अन-नमल · 11/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
إِلَّا مَن ظَلَمَ ثُمَّ بَدَّلَ حُسْنًا بَعْدَ سُوءٍ فَإِنِّي غَفُورٌ رَّحِيمٌ ۝١١
Illaa man zalama summa baddala husnam ba`da sooo`in fa innee Ghafoorur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
(मुतमइन हो जाते है) मगर जो शख्स गुनाह करे फिर गुनाह के बाद उसे नेकी (तौबा) से बदल दे तो अलबत्ता बड़ा बख्शने वाला मेहरबान हूँ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ظَلَمَ: अत्याचार किया, अपनी आत्मा पर ज़ुल्म किया (गुनाह किया)
  • بَدَّلَ: बदल दिया, परिवर्तित कर दिया
  • حُسْنًا: अच्छाई, नेकी
  • سُوءٍ: बुराई, गुनाह
  • غَفُورٌ رَّحِيمٌ: अत्यंत क्षमाशील, अत्यंत दयावान

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत अल्लाह तआला की असीम रहमत और क्षमा का सुंदर संदेश देती है। जब अल्लाह ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को पैग़म्बरी के लिए चुना और उन्हें अपने दीदार का शरीफ़ बनाया, तो उन्हें यह भी आश्वासन दिया कि जो लोग मेरे चुने हुए नबी और रसूल हैं, उन्हें मेरे यहाँ किसी प्रकार का भय नहीं होता। लेकिन फिर अल्लाह ने एक सामान्य नियम बताया जो हर इंसान पर लागू होता है—यदि कोई व्यक्ति गुनाह कर बैठे, अपनी आत्मा पर ज़ुल्म करे, लेकिन फिर वह सच्चे दिल से तौबा कर ले, अपनी बुराई को अच्छाई से बदल दे, तो अल्लाह उसे क्षमा कर देता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत का दामन बहुत विशाल है। कोई भी गुनाह इतना बड़ा नहीं कि अल्लाह की माफ़ी से वंचित रह जाए, बशर्ते कि इंसान सच्चे दिल से तौबा करे। अल्लाह ने खुद को "ग़फ़ूर" (बहुत क्षमा करने वाला) और "रहीम" (बहुत दयावान) बताया है। यानी उसकी क्षमा असीमित है और उसकी दया सबसे बढ़कर है।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि निराशा कभी नहीं करनी चाहिए। चाहे इंसान कितना ही गुनाहगार क्यों न हो, अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है। बस शर्त यह है कि गुनाह छोड़कर नेकी की राह अपनाई जाए। यही इस्लाम की सुंदरता है—यह निराशा की शिक्षा नहीं देता, बल्कि उम्मीद और सुधार का रास्ता दिखाता है।

अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को यह बात उस समय बताई जब वे अपने रब के दीदार के लिए आगे बढ़े थे। यह एक ऐसा संदेश है जो हर युग में हर इंसान के लिए रहमत और मार्गदर्शन का स्रोत है। हमें भी चाहिए कि हम अपनी गलतियों पर पछताएं, अल्लाह से माफ़ी मांगें और अपने जीवन को नेकी की ओर मोड़ें। अल्लाह की क्षमा की कोई सीमा नहीं, और उसकी दया सब कुछ घेरे हुए है।

🎧 सुनें

📜 आयत 9-13 — अन-नमल

9يَا مُوسَىٰ إِنَّهُ أَنَا اللَّهُ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
(हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है- ऐ मूसा इसमें शक नहीं कि मै ज़बरदस्त हिकमत वाला हूँ
10وَأَلْقِ عَصَاكَ ۚ فَلَمَّا رَآهَا تَهْتَزُّ كَأَنَّهَا جَانٌّ وَلَّىٰ مُدْبِرًا وَلَمْ يُعَقِّبْ ۚ يَا مُوسَىٰ لَا تَخَفْ إِنِّي لَا يَخَافُ لَدَيَّ الْمُرْسَلُونَ
और (हाँ) अपनी छड़ी तो (ज़मीन पर) डाल दो तो जब मूसा ने उसको देखा कि वह इस तरह लहरा रही है गोया वह जिन्दा अज़दहा है तो पिछले पावँ भाग चले और पीछे मुड़कर भी न देखा (तो हमने कहा) ऐ मूसा डरो नहीं हमारे पास पैग़म्बर लोग डरा नहीं करते हैं
11إِلَّا مَن ظَلَمَ ثُمَّ بَدَّلَ حُسْنًا بَعْدَ سُوءٍ فَإِنِّي غَفُورٌ رَّحِيمٌ
(मुतमइन हो जाते है) मगर जो शख्स गुनाह करे फिर गुनाह के बाद उसे नेकी (तौबा) से बदल दे तो अलबत्ता बड़ा बख्शने वाला मेहरबान हूँ
12وَأَدْخِلْ يَدَكَ فِي جَيْبِكَ تَخْرُجْ بَيْضَاءَ مِنْ غَيْرِ سُوءٍ ۖ فِي تِسْعِ آيَاتٍ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَقَوْمِهِ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمًا فَاسِقِينَ
(वहाँ) और अपना हाथ अपने गरेबॉ में तो डालो कि वह सफेद बुर्राक़ होकर बेऐब निकल आएगा (ये वह मौजिज़े) मिन जुमला नौ मोजिज़ात के हैं जो तुमको मिलेगें तुम फिरऔन और उसकी क़ौम के पास (जाओ) क्योंकि वह बदकिरदार लोग हैं
13فَلَمَّا جَاءَتْهُمْ آيَاتُنَا مُبْصِرَةً قَالُوا هَٰذَا سِحْرٌ مُّبِينٌ
तो जब उनके पास हमारे ऑंखें खोल देने वाले मैजिज़े आए तो कहने लगे ये तो खुला हुआ जादू है
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अनुवाद — अन-नमल 11

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Tuesday, August 18, 2026

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