अल-क़सस · 35/88
अनुवाद उच्चारण — अल-क़सस
قَالَ سَنَشُدُّ عَضُدَكَ بِأَخِيكَ وَنَجْعَلُ لَكُمَا سُلْطَانًا فَلَا يَصِلُونَ إِلَيْكُمَا ۚ بِآيَاتِنَا أَنتُمَا وَمَنِ اتَّبَعَكُمَا الْغَالِبُونَ ۝٣٥
Qaala sanashuddu `adudaka bi akheeka wa naj`alu lakumaa sultaanan falaa yasiloona ilaikumaa; bi Aayaatinaa antumaa wa manit taba`akumal ghaaliboon
📖 हिंदी अर्थ
फ़रमाया अच्छा हम अनक़रीब तुम्हारे भाई की वजह से तुम्हारे बाज़ू क़वी कर देगें और तुम दोनों को ऐसा ग़लबा अता करेंगें कि फिरऔनी लोग तुम दोनों तक हमारे मौजिज़े की वजह से पहुँच भी न सकेंगे लो जाओ तुम दोनो और तुम्हारे पैरवी करने वाले गालिब रहेंगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَنَشُدُّ عَضُدَكَ – हम तुम्हारी बाँह को मज़बूत करेंगे, अर्थात तुम्हें शक्ति और सहारा देंगे।
  • سُلْطَانًا – प्रभुत्व, शक्ति, प्रमाण और अधिकार।
  • لَا يَصِلُونَ إِلَيْكُمَا – वे तुम दोनों तक (किसी बुराई के साथ) नहीं पहुँच सकेंगे।
  • الْغَالِبُونَ – विजयी, प्रभावी।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब से दुआ की कि मेरे भाई हारून को मेरा सहायक बना दे, तो अल्लाह तआला ने उनकी दुआ क़बूल करते हुए फ़रमाया: "हम तुम्हारी बाँह को तुम्हारे भाई के साथ मज़बूत करेंगे।" यानी अल्लाह ने उन्हें यक़ीन दिलाया कि अकेले नहीं, बल्कि हारून (अलैहिस्सलाम) की मदद से तुम्हारी ताक़त दुगनी हो जाएगी। यह अल्लाह की रहमत थी कि उसने भाई को भाई का सहारा बनाया, और इससे मूसा (अलैहिस्सलाम) का दिल मज़बूत हुआ।

फिर अल्लाह ने फ़रमाया: "और हम तुम दोनों को ऐसा प्रभुत्व और प्रमाण देंगे कि वे (फ़िरऔन और उसके साथी) तुम तक नहीं पहुँच सकेंगे।" यानी अल्लाह तआला ने उन्हें वह शक्ति, हुज्जत और नुबूव्वत का अधिकार दिया जिसके आगे फ़िरऔन की सारी ताक़त बेकार हो गई। यह अल्लाह का वादा था कि वह अपने नबियों की हिफ़ाज़त करता है, और उनके दुश्मन उन्हें कोई नुक़्सान नहीं पहुँचा सकते।

आख़िर में अल्लाह ने फ़रमाया: "तुम दोनों और तुम्हारे पैरोकार ही विजयी रहोगे।" यह एक बड़ी ख़ुशख़बरी थी कि सिर्फ़ मूसा और हारून ही नहीं, बल्कि जो कोई उनके साथ ईमान लाया और उनके रास्ते पर चला, वह भी फ़िरऔन और उसकी सरकशी पर ग़ालिब आएगा। यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है कि सच्चाई और ईमान की ताक़त आख़िर में बुलंद होती है, चाहे दुश्मन कितना भी ताक़तवर क्यों न हो।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह पर भरोसा रखने वालों को कभी अकेला नहीं छोड़ा जाता। जब हम अल्लाह की राह में कदम बढ़ाते हैं, तो वह हमारे लिए सहारे और मदद के ज़रिए पैदा करता है। चाहे दुनिया की ताक़तें कितनी भी बड़ी हों, अल्लाह का वादा है कि सच्चाई और ईमान ही आख़िर में फ़तह पाता है। यह आयत हर मुसलमान के दिल में उम्मीद और हिम्मत पैदा करती है कि अगर हम अल्लाह के दीन पर क़ायम रहें, तो अल्लाह हमें ज़रूर कामयाबी देगा, जैसे उसने मूसा और हारून (अलैहिमास्सलाम) को फ़िरऔन जैसे ज़ालिम पर ग़ालिब बनाया। यही अल्लाह का क़ानून है — सब्र और तक़वा के साथ नुसरत (मदद) ज़रूर आती है।



