن شَاءَ جَعَلَ لَكَ خَيْرًا مِّن ذَٰلِكَ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ وَيَجْعَل لَّكَ قُصُورًا
ख़ुदा तो ऐसा बारबरकत है कि अगर चाहे तो (एक बाग़ क्या चीज़ है) इससे बेहतर बहुतेरे ऐसे बाग़ात तुम्हारे वास्ते पैदा करे जिन के नीचे नहरें जारी हों और (बाग़ात के अलावा उनमें) तुम्हारे वास्ते महल बना दे
11بَلْ كَذَّبُوا بِالسَّاعَةِ ۖ وَأَعْتَدْنَا لِمَن كَذَّبَ بِالسَّاعَةِ سَعِيرًا
(ये सब कुछ नहीं) बल्कि (सच यूँ है कि) उन लोगों ने क़यामत ही को झूठ समझा है और जिस शख्स ने क़यामत को झूठ समझा उसके लिए हमने जहन्नुम को (दहका के) तैयार कर रखा है
अल-फुरकानकुरान सूची
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अनुवाद — अल-फुरकान 9

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Monday, September 28, 2026

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