आल-इमरान · 177/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
إِنَّ الَّذِينَ اشْتَرَوُا الْكُفْرَ بِالْإِيمَانِ لَن يَضُرُّوا اللَّهَ شَيْئًا وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ ۝١٧٧
Innal lazeenash tarawul kufra bil eemaani lai yadurrul laaha shai anw wa lahum `azdaabun aleem
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जिन लोगों ने ईमान के एवज़ कुफ़्र ख़रीद किया वह हरगिज़ खुदा का कुछ भी नहीं बिगाड़ेंगे (बल्कि आप अपना) और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اشْتَرَوُا (इश्तरवु): ख़रीदा, बदला किया। यहाँ इसका अर्थ है "बदले में लेना" यानी ईमान को छोड़कर कुफ़्र को अपना लेना।
  • الْكُفْرَ بِالْإِيمَانِ (अल-कुफ़्र बिल-ईमान): ईमान के बदले कुफ़्र। यानी ईमान को बेचकर उसकी जगह कुफ़्र को ख़रीदना।
  • لَن يَضُرُّوا (लन यज़ुर्रू): वे हरगिज़ नुक़सान नहीं पहुँचाएँगे।
  • عَذَابٌ أَلِيمٌ (अज़ाबुन अलीम): दर्दनाक और बहुत तकलीफ़देह यातना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जिन्होंने ईमान (विश्वास) को छोड़कर कुफ़्र (अविश्वास) को अपना लिया। यानी उन्होंने सच्चाई और हिदायत को ठुकराकर गुमराही और अंधकार का रास्ता चुना। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसे लोग अपने इस काम से अल्लाह को ज़रा भी नुक़सान नहीं पहुँचा सकते। अल्लाह तो सर्वशक्तिमान है, उसकी सल्तनत और कुदरत पर इसका कोई असर नहीं पड़ता। उनका यह कदम दरअसल उन्हीं के लिए विनाशकारी है, क्योंकि इसका नुक़सान उन्हीं को भुगतना पड़ेगा। आख़िरत में उनके लिए एक ऐसा अज़ाब तैयार है जो बहुत दर्दनाक और तकलीफ़देह होगा। यह अज़ाब उनके कुफ़्र और सरकशी की सज़ा है, और यह सज़ा उनके लिए कभी ख़त्म नहीं होगी।


फ़ायदे (उपदेश):

  1. अल्लाह की बेनियाज़ी: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला किसी की इबादत का मोहताज नहीं और न ही किसी का नुक़सान उसे पहुँचा सकता है। उसकी ज़ात हर कमी से पाक है। हमारा ईमान या कुफ़्र उसके लिए फ़ायदा या नुक़सान का सबब नहीं बनता, बल्कि इसका अच्छा या बुरा नतीजा हमें ही मिलता है।
  2. ईमान की अहमियत: यह आयत ईमान की बहुत बड़ी क़द्र और अहमियत समझाती है। ईमान ही वह चीज़ है जो इंसान को अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुँचाती है। इसे छोड़ना और कुफ़्र को अपनाना सबसे बड़ा नुक़सान है।
  3. अंजाम की चेतावनी: जो लोग सच्चाई को जानते हुए भी उसे छोड़ देते हैं और बातिल को अपना लेते हैं, उनके लिए आख़िरत में दर्दनाक अज़ाब है। यह हमारे लिए एक सख़्त चेतावनी है कि हम अपने ईमान को कभी कमज़ोर न पड़ने दें और किसी दुनियावी फ़ायदे के लिए उसे बेचने की कोशिश न करें।
  4. अल्लाह पर भरोसा: जब हमें यक़ीन हो जाए कि कुफ़्र और गुमराही अल्लाह को कोई नुक़सान नहीं पहुँचा सकती, तो हमें अपने दीन पर मज़बूती से क़ायम रहना चाहिए और किसी की धमकी या लालच से नहीं डरना चाहिए। हमारा रब सबसे बड़ा है और उसी पर हमें भरोसा रखना है।


