अल-क़सस · 34/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़सस
وَأَخِي هَارُونُ هُوَ أَفْصَحُ مِنِّي لِسَانًا فَأَرْسِلْهُ مَعِيَ رِدْءًا يُصَدِّقُنِي ۖ إِنِّي أَخَافُ أَن يُكَذِّبُونِ ۝٣٤
Wa akhee Haaroonu huwa afsahu minnee lisaanan fa arsilhu ma`iya rid ai yusaddiquneee innee akhaafu ai yukazziboon
📖 हिंदी अर्थ
और मेरा भाई हारुन वह मुझसे (ज़बान में ज्यादा) फ़सीह है तो तू उसे मेरे साथ मेरा मददगार बनाकर भेज कि वह मेरी तसदीक करे क्योंकि यक़ीनन मै इस बात से डरता हूँ कि मुझे वह लोग झुठला देंगे (तो उनके जवाब के लिए गोयाइ की ज़रुरत है)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَفْصَحُ مِنِّي لِسَانًا: मेरी ज़ुबान से ज़्यादा स्पष्ट और फ़सीह बोलने वाला।
  • رِدْءًا: मददगार, सहायक।
  • يُصَدِّقُنِي: मेरी पुष्टि करे, मेरे कहे की तस्दीक़ करे।

तफ़सीर:

हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब से दुआ करते हुए कहा कि ऐ मेरे पालनहार! मैंने फ़िरऔन की क़ौम में से एक शख़्स को मार डाला था, इसलिए मुझे डर है कि वे मुझे क़त्ल कर देंगे। और मेरा भाई हारून मुझसे ज़्यादा स्पष्ट और रवाँ ज़ुबान रखता है, उसकी बयानबीनी मुझसे बेहतर है। इसलिए तू उसे मेरे साथ मददगार बनाकर भेज दे, ताकि वह मेरी तस्दीक़ करे और मेरे पैग़ाम को उन तक पहुँचाने में मेरा साथ दे। मैं डरता हूँ कि फ़िरऔन और उसकी क़ौम मुझे झुठला देंगे, जैसा कि मुझसे पहले आए रसूलों के साथ उनकी क़ौमों ने किया था।

यह दुआ हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की नम्रता, अपने भाई के प्रति उनके प्यार और दावत-ए-हक़ के लिए उनकी गहरी फ़िक्र को दर्शाती है। वे चाहते थे कि हक़ का पैग़ाम सबसे अच्छे अंदाज़ में लोगों तक पहुँचे, इसलिए उन्होंने अपने भाई हारून को शामिल करने की गुज़ारिश की, जो फ़सीह और रवाँ ज़ुबान के मालिक थे। यह हमें सिखाता है कि दावत-ए-दीन के काम में साथियों की मदद लेना और बेहतर अंदाज़-ए-बयान को अहमियत देना कितना ज़रूरी है।

अल्लाह ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की यह दुआ क़बूल की और हारून (अलैहिस्सलाम) को उनका साथी और मददगार बनाकर भेजा। यह हमारे लिए इस बात की तरग़ीब है कि हम भी अपने कामों में अच्छे और नेक साथियों का इंतिख़ाब करें, और जब हम किसी नेक काम की दावत दें, तो हिकमत और अच्छे अंदाज़ से दें, ताकि लोगों के दिलों पर हक़ का पैग़ाम गहरा असर छोड़े। यह भी याद रखें कि अल्लाह अपने बंदों की दुआएँ सुनता है और उन्हें बेहतरीन तरीक़े से क़बूल करता है।



📜 आयत 32-36 — सूरा अल-क़सस

32اسْلُكْ يَدَكَ فِي جَيْبِكَ تَخْرُجْ بَيْضَاءَ مِنْ غَيْرِ سُوءٍ وَاضْمُمْ إِلَيْكَ جَنَاحَكَ مِنَ الرَّهْبِ ۖ فَذَانِكَ بُرْهَانَانِ مِن رَّبِّكَ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمًا فَاسِقِينَ
(अच्छा और लो) अपना हाथ गरेबान में डालो (और निकाल लो) तो सफेद बुर्राक़ होकर बेऐब निकल आया और ख़ौफ की (वजह) से अपने बाजू अपनी तरफ समेट लो (ताकि ख़ौफ जाता रहे) ग़रज़ ये दोनों (असा व यदे बैज़ा) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (तुम्हारी नुबूवत की) दो दलीलें फिरऔन और उसके दरबार के सरदारों के वास्ते हैं और इसमें शक नहीं कि वह बदकार लोग थे
33قَالَ رَبِّ إِنِّي قَتَلْتُ مِنْهُمْ نَفْسًا فَأَخَافُ أَن يَقْتُلُونِ
मूसा ने अर्ज़ की परवरदिगार मैने उनमें से एक शख्स को मार डाला था तो मै डरता हूँ कहीं (उसके बदले) मुझे न मार डालें
34وَأَخِي هَارُونُ هُوَ أَفْصَحُ مِنِّي لِسَانًا فَأَرْسِلْهُ مَعِيَ رِدْءًا يُصَدِّقُنِي ۖ إِنِّي أَخَافُ أَن يُكَذِّبُونِ
और मेरा भाई हारुन वह मुझसे (ज़बान में ज्यादा) फ़सीह है तो तू उसे मेरे साथ मेरा मददगार बनाकर भेज कि वह मेरी तसदीक करे क्योंकि यक़ीनन मै इस बात से डरता हूँ कि मुझे वह लोग झुठला देंगे (तो उनके जवाब के लिए गोयाइ की ज़रुरत है)
35قَالَ سَنَشُدُّ عَضُدَكَ بِأَخِيكَ وَنَجْعَلُ لَكُمَا سُلْطَانًا فَلَا يَصِلُونَ إِلَيْكُمَا ۚ بِآيَاتِنَا أَنتُمَا وَمَنِ اتَّبَعَكُمَا الْغَالِبُونَ
फ़रमाया अच्छा हम अनक़रीब तुम्हारे भाई की वजह से तुम्हारे बाज़ू क़वी कर देगें और तुम दोनों को ऐसा ग़लबा अता करेंगें कि फिरऔनी लोग तुम दोनों तक हमारे मौजिज़े की वजह से पहुँच भी न सकेंगे लो जाओ तुम दोनो और तुम्हारे पैरवी करने वाले गालिब रहेंगे
36فَلَمَّا جَاءَهُم مُّوسَىٰ بِآيَاتِنَا بَيِّنَاتٍ قَالُوا مَا هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُّفْتَرًى وَمَا سَمِعْنَا بِهَٰذَا فِي آبَائِنَا الْأَوَّلِينَ
ग़रज़ जब मूसा हमारे वाजेए व रौशन मौजिज़े लेकर उनके पास आए तो वह लोग कहने लगे कि ये तो बस अपने दिल का गढ़ा हुआ जादू है और हमने तो अपने अगले बाप दादाओं (के ज़माने) में ऐसी बात सुनी भी नहीें
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अनुवाद — अल-क़सस 34

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Friday, October 2, 2026

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