अस-सजदा · 20/30
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-सजदा
وَأَمَّا الَّذِينَ فَسَقُوا فَمَأْوَاهُمُ النَّارُ ۖ كُلَّمَا أَرَادُوا أَن يَخْرُجُوا مِنْهَا أُعِيدُوا فِيهَا وَقِيلَ لَهُمْ ذُوقُوا عَذَابَ النَّارِ الَّذِي كُنتُم بِهِ تُكَذِّبُونَ ۝٢٠
Wa ammal lazeena fasaqoo famaawaahumn Naaru kullamaaa araadooo any yakhrujoo minhaaa u`eedoo feehaa wa qeela lahum zooqoo `zaaaban Naaril lazee kuntum bihee tukazziboon
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने बदकारी की उनका ठिकाना तो (बस) जहन्नुम है वह जब उसमें से निकल जाने का इरादा करेंगे तो उसी में फिर ढकेल दिए जाएँगे और उन से कहा जाएगा कि दोज़ख़ के जिस अज़ाब को तुम झुठलाते थे अब उसके मज़े चखो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَسَقُوا (फ़सक़ू): अल्लाह की आज्ञा से निकल जाना, अवज्ञा करना, पाप में लिप्त होना।
  • مَأْوَاهُمُ (मअ्वाहुम): उनका ठिकाना, उनका निवास स्थान।
  • أُعِيدُوا (उईदू): उन्हें लौटा दिया जाएगा।
  • ذُوقُوا (ज़ूक़ू): चखो, अनुभव करो।
  • تُكَذِّبُونَ (तुकज़्ज़िबून): तुम झुठलाते थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों के अंजाम का ज़िक्र कर रहे हैं जिन्होंने उसकी आज्ञा का उल्लंघन किया और अपने जीवन में उसकी नाफ़रमानी की राह अपनाई। ऐसे लोगों का अंतिम ठिकाना और स्थायी निवास जहन्नम की आग है। यह कोई अस्थायी सज़ा नहीं, बल्कि उनका स्थायी ठिकाना है जहाँ वे हमेशा रहेंगे।

फिर अल्लाह तआला उस यातना की भयावहता का वर्णन करते हैं कि जब भी वे उस आग से निकलने की कोशिश करेंगे, उन्हें ज़बरदस्ती वापस उसमें धकेल दिया जाएगा। यह उनके लिए सबसे बड़ी मानसिक और शारीरिक यातना होगी — हर बार निकलने की आशा, और हर बार उस आशा का टूटना। यह उनकी सज़ा का एक हिस्सा है कि उन्हें कभी राहत नहीं मिलेगी।

इसके बाद उन्हें तौबीख़ (फटकार) और अपमान के तौर पर कहा जाएगा: "चखो उस आग की यातना जिसे तुम दुनिया में झुठलाया करते थे।" यानी जब दुनिया में अल्लाह के रसूल और उनके अनुयायी उन्हें इस यातना से डराते थे, तो वे उसे मज़ाक़ समझते थे और झुठलाते थे। आज वही यातना उनके सामने है, और उन्हें उसे चखना ही पड़ेगा। यह उनके लिए सबसे बड़ी शर्मिंदगी और पछतावे का क्षण होगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह की यातना से डराती है और हमें सचेत करती है कि हम अपने जीवन में उसकी अवज्ञा से बचें। यह हमारे लिए एक चेतावनी है कि दुनिया की यह ज़िंदगी बहुत छोटी है, लेकिन आख़िरत का जीवन अनंत है। जो लोग आज अल्लाह की आज्ञा को ठुकराते हैं और अपनी इच्छाओं के पीछे भागते हैं, वे कल उसी यातना का सामना करेंगे जिसे वे आज मज़ाक़ समझ रहे हैं।

लेकिन साथ ही, यह आयत हमें अल्लाह की रहमत की ओर भी ले जाती है — कि उसने हमें आगाह किया है, हमें चेतावनी दी है, ताकि हम उसकी ओर लौटें और अपने जीवन को सुधारें। अल्लाह तआला कितना दयालु है कि उसने हमें दुनिया में ही सचेत कर दिया, ताकि हम उसकी यातना से बच सकें। हमें चाहिए कि इस चेतावनी को गंभीरता से लें और अपने जीवन को अल्लाह की आज्ञा के अनुसार ढालें, ताकि हम उस दिन की शर्मिंदगी और यातना से बच सकें और उसकी जन्नत के हक़दार बन सकें।



📜 आयत 18-22 — सूरा अस-सजदा

18أَفَمَن كَانَ مُؤْمِنًا كَمَن كَانَ فَاسِقًا ۚ لَّا يَسْتَوُونَ
तो क्या जो शख़्श ईमानदार है उस शख़्श के बराबर हो जाएगा जो बदकार है (हरगिज़ नहीं) ये दोनों बराबर नही हो सकते
19أَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَلَهُمْ جَنَّاتُ الْمَأْوَىٰ نُزُلًا بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
लेकिन जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे अच्छे काम किए उनके लिए तो रहने सहने के लिए (बेहश्त के) बाग़ात हैं ये सामाने ज़ियाफ़त उन कारगुज़ारियों का बदला है जो वह (दुनिया में) कर चुके थे
20وَأَمَّا الَّذِينَ فَسَقُوا فَمَأْوَاهُمُ النَّارُ ۖ كُلَّمَا أَرَادُوا أَن يَخْرُجُوا مِنْهَا أُعِيدُوا فِيهَا وَقِيلَ لَهُمْ ذُوقُوا عَذَابَ النَّارِ الَّذِي كُنتُم بِهِ تُكَذِّبُونَ
और जिन लोगों ने बदकारी की उनका ठिकाना तो (बस) जहन्नुम है वह जब उसमें से निकल जाने का इरादा करेंगे तो उसी में फिर ढकेल दिए जाएँगे और उन से कहा जाएगा कि दोज़ख़ के जिस अज़ाब को तुम झुठलाते थे अब उसके मज़े चखो
21وَلَنُذِيقَنَّهُم مِّنَ الْعَذَابِ الْأَدْنَىٰ دُونَ الْعَذَابِ الْأَكْبَرِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
और हम यक़ीनी (क़यामत के) बड़े अज़ाब से पहले दुनिया के (मामूली) अज़ाब का मज़ा चखाएँगें जो अनक़रीब होगा ताकि ये लोग अब भी (मेरी तरफ) रुज़ू करें
22وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّن ذُكِّرَ بِآيَاتِ رَبِّهِ ثُمَّ أَعْرَضَ عَنْهَا ۚ إِنَّا مِنَ الْمُجْرِمِينَ مُنتَقِمُونَ
और जिस शख़्श को उसके परवरदिगार की आयतें याद दिलायी जाएँ और वह उनसे मुँह फेर उससे बढ़कर और ज़ालिम कौन होगा हम गुनाहगारों से इन्तक़ाम लेगें और ज़रुर लेंगे
अस-सजदाकुरान सूची
30आयत
मक्कीअवतरण स्थान
20आयत

अनुवाद — अस-सजदा 20

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Friday, October 2, 2026

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