📜 आयत 175-179 — आल-इमरान

175إِنَّمَا ذَٰلِكُمُ الشَّيْطَانُ يُخَوِّفُ أَوْلِيَاءَهُ فَلَا تَخَافُوهُمْ وَخَافُونِ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
यह (मुख्बिर) बस शैतान था जो सिर्फ़ अपने दोस्तों को (रसूल का साथ देने से) डराता है पस तुम उनसे तो डरो नहीं अगर सच्चे मोमिन हो तो मुझ ही से डरते रहो
176وَلَا يَحْزُنكَ الَّذِينَ يُسَارِعُونَ فِي الْكُفْرِ ۚ إِنَّهُمْ لَن يَضُرُّوا اللَّهَ شَيْئًا ۗ يُرِيدُ اللَّهُ أَلَّا يَجْعَلَ لَهُمْ حَظًّا فِي الْآخِرَةِ ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ
और (ऐ रसूल) जो लोग कुफ़्र की (मदद) में पेश क़दमी कर जाते हैं उनकी वजह से तुम रन्ज न करो क्योंकि ये लोग ख़ुदा को कुछ ज़रर नहीं पहुँचा सकते (बल्कि) ख़ुदा तो ये चाहता है कि आख़ेरत में उनका हिस्सा न क़रार दे और उनके लिए बड़ा (सख्त) अज़ाब है
177إِنَّ الَّذِينَ اشْتَرَوُا الْكُفْرَ بِالْإِيمَانِ لَن يَضُرُّوا اللَّهَ شَيْئًا وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
बेशक जिन लोगों ने ईमान के एवज़ कुफ़्र ख़रीद किया वह हरगिज़ खुदा का कुछ भी नहीं बिगाड़ेंगे (बल्कि आप अपना) और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है
178وَلَا يَحْسَبَنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا أَنَّمَا نُمْلِي لَهُمْ خَيْرٌ لِّأَنفُسِهِمْ ۚ إِنَّمَا نُمْلِي لَهُمْ لِيَزْدَادُوا إِثْمًا ۚ وَلَهُمْ عَذَابٌ مُّهِينٌ
और जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तियार किया वह हरगिज़ ये न ख्याल करें कि हमने जो उनको मोहलत व बेफिक्री दे रखी है वह उनके हक़ में बेहतर है (हालॉकि) हमने मोहल्लत व बेफिक्री सिर्फ इस वजह से दी है ताकि वह और ख़ूब गुनाह कर लें और (आख़िर तो) उनके लिए रूसवा करने वाला अज़ाब है
179مَّا كَانَ اللَّهُ لِيَذَرَ الْمُؤْمِنِينَ عَلَىٰ مَا أَنتُمْ عَلَيْهِ حَتَّىٰ يَمِيزَ الْخَبِيثَ مِنَ الطَّيِّبِ ۗ وَمَا كَانَ اللَّهُ لِيُطْلِعَكُمْ عَلَى الْغَيْبِ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ يَجْتَبِي مِن رُّسُلِهِ مَن يَشَاءُ ۖ فَآمِنُوا بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ ۚ وَإِن تُؤْمِنُوا وَتَتَّقُوا فَلَكُمْ أَجْرٌ عَظِيمٌ
(मुनाफ़िक़ो) ख़ुदा ऐसा नहीं कि बुरे भले की तमीज़ किए बगैर जिस हालत पर तुम हो उसी हालत पर मोमिनों को भी छोड़ दे और ख़ुदा ऐसा भी नहीं है कि तुम्हें गैब की बातें बता दे मगर (हॉ) ख़ुदा अपने रसूलों में जिसे चाहता है (गैब बताने के वास्ते) चुन लेता है पस ख़ुदा और उसके रसूलों पर ईमान लाओ और अगर तुम ईमान लाओगे और परहेज़गारी करोगे तो तुम्हारे वास्ते बड़ी जज़ाए ख़ैर है
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अनुवाद — आल-इमरान 177

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Tuesday, August 18, 2026

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