📜 आयत 33-37 — अल-क़सस

33قَالَ رَبِّ إِنِّي قَتَلْتُ مِنْهُمْ نَفْسًا فَأَخَافُ أَن يَقْتُلُونِ
मूसा ने अर्ज़ की परवरदिगार मैने उनमें से एक शख्स को मार डाला था तो मै डरता हूँ कहीं (उसके बदले) मुझे न मार डालें
34وَأَخِي هَارُونُ هُوَ أَفْصَحُ مِنِّي لِسَانًا فَأَرْسِلْهُ مَعِيَ رِدْءًا يُصَدِّقُنِي ۖ إِنِّي أَخَافُ أَن يُكَذِّبُونِ
और मेरा भाई हारुन वह मुझसे (ज़बान में ज्यादा) फ़सीह है तो तू उसे मेरे साथ मेरा मददगार बनाकर भेज कि वह मेरी तसदीक करे क्योंकि यक़ीनन मै इस बात से डरता हूँ कि मुझे वह लोग झुठला देंगे (तो उनके जवाब के लिए गोयाइ की ज़रुरत है)
35قَالَ سَنَشُدُّ عَضُدَكَ بِأَخِيكَ وَنَجْعَلُ لَكُمَا سُلْطَانًا فَلَا يَصِلُونَ إِلَيْكُمَا ۚ بِآيَاتِنَا أَنتُمَا وَمَنِ اتَّبَعَكُمَا الْغَالِبُونَ
फ़रमाया अच्छा हम अनक़रीब तुम्हारे भाई की वजह से तुम्हारे बाज़ू क़वी कर देगें और तुम दोनों को ऐसा ग़लबा अता करेंगें कि फिरऔनी लोग तुम दोनों तक हमारे मौजिज़े की वजह से पहुँच भी न सकेंगे लो जाओ तुम दोनो और तुम्हारे पैरवी करने वाले गालिब रहेंगे
36فَلَمَّا جَاءَهُم مُّوسَىٰ بِآيَاتِنَا بَيِّنَاتٍ قَالُوا مَا هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُّفْتَرًى وَمَا سَمِعْنَا بِهَٰذَا فِي آبَائِنَا الْأَوَّلِينَ
ग़रज़ जब मूसा हमारे वाजेए व रौशन मौजिज़े लेकर उनके पास आए तो वह लोग कहने लगे कि ये तो बस अपने दिल का गढ़ा हुआ जादू है और हमने तो अपने अगले बाप दादाओं (के ज़माने) में ऐसी बात सुनी भी नहीें
37وَقَالَ مُوسَىٰ رَبِّي أَعْلَمُ بِمَن جَاءَ بِالْهُدَىٰ مِنْ عِندِهِ وَمَن تَكُونُ لَهُ عَاقِبَةُ الدَّارِ ۖ إِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الظَّالِمُونَ
और मूसा ने कहा मेरा परवरदिगार उस शख्स से ख़ूब वाक़िफ़ है जो उसकी बारगाह से हिदायत लेकर आया है और उस शख्स से भी जिसके लिए आख़िरत का घर है इसमें तो शक ही नहीं कि ज़ालिम लोग कामयाब नहीं होते
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अनुवाद — अल-क़सस 35

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Tuesday, August 18, 2026

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