अश-शुआरा · 4/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
إِن نَّشَأْ نُنَزِّلْ عَلَيْهِم مِّنَ السَّمَاءِ آيَةً فَظَلَّتْ أَعْنَاقُهُمْ لَهَا خَاضِعِينَ ۝٤
In nashaa nunazzil `alaihim minas samaaa`i Aayatan fazallat a`naaquhum lahaa khaadi`een
📖 हिंदी अर्थ
अगर हम चाहें तो उन लोगों पर आसमान से कोई ऐसा मौजिज़ा नाज़िल करें कि उन लोगों की गर्दनें उसके सामने झुक जाएँ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • آيَةً: निशानी, चमत्कार (मुजिज़ा)
  • أَعْنَاقُهُمْ: उनकी गर्दनें
  • خَاضِعِينَ: झुके हुए, विनम्र, आज्ञाकारी

तफ़सीर:

अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को तसल्ली देते हुए फ़रमाता है कि ऐ नबी! अगर हम चाहें तो इन झुठलाने वालों पर आसमान से ऐसी निशानी (मुजिज़ा) उतार दें जो उन्हें डरा दे और उन्हें मजबूर कर दे कि वे ईमान ले आएँ। ऐसी निशानी कि उनकी गर्दनें उसके सामने झुक जाएँ और वे सबके सब ख़ुशू-ओ-ख़ुज़ू के साथ उसके आगे सर झुका दें, और कोई भी उसका इनकार न कर सके।

लेकिन अल्लाह तआला ने ऐसा नहीं किया, क्योंकि अल्लाह की हिक्मत (बुद्धिमत्ता) यह है कि वह अपने बंदों को आज़माइश में डालता है, ताकि देखे कि कौन ईमान लाता है बिना देखे, और कौन सिर्फ मजबूरी में झुकता है। असली ईमान वही है जो ग़ैब (अनदेखी चीज़ों) पर ईमान लाने से हो, इख़्तियार (स्वतंत्र विकल्प) के साथ, न कि मजबूरी से।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला ने हमें अक़्ल और समझ दी है, और कुरआन जैसी महान निशानी हमारे सामने रख दी है। हमें चाहिए कि हम इस पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करें और अपनी मर्ज़ी से, अपने दिल की ख़ुशी से अल्लाह के आगे सर झुकाएँ। यही ईमान है जो हमें अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुँचाता है। अल्लाह हमें सच्चे दिल से ईमान लाने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 2-6 — सूरा अश-शुआरा

2تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ الْمُبِينِ
ये वाज़ेए व रौशन किताब की आयतें है
3لَعَلَّكَ بَاخِعٌ نَّفْسَكَ أَلَّا يَكُونُوا مُؤْمِنِينَ
(ऐ रसूल) शायद तुम (इस फिक्र में) अपनी जान हलाक कर डालोगे कि ये (कुफ्फार) मोमिन क्यो नहीं हो जाते
4إِن نَّشَأْ نُنَزِّلْ عَلَيْهِم مِّنَ السَّمَاءِ آيَةً فَظَلَّتْ أَعْنَاقُهُمْ لَهَا خَاضِعِينَ
अगर हम चाहें तो उन लोगों पर आसमान से कोई ऐसा मौजिज़ा नाज़िल करें कि उन लोगों की गर्दनें उसके सामने झुक जाएँ
5وَمَا يَأْتِيهِم مِّن ذِكْرٍ مِّنَ الرَّحْمَٰنِ مُحْدَثٍ إِلَّا كَانُوا عَنْهُ مُعْرِضِينَ
और (लोगों का क़ायदा है कि) जब उनके पास कोई कोई नसीहत की बात ख़ुदा की तरफ से आयी तो ये लोग उससे मुँह फेरे बगैर नहीं रहे
6فَقَدْ كَذَّبُوا فَسَيَأْتِيهِمْ أَنبَاءُ مَا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
उन लोगों ने झुठलाया ज़रुर तो अनक़रीब ही (उन्हें) इस (अज़ाब) की हक़ीकत मालूम हो जाएगी जिसकी ये लोग हँसी उड़ाया करते थे
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
4आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 4

सूरा अश-शुआरा आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगर हम चाहें तो उन लोगों पर आसमान से कोई…

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Monday, September 28, 2026

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