अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اشْتَرَوُا (इश्तरवु): ख़रीदा, बदला किया। यहाँ इसका अर्थ है "बदले में लेना" यानी ईमान को छोड़कर कुफ़्र को अपना लेना।
- الْكُفْرَ بِالْإِيمَانِ (अल-कुफ़्र बिल-ईमान): ईमान के बदले कुफ़्र। यानी ईमान को बेचकर उसकी जगह कुफ़्र को ख़रीदना।
- لَن يَضُرُّوا (लन यज़ुर्रू): वे हरगिज़ नुक़सान नहीं पहुँचाएँगे।
- عَذَابٌ أَلِيمٌ (अज़ाबुन अलीम): दर्दनाक और बहुत तकलीफ़देह यातना।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जिन्होंने ईमान (विश्वास) को छोड़कर कुफ़्र (अविश्वास) को अपना लिया। यानी उन्होंने सच्चाई और हिदायत को ठुकराकर गुमराही और अंधकार का रास्ता चुना। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसे लोग अपने इस काम से अल्लाह को ज़रा भी नुक़सान नहीं पहुँचा सकते। अल्लाह तो सर्वशक्तिमान है, उसकी सल्तनत और कुदरत पर इसका कोई असर नहीं पड़ता। उनका यह कदम दरअसल उन्हीं के लिए विनाशकारी है, क्योंकि इसका नुक़सान उन्हीं को भुगतना पड़ेगा। आख़िरत में उनके लिए एक ऐसा अज़ाब तैयार है जो बहुत दर्दनाक और तकलीफ़देह होगा। यह अज़ाब उनके कुफ़्र और सरकशी की सज़ा है, और यह सज़ा उनके लिए कभी ख़त्म नहीं होगी।
फ़ायदे (उपदेश):
- अल्लाह की बेनियाज़ी: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला किसी की इबादत का मोहताज नहीं और न ही किसी का नुक़सान उसे पहुँचा सकता है। उसकी ज़ात हर कमी से पाक है। हमारा ईमान या कुफ़्र उसके लिए फ़ायदा या नुक़सान का सबब नहीं बनता, बल्कि इसका अच्छा या बुरा नतीजा हमें ही मिलता है।
- ईमान की अहमियत: यह आयत ईमान की बहुत बड़ी क़द्र और अहमियत समझाती है। ईमान ही वह चीज़ है जो इंसान को अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुँचाती है। इसे छोड़ना और कुफ़्र को अपनाना सबसे बड़ा नुक़सान है।
- अंजाम की चेतावनी: जो लोग सच्चाई को जानते हुए भी उसे छोड़ देते हैं और बातिल को अपना लेते हैं, उनके लिए आख़िरत में दर्दनाक अज़ाब है। यह हमारे लिए एक सख़्त चेतावनी है कि हम अपने ईमान को कभी कमज़ोर न पड़ने दें और किसी दुनियावी फ़ायदे के लिए उसे बेचने की कोशिश न करें।
- अल्लाह पर भरोसा: जब हमें यक़ीन हो जाए कि कुफ़्र और गुमराही अल्लाह को कोई नुक़सान नहीं पहुँचा सकती, तो हमें अपने दीन पर मज़बूती से क़ायम रहना चाहिए और किसी की धमकी या लालच से नहीं डरना चाहिए। हमारा रब सबसे बड़ा है और उसी पर हमें भरोसा रखना है।
📜 आयत 175-179 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 177
सूरा आल-इमरान आयत 177 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक जिन लोगों ने ईमान के एवज़ कुफ़्र ख़रीद किया…सूरा आयत 177/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 175–179. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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