Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سَنَشُدُّ عَضُدَكَ – हम तुम्हारी बाँह को मज़बूत करेंगे, अर्थात तुम्हें शक्ति और सहारा देंगे।
- سُلْطَانًا – प्रभुत्व, शक्ति, प्रमाण और अधिकार।
- لَا يَصِلُونَ إِلَيْكُمَا – वे तुम दोनों तक (किसी बुराई के साथ) नहीं पहुँच सकेंगे।
- الْغَالِبُونَ – विजयी, प्रभावी।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब से दुआ की कि मेरे भाई हारून को मेरा सहायक बना दे, तो अल्लाह तआला ने उनकी दुआ क़बूल करते हुए फ़रमाया: "हम तुम्हारी बाँह को तुम्हारे भाई के साथ मज़बूत करेंगे।" यानी अल्लाह ने उन्हें यक़ीन दिलाया कि अकेले नहीं, बल्कि हारून (अलैहिस्सलाम) की मदद से तुम्हारी ताक़त दुगनी हो जाएगी। यह अल्लाह की रहमत थी कि उसने भाई को भाई का सहारा बनाया, और इससे मूसा (अलैहिस्सलाम) का दिल मज़बूत हुआ।
फिर अल्लाह ने फ़रमाया: "और हम तुम दोनों को ऐसा प्रभुत्व और प्रमाण देंगे कि वे (फ़िरऔन और उसके साथी) तुम तक नहीं पहुँच सकेंगे।" यानी अल्लाह तआला ने उन्हें वह शक्ति, हुज्जत और नुबूव्वत का अधिकार दिया जिसके आगे फ़िरऔन की सारी ताक़त बेकार हो गई। यह अल्लाह का वादा था कि वह अपने नबियों की हिफ़ाज़त करता है, और उनके दुश्मन उन्हें कोई नुक़्सान नहीं पहुँचा सकते।
आख़िर में अल्लाह ने फ़रमाया: "तुम दोनों और तुम्हारे पैरोकार ही विजयी रहोगे।" यह एक बड़ी ख़ुशख़बरी थी कि सिर्फ़ मूसा और हारून ही नहीं, बल्कि जो कोई उनके साथ ईमान लाया और उनके रास्ते पर चला, वह भी फ़िरऔन और उसकी सरकशी पर ग़ालिब आएगा। यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है कि सच्चाई और ईमान की ताक़त आख़िर में बुलंद होती है, चाहे दुश्मन कितना भी ताक़तवर क्यों न हो।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह पर भरोसा रखने वालों को कभी अकेला नहीं छोड़ा जाता। जब हम अल्लाह की राह में कदम बढ़ाते हैं, तो वह हमारे लिए सहारे और मदद के ज़रिए पैदा करता है। चाहे दुनिया की ताक़तें कितनी भी बड़ी हों, अल्लाह का वादा है कि सच्चाई और ईमान ही आख़िर में फ़तह पाता है। यह आयत हर मुसलमान के दिल में उम्मीद और हिम्मत पैदा करती है कि अगर हम अल्लाह के दीन पर क़ायम रहें, तो अल्लाह हमें ज़रूर कामयाबी देगा, जैसे उसने मूसा और हारून (अलैहिमास्सलाम) को फ़िरऔन जैसे ज़ालिम पर ग़ालिब बनाया। यही अल्लाह का क़ानून है — सब्र और तक़वा के साथ नुसरत (मदद) ज़रूर आती है।
📜 आयत 33-37 — सूरा अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 35
सूरा अल-क़सस आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फ़रमाया अच्छा हम अनक़रीब तुम्हारे भाई की वजह से तुम्हारे…सूरा आयत 35/88 — सूरा अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़सस सुनें, सूरा अल-क़सस अनुवाद, सूरा अल-क़सस mp3, सूरा अल-क़सस pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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