Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لِيُمَحِّصَ: परखना, शुद्ध करना, छानना। अर्थात् किसी चीज़ को उसके दोषों से अलग करके खालिस कर देना।
- يَمْحَقَ: नष्ट करना, मिटा देना, सत्यानाश कर देना।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने उहुद के मैदान में मुसलमानों को जो कठिनाई और परीक्षा दी, उसके पीछे कई बड़ी हिकमतें (गूढ़ रहस्य) थीं। उनमें से एक यह थी कि अल्लाह ईमानवालों को अच्छी तरह परखे और उन्हें उनके गुनाहों से पाक कर दे। जिस प्रकार सुनार सोने को आग में डालकर उसकी मिलावट को अलग करता है, उसी प्रकार यह परीक्षा मोमिनों के दिलों को शुद्ध करने और उनके नफ़्स को गुनाहों की मैल से साफ करने का ज़रिया बनी। साथ ही, इस परीक्षा से मुनाफ़िक़ीन (दिखावटी मुसलमानों) की असलियत भी खुल गई, जो अपने ईमान में कमज़ोर थे और जिनके दिलों में बीमारी थी। इस तरह मुसलमानों की सफ़ (कतार) खालिस मोमिनों की बन गई।
दूसरी ओर, यही घटना काफ़िरों के लिए विनाश और सत्यानाश का कारण बनी। अल्लाह ने उन्हें उनके कु़फ़्र और सरकशी की वजह से धीरे-धीरे नष्ट किया और उनका अंत तबाही पर ही हुआ। चाहे मुसलमान उनसे शहीद हुए हों, यह शहादत मोमिनों के लिए रहमत और मग़फ़िरत का ज़रिया बनी, और चाहे मुसलमानों ने उन्हें क़त्ल किया हो, यह काफ़िरों के लिए जहन्नुम का रास्ता साफ करने वाला बना। इस प्रकार, हर हाल में मोमिनों का भला हुआ और काफ़िरों का नुक़सान।
फ़ायदे (सबक़):
- मुसीबतें और कठिनाइयाँ मोमिन के लिए रहमत होती हैं, क्योंकि इनसे उसके गुनाह माफ़ होते हैं और उसका दर्जा बुलंद होता है।
- परीक्षा के समय ही सच्चे और झूठे ईमान की पहचान होती है; यह मुनाफ़िक़ीन को बेनक़ाब करने का ज़रिया है।
- अल्लाह का क़ानून है कि वह मोमिनों को पाक करता है और काफ़िरों को धीरे-धीरे तबाही की तरफ ले जाता है, चाहे वह तुरंत नज़र न आए।
- मोमिन को चाहिए कि हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखे, क्योंकि जो चीज़ उसे बुरी लगती है, उसमें भी अल्लाह ने उसके लिए भलाई रखी होती है।
- यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि जीत और हार का फ़ैसला अल्लाह के हाथ में है; हार के बाद भी निराश न हों, क्योंकि यही परीक्षा उन्हें आगे की कामयाबी के लिए तैयार करती है।
📜 आयत 139-143 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 141
सूरा आल-इमरान आयत 141 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये (भी मंजूर था) कि सच्चे ईमानदारों को (साबित…सूरा आयत 141/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 139–143. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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