Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अल-अज़ाबुल-अदना: निकट का अज़ाब, यानी दुनिया की मुसीबतें, बीमारियाँ, क़त्ल, क़ैद और अन्य परीक्षाएँ।
- अल-अज़ाबुल-अकबर: बड़ा अज़ाब, यानी आख़िरत का अज़ाब, जो जहन्नम की आग में होगा।
- यरजिऊन: वापस लौटें, यानी तौबा करके अपने रब की तरफ़ रुजू करें।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने नबी ﷺ को तसल्ली देते हुए और काफ़िरों को चेतावनी देते हुए फ़रमा रहे हैं कि हम उन लोगों को, जिन्होंने हमारे दीन को झुठलाया और हमारी आयतों से मुँह मोड़ा, ज़रूर दुनिया में ही (बड़े अज़ाब से पहले) छोटा और निकट का अज़ाब चखाएँगे। यह अज़ाब मुसीबतों, बीमारियों, क़त्ल, क़ैद, क़हत (सूखे) और दूसरी परीक्षाओं की शक्ल में आता है, ताकि वे चौंकें, अपनी ग़लती का एहसास करें और अपने रब की तरफ़ लौट आएँ। यह दुनिया का अज़ाब उस बड़े अज़ाब से पहले है जो आख़िरत में उनके लिए तैयार है — जहन्नम की आग, जो कहीं ज़्यादा सख्त और हमेशा रहने वाली है। अल्लाह का यह तरीक़ा बड़ी रहमत वाला है कि वह बंदों को पहले छोटी सज़ा देता है, ताकि वे सुधर जाएँ और बड़े अज़ाब से बच जाएँ। यह अल्लाह की मेहरबानी है कि वह अपने बंदों को मौका देता है कि वे तौबा कर लें और अपनी ग़लतियों से बाज़ आ जाएँ।
दावती पहलू:
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है। वह चाहता है कि उसके बंदे सीधी राह पर आएँ, इसलिए वह उन्हें दुनिया में छोटी-छोटी मुसीबतों और परीक्षाओं से आगाह करता है, ताकि वे अपनी ग़लतियों पर पछताएँ और उसकी तरफ़ लौट आएँ। यह अल्लाह का प्यार है कि वह हमें आख़िरत के बड़े अज़ाब से पहले दुनिया में ही चेतावनी दे देता है। हमें चाहिए कि जब भी कोई मुसीबत आए, हम उसे अल्लाह की तरफ़ से एक इशारा समझें और अपने अंदर झाँकें — क्या हमने कोई गुनाह किया है? क्या हम अपने रब से दूर हो गए हैं? यही वह मौका है जब हमें तौबा करके अल्लाह की रहमत की तरफ़ दौड़ना चाहिए। अल्लाह तआला क़ुरआन में फ़रमाता है कि वह तौबा करने वालों से बहुत प्यार करता है और उनके गुनाह माफ़ कर देता है। याद रखिए, दुनिया की हर मुसीबत आख़िरत के अज़ाब के मुक़ाबले में बहुत छोटी है। अल्लाह ने हमें मौका दिया है कि हम इसी दुनिया में सुधर जाएँ और उस बड़े अज़ाब से बच जाएँ। यह अल्लाह की बड़ी रहमत है कि उसने हमें चेतावनी दी और हमारे लिए तौबा का दरवाज़ा खुला रखा है। आओ, हम सब अपने रब की तरफ़ लौटें, अपने गुनाहों से तौबा करें और उसकी रहमत के साये में आ जाएँ।
📜 आयत 19-23 — सूरा अस-सजदा
अनुवाद — अस-सजदा 21
सूरा अस-सजदा आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हम यक़ीनी (क़यामत के) बड़े अज़ाब से पहले दुनिया…सूरा आयत 21/30 — सूरा अस-सजदा السجدة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-सजदा सुनें, सूरा अस-सजदा अनुवाद, सूरा अस-सजदा mp3, सूरा अस-सजदा pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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