अन-नमल · 10/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
وَأَلْقِ عَصَاكَ ۚ فَلَمَّا رَآهَا تَهْتَزُّ كَأَنَّهَا جَانٌّ وَلَّىٰ مُدْبِرًا وَلَمْ يُعَقِّبْ ۚ يَا مُوسَىٰ لَا تَخَفْ إِنِّي لَا يَخَافُ لَدَيَّ الْمُرْسَلُونَ ۝١٠
Wa alqi `asaak; falammmaa ra aahaa tahtazzu ka annahaa jaaannunw wallaa mudbiranw wa lam yu`aqqib; yaa Moosaa laa takhaf innee laa yakhaafu ladaiyal mursaloon
📖 हिंदी अर्थ
और (हाँ) अपनी छड़ी तो (ज़मीन पर) डाल दो तो जब मूसा ने उसको देखा कि वह इस तरह लहरा रही है गोया वह जिन्दा अज़दहा है तो पिछले पावँ भाग चले और पीछे मुड़कर भी न देखा (तो हमने कहा) ऐ मूसा डरो नहीं हमारे पास पैग़म्बर लोग डरा नहीं करते हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَهْتَزُّ: हिलना-डुलना, तेज़ी से हरकत करना।
  • جَانٌّ: छोटा साँप, जो बहुत तेज़ी से चलता है।
  • وَلَّى مُدْبِرًا: पीठ फेरकर भाग गया।
  • وَلَمْ يُعَقِّبْ: वापस नहीं लौटा, पीछे मुड़कर नहीं देखा।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब मूसा (अलैहिस्सलाम) आग के पास पहुँचे, तो अल्लाह तआला ने उन्हें पुकारा और उस पवित्र स्थान को बरकत वाला बनाया। फिर अल्लाह ने उन्हें आदेश दिया: "अपनी लाठी डाल दो।" मूसा (अलैहिस्सलाम) ने आज्ञा का पालन किया और लाठी डाल दी। तभी वह लाठी एक तेज़-तर्रार साँप में बदल गई, जो इधर-उधर बड़ी फुर्ती से हिल रही थी। यह देखकर मूसा (अलैहिस्सलाम) डर गए और पीठ फेरकर भाग खड़े हुए, और वापस नहीं लौटे।

तब अल्लाह तआला ने उन्हें पुकारा: "ऐ मूसा! डरो मत। मेरे पास भेजे गए रसूलों को किसी चीज़ का भय नहीं होता।" यानी जिसे अल्लाह ने अपनी रिसालत (पैग़म्बरी) के लिए चुन लिया, उसे न तो साँप से डरना चाहिए और न ही किसी और चीज़ से, क्योंकि अल्लाह की हिफ़ाज़त उसके साथ होती है। यह मूसा (अलैहिस्सलाम) के लिए एक बड़ी तसल्ली और निशानी थी कि अल्लाह ने उन्हें अपने दीन के काम के लिए तैयार किया है।

यहाँ से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह पर भरोसा करने वाले बंदे को किसी मख़लूक़ (प्राणी) से डरना नहीं चाहिए। अल्लाह अपने नबियों और अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त करता है। साथ ही, यह भी सीख मिलती है कि जब अल्लाह की तरफ से कोई आदेश आए, तो उसे तुरंत मानना चाहिए, चाहे वह कितना ही अजीब या डरावना क्यों न लगे। अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है, और वही सबसे बड़ा हिमायती और मददगार है।

🎧 सुनें

📜 आयत 8-12 — अन-नमल

8فَلَمَّا جَاءَهَا نُودِيَ أَن بُورِكَ مَن فِي النَّارِ وَمَنْ حَوْلَهَا وَسُبْحَانَ اللَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
ग़रज़ जब मूसा इस आग के पास आए तो उनको आवाज़ आयी कि मुबारक है वह जो आग में (तजल्ली दिखाना) है और जो उसके गिर्द है और वह ख़ुदा सारे जहाँ का पालने वाला है
9يَا مُوسَىٰ إِنَّهُ أَنَا اللَّهُ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
(हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है- ऐ मूसा इसमें शक नहीं कि मै ज़बरदस्त हिकमत वाला हूँ
10وَأَلْقِ عَصَاكَ ۚ فَلَمَّا رَآهَا تَهْتَزُّ كَأَنَّهَا جَانٌّ وَلَّىٰ مُدْبِرًا وَلَمْ يُعَقِّبْ ۚ يَا مُوسَىٰ لَا تَخَفْ إِنِّي لَا يَخَافُ لَدَيَّ الْمُرْسَلُونَ
और (हाँ) अपनी छड़ी तो (ज़मीन पर) डाल दो तो जब मूसा ने उसको देखा कि वह इस तरह लहरा रही है गोया वह जिन्दा अज़दहा है तो पिछले पावँ भाग चले और पीछे मुड़कर भी न देखा (तो हमने कहा) ऐ मूसा डरो नहीं हमारे पास पैग़म्बर लोग डरा नहीं करते हैं
11إِلَّا مَن ظَلَمَ ثُمَّ بَدَّلَ حُسْنًا بَعْدَ سُوءٍ فَإِنِّي غَفُورٌ رَّحِيمٌ
(मुतमइन हो जाते है) मगर जो शख्स गुनाह करे फिर गुनाह के बाद उसे नेकी (तौबा) से बदल दे तो अलबत्ता बड़ा बख्शने वाला मेहरबान हूँ
12وَأَدْخِلْ يَدَكَ فِي جَيْبِكَ تَخْرُجْ بَيْضَاءَ مِنْ غَيْرِ سُوءٍ ۖ فِي تِسْعِ آيَاتٍ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَقَوْمِهِ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمًا فَاسِقِينَ
(वहाँ) और अपना हाथ अपने गरेबॉ में तो डालो कि वह सफेद बुर्राक़ होकर बेऐब निकल आएगा (ये वह मौजिज़े) मिन जुमला नौ मोजिज़ात के हैं जो तुमको मिलेगें तुम फिरऔन और उसकी क़ौम के पास (जाओ) क्योंकि वह बदकिरदार लोग हैं
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अनुवाद — अन-नमल 10

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Tuesday, August 18, 2026

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