Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ظَلَمَ: अत्याचार किया, अपनी आत्मा पर ज़ुल्म किया (गुनाह किया)
- بَدَّلَ: बदल दिया, परिवर्तित कर दिया
- حُسْنًا: अच्छाई, नेकी
- سُوءٍ: बुराई, गुनाह
- غَفُورٌ رَّحِيمٌ: अत्यंत क्षमाशील, अत्यंत दयावान
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत अल्लाह तआला की असीम रहमत और क्षमा का सुंदर संदेश देती है। जब अल्लाह ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को पैग़म्बरी के लिए चुना और उन्हें अपने दीदार का शरीफ़ बनाया, तो उन्हें यह भी आश्वासन दिया कि जो लोग मेरे चुने हुए नबी और रसूल हैं, उन्हें मेरे यहाँ किसी प्रकार का भय नहीं होता। लेकिन फिर अल्लाह ने एक सामान्य नियम बताया जो हर इंसान पर लागू होता है—यदि कोई व्यक्ति गुनाह कर बैठे, अपनी आत्मा पर ज़ुल्म करे, लेकिन फिर वह सच्चे दिल से तौबा कर ले, अपनी बुराई को अच्छाई से बदल दे, तो अल्लाह उसे क्षमा कर देता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत का दामन बहुत विशाल है। कोई भी गुनाह इतना बड़ा नहीं कि अल्लाह की माफ़ी से वंचित रह जाए, बशर्ते कि इंसान सच्चे दिल से तौबा करे। अल्लाह ने खुद को "ग़फ़ूर" (बहुत क्षमा करने वाला) और "रहीम" (बहुत दयावान) बताया है। यानी उसकी क्षमा असीमित है और उसकी दया सबसे बढ़कर है।
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि निराशा कभी नहीं करनी चाहिए। चाहे इंसान कितना ही गुनाहगार क्यों न हो, अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है। बस शर्त यह है कि गुनाह छोड़कर नेकी की राह अपनाई जाए। यही इस्लाम की सुंदरता है—यह निराशा की शिक्षा नहीं देता, बल्कि उम्मीद और सुधार का रास्ता दिखाता है।
अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को यह बात उस समय बताई जब वे अपने रब के दीदार के लिए आगे बढ़े थे। यह एक ऐसा संदेश है जो हर युग में हर इंसान के लिए रहमत और मार्गदर्शन का स्रोत है। हमें भी चाहिए कि हम अपनी गलतियों पर पछताएं, अल्लाह से माफ़ी मांगें और अपने जीवन को नेकी की ओर मोड़ें। अल्लाह की क्षमा की कोई सीमा नहीं, और उसकी दया सब कुछ घेरे हुए है।
📜 आयत 9-13 — सूरा अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 11
सूरा अन-नमल आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (मुतमइन हो जाते है) मगर जो शख्स गुनाह करे फिर…सूरा आयत 11/93 — सूरा अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नमल सुनें, सूरा अन-नमल अनुवाद, सूरा अन-नमल mp3, सूरा अन-नमल pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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