अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَفْصَحُ مِنِّي لِسَانًا: मेरी ज़ुबान से ज़्यादा स्पष्ट और फ़सीह बोलने वाला।
- رِدْءًا: मददगार, सहायक।
- يُصَدِّقُنِي: मेरी पुष्टि करे, मेरे कहे की तस्दीक़ करे।
तफ़सीर:
हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब से दुआ करते हुए कहा कि ऐ मेरे पालनहार! मैंने फ़िरऔन की क़ौम में से एक शख़्स को मार डाला था, इसलिए मुझे डर है कि वे मुझे क़त्ल कर देंगे। और मेरा भाई हारून मुझसे ज़्यादा स्पष्ट और रवाँ ज़ुबान रखता है, उसकी बयानबीनी मुझसे बेहतर है। इसलिए तू उसे मेरे साथ मददगार बनाकर भेज दे, ताकि वह मेरी तस्दीक़ करे और मेरे पैग़ाम को उन तक पहुँचाने में मेरा साथ दे। मैं डरता हूँ कि फ़िरऔन और उसकी क़ौम मुझे झुठला देंगे, जैसा कि मुझसे पहले आए रसूलों के साथ उनकी क़ौमों ने किया था।
यह दुआ हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की नम्रता, अपने भाई के प्रति उनके प्यार और दावत-ए-हक़ के लिए उनकी गहरी फ़िक्र को दर्शाती है। वे चाहते थे कि हक़ का पैग़ाम सबसे अच्छे अंदाज़ में लोगों तक पहुँचे, इसलिए उन्होंने अपने भाई हारून को शामिल करने की गुज़ारिश की, जो फ़सीह और रवाँ ज़ुबान के मालिक थे। यह हमें सिखाता है कि दावत-ए-दीन के काम में साथियों की मदद लेना और बेहतर अंदाज़-ए-बयान को अहमियत देना कितना ज़रूरी है।
अल्लाह ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की यह दुआ क़बूल की और हारून (अलैहिस्सलाम) को उनका साथी और मददगार बनाकर भेजा। यह हमारे लिए इस बात की तरग़ीब है कि हम भी अपने कामों में अच्छे और नेक साथियों का इंतिख़ाब करें, और जब हम किसी नेक काम की दावत दें, तो हिकमत और अच्छे अंदाज़ से दें, ताकि लोगों के दिलों पर हक़ का पैग़ाम गहरा असर छोड़े। यह भी याद रखें कि अल्लाह अपने बंदों की दुआएँ सुनता है और उन्हें बेहतरीन तरीक़े से क़बूल करता है।
📜 आयत 32-36 — अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 34
सूरा अल-क़सस आयत 34 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मेरा भाई हारुन वह मुझसे (ज़बान में ज्यादा) फ़सीह…सूरा आयत 34/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 32–36. